SC-ST आरक्षण पर NDA में घमासान! चिराग पासवान ने मांझी से मांगा इस्तीफा, जवाब में बोले- गरीबों का हक छिन जाएगा

SC-ST आरक्षण पर NDA में घमासान! चिराग पासवान ने मांझी से मांगा इस्तीफा, जवाब में बोले- गरीबों का हक छिन जाएगा

SC-ST आरक्षण में सब-कैटेगरी और क्रीमी लेयर के मुद्दे ने NDA के भीतर ही नया विवाद खड़ा कर दिया है। शनिवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए। बात इतनी बढ़ी कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से इस्तीफे तक की मांग कर दी। विवाद की शुरुआत मांझी के बेटे और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के नेता संतोष कुमार सुमन के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने SC और ST आरक्षण के भीतर सब-कैटेगरी बनाने और मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताई थी।

यह मामला सिर्फ दो नेताओं की राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में सवाल है कि आरक्षण का लाभ अनुसूचित जाति और जनजाति के भीतर किन समुदायों तक पहुंच रहा है और क्या अपेक्षाकृत ज्यादा पिछड़े समूहों को उनका पर्याप्त हिस्सा मिल पा रहा है।

संतोष सुमन ने उठाया सवाल- आरक्षण का फायदा किसे मिला?

संतोष कुमार सुमन ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत बताते हुए कहा कि इसका मूल उद्देश्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। उन्होंने बिहार के सामाजिक समीकरणों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि राज्य की आबादी में करीब 4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले मुसहर समुदाय से अब तक कोई DM या SP क्यों नहीं बन पाया।

उनका कहना था कि यह देखना जरूरी है कि आरक्षण का लाभ किस वर्ग को कितना मिला है और समाज के सबसे कमजोर तबके तक इसका फायदा कितना पहुंचा। उन्होंने अलग-अलग समूहों के बीच लाभ के अंतर का तुलनात्मक अध्ययन किए जाने की जरूरत बताई।

सुमन ने बिहार में महादलित श्रेणी के अनुभव का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, 22 दलित जाति समूहों में से 18 को मिलाकर बनाई गई महादलित कैटेगरी उम्मीद के मुताबिक लाभ नहीं दे सकी। उन्होंने EBC और EWS जैसी श्रेणियों के उदाहरण देते हुए आरक्षण नीति की प्रभावशीलता पर सवाल उठाया।

यहीं से NDA के भीतर राजनीतिक टकराव की शुरुआत हुई।

चिराग पासवान बोले- पहले खुद इस्तीफा दें

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने मांझी और उनके बेटे के रुख पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि अगर वे SC आरक्षण में सब-कोटा और क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं, तो पहले उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

चिराग का तर्क है कि SC आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति नहीं, बल्कि लंबे समय से चला आ रहा सामाजिक भेदभाव और छुआछूत है। उनके मुताबिक, इसे केवल आर्थिक नजरिए से देखना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई व्यक्ति आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने की वकालत करता है, तो उसे खुद आरक्षण का लाभ लेना बंद करने की पहल करनी चाहिए। चिराग ने साफ संकेत दिया कि वह SC-ST आरक्षण में आर्थिक आधार पर ऐसी व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं।

उनके बयान ने NDA के भीतर आरक्षण को लेकर मतभेद को सार्वजनिक कर दिया।

मांझी ने पलटकर कहा- गरीबों का नुकसान होगा

चिराग पासवान के हमले के बाद जीतन राम मांझी ने भी जवाब देने में देर नहीं की। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में गरीब और वंचित लोग आरक्षण के वास्तविक लाभ से दूर रह सकते हैं।

मांझी ने चिराग पर गरीबों के हितों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आरक्षण के भीतर लाभ का बंटवारा व्यापक जनहित के लिए जरूरी है।

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर चिराग गरीबों के हितों की चिंता नहीं करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

यानी जिस मुद्दे की शुरुआत आरक्षण के भीतर प्रतिनिधित्व और लाभ के बंटवारे पर चर्चा से हुई थी, वह अब NDA के दो सहयोगी नेताओं के बीच सीधे राजनीतिक टकराव में बदल गई है।

SC-ST सब-कैटेगरी का विवाद आया कहां से?

SC-ST आरक्षण में सब-क्लासिफिकेशन का मुद्दा नया नहीं है। 2024 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में राज्यों को अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर सब-कैटेगरी बनाने की अनुमति दी गई थी। इसका उद्देश्य यह था कि आरक्षण का लाभ उन समूहों तक भी पहुंच सके, जो इन व्यापक श्रेणियों के भीतर अपेक्षाकृत ज्यादा पिछड़े हैं।

इसी फैसले में SC और ST के भीतर क्रीमी लेयर को लेकर भी चर्चा हुई और राज्यों से इस संबंध में उपयुक्त मानदंड बनाने की बात कही गई।

हालांकि, केंद्र सरकार ने बाद में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत SC और ST पर लागू नहीं किया जा सकता। सरकार के मुताबिक, यह अवधारणा फिलहाल OBC आरक्षण के संदर्भ में लागू है और SC-ST के लिए इसे उसी तरह लागू करने का कोई स्पष्ट संवैधानिक आधार नहीं है।

यही वजह है कि अब SC-ST आरक्षण में सब-कैटेगरी और क्रीमी लेयर का सवाल राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

आम लोगों के लिए इसका सीधा मतलब यह है कि आरक्षण व्यवस्था में अगर कोई बदलाव होता है, तो उसका असर सरकारी नौकरियों, शिक्षा और प्रतिनिधित्व के अवसरों पर पड़ सकता है। लेकिन फिलहाल इस मुद्दे पर NDA के भीतर ही अलग-अलग राय सामने आ रही है।

चिराग पासवान सामाजिक भेदभाव को SC-ST आरक्षण का मूल आधार मानते हैं, जबकि मांझी और उनके बेटे आरक्षण के लाभ को ज्यादा वंचित समूहों तक पहुंचाने के लिए भीतर से वर्गीकरण की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। आने वाले समय में यह बहस सिर्फ बिहार की राजनीति नहीं, बल्कि देश की आरक्षण नीति पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकती है।