सुल्तानपुर बार एसोसिएशन के चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बार एसोसिएशन की एग्जीक्यूटिव कमेटी और गवर्निंग काउंसिल में महिला वकीलों को 30 फीसदी आरक्षण देना होगा। इतना ही नहीं, अहम पदों को भी अलग-अलग चुनाव वर्षों में रोटेशन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षित किया जाएगा। कोर्ट का यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुपालन में आया है।
यह मामला तब हाईकोर्ट पहुंचा, जब सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की सदस्य और प्रैक्टिस कर रहीं अधिवक्ता शशि मिश्रा ने आरोप लगाया कि जरूरी महिला आरक्षण सुनिश्चित किए बिना चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके बाद हाईकोर्ट ने चुनाव व्यवस्था की समीक्षा की और आरक्षण के साथ-साथ चुनाव कार्यक्रम को लेकर भी कई अहम निर्देश जारी किए।
पहले प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुआ हाईकोर्ट, बोला- सभी पदों पर चाहिए 30% प्रतिनिधित्व
बार एसोसिएशन ने शुरुआत में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कुछ पद आरक्षित करने का प्रस्ताव रखा था। इसमें ट्रेजरर का एक पद, चार में से दो सीनियर एग्जीक्यूटिव या गवर्निंग काउंसिल पद और चार में से दो जूनियर पद महिलाओं के लिए रखने की बात थी।
लेकिन 10 अगस्त को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस व्यवस्था को पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक केवल कुछ पदों पर आरक्षण देना पर्याप्त नहीं है। बार एसोसिएशन की पूरी संरचना में 30 फीसदी महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना होगा।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 के तहत दिए गए निर्देश बार एसोसिएशन पर लागू होते हैं, जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई दूसरा आदेश न आ जाए।
2026 से शुरू होगा रोटेशन, अध्यक्ष से महासचिव तक तय हुआ आरक्षण
सुल्तानपुर बार एसोसिएशन की एग्जीक्यूटिव कमेटी में अध्यक्ष, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी, ट्रेजरर और तीन जॉइंट सेक्रेटरी के पद हैं। इसके अलावा सीनियर और जूनियर गवर्निंग काउंसिल के सदस्य भी इसमें शामिल हैं।
हाईकोर्ट ने इन्हीं पदों पर महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए रोटेशन व्यवस्था तय की है।
तीन जॉइंट सेक्रेटरी पदों में से एक पद हर चुनाव चक्र में महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। 2026 में जॉइंट सेक्रेटरी (एडमिनिस्ट्रेशन) का पद महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित है। 2027 में जॉइंट सेक्रेटरी (लाइब्रेरी) और 2028 में जॉइंट सेक्रेटरी (क्लब) के पद पर यह आरक्षण लागू होगा।
बाद के आदेश में ट्रेजरर का पद भी 2026 के चुनाव में महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित कर दिया गया। इसके बाद 2029, 2032 और आगे रोटेशन के आधार पर आरक्षण जारी रहेगा।
जनरल सेक्रेटरी का पद 2027 में महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित होगा। फिर 2030, 2033 और आगे इसी क्रम में आरक्षण होगा। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के लिए भी 2027, 2030 और आगे के चुनावों में रोटेशन रहेगा।
वहीं, अध्यक्ष पद 2028 में महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। इसके बाद 2031, 2034 और आगे इसी व्यवस्था के तहत चुनाव होंगे।
चार जूनियर एग्जीक्यूटिव सदस्यों में से एक और चार सीनियर एग्जीक्यूटिव सदस्यों में से एक पद हमेशा महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा। इस तरह 16 एग्जीक्यूटिव पदों में कुल पांच पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए गए हैं।
‘सिर्फ 41 महिला सदस्य हैं’ वाली दलील भी कोर्ट ने ठुकराई
सुनवाई के दौरान एक इंटरवेनर ने 30 फीसदी आरक्षण पर सवाल उठाया। दलील दी गई कि बार एसोसिएशन में कुल 2,028 सदस्य हैं, जबकि महिला सदस्यों की संख्या केवल 41 है। इसलिए 30 फीसदी आरक्षण व्यावहारिक नहीं है।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए आदेश दे रहा है और आरक्षण का प्रतिशत खुद बदलने का अधिकार उसके पास नहीं है।
कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि महिला आरक्षण लागू करना बार एसोसिएशन की इच्छा पर निर्भर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना जरूरी है। इसी वजह से चुनाव प्रक्रिया को भी नए सिरे से व्यवस्थित करने का आदेश दिया गया।
चुनाव कार्यक्रम फिर बनेगा, आपराधिक रिकॉर्ड छिपाया तो उम्मीदवारी पर खतरा
आरक्षण की नई व्यवस्था लागू करने के लिए हाईकोर्ट ने पहले से घोषित चुनाव कार्यक्रम को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया है। 25 अगस्त के आदेश में एल्डर्स कमेटी को कहा गया कि वह तीन दिनों के भीतर नया चुनाव कार्यक्रम जारी करे और कार्यक्रम जारी होने के तीन सप्ताह के भीतर चुनाव करा दे।
कोर्ट ने यह जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से एल्डर्स कमेटी को दी है। निवर्तमान पदाधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप करने से भी रोका गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि ऐसा हस्तक्षेप अवमानना और कोर्ट की अवहेलना माना जा सकता है और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
इस फैसले का एक और अहम पहलू उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि से जुड़ा है। अब चुनाव लड़ने वाले हर उम्मीदवार को अपने खिलाफ दर्ज FIR, आपराधिक मामलों और उनके नतीजों की जानकारी देनी होगी। मामला खत्म हो चुका हो या अभी चल रहा हो, दोनों स्थितियों की जानकारी वोटरों के सामने रखनी होगी।
उम्मीदवारों को इन मामलों पर अपना पक्ष या स्पष्टीकरण देने का मौका भी मिलेगा। लेकिन जानकारी छिपाने या गलत विवरण देने की स्थिति में उनकी उम्मीदवारी या चुनाव रद्द करने पर विचार किया जा सकता है। नामांकन पत्र में इसके लिए जरूरी प्रावधान शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि उसके आदेश में बदलाव की मांग वाली कोई और अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी। इस तरह सुल्तानपुर बार एसोसिएशन का आगामी चुनाव अब केवल नई आरक्षण व्यवस्था के तहत ही होगा।
Case Title: Shashi Mishra vs. Bar Council Of U.P. Thru. Its Secy. And 2 Others, 2026 LiveLaw (AB) 633

