झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय से विधायक कल्पना सोरेन के खिलाफ कथित आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने 30 वर्षीय सुरक्षा गार्ड साहदेव उरांव की जमानत याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। उरांव ने झारखंड हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। वह सितंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में है। सुप्रीम कोर्ट का नोटिस फिलहाल जमानत मिलने का आदेश नहीं है, लेकिन अब राज्य सरकार को आरोपी की याचिका पर अपना पक्ष रखना होगा।
फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ मामला, फिर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
मामला फेसबुक पर “Adivasi Ladka Raju Oraon” नाम के अकाउंट से कथित तौर पर एक पोस्ट किए जाने से जुड़ा है। अभियोजन के मुताबिक, इस अकाउंट से कल्पना सोरेन की तस्वीर के साथ कथित रूप से अश्लील, आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट की गई थीं।
पुलिस के अनुसार, यह पोस्ट 28 अगस्त 2025 को सामने आया। इसके अगले दिन रांची साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया।
साहदेव उरांव को 6 सितंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में है। मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की यौन उत्पीड़न, पीछा करने, महिला की गरिमा का अपमान करने और मानहानि से जुड़ी धाराओं के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की पहचान चोरी और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित करने से संबंधित धाराएं लगाई गई हैं।
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत, अब सुप्रीम कोर्ट में दांव
उरांव ने पहले झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया था। लेकिन 17 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने जमानत का विरोध किया था। सरकार की दलील थी कि आरोपी ने कथित तौर पर एक फर्जी डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर एक महिला विधायक को निशाना बनाया। राज्य ने यह भी तर्क दिया कि पहचान छिपाकर कथित अपमानजनक और लैंगिक टिप्पणियां करना मामले की गंभीरता को बढ़ाता है।
इसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल की। सोमवार को जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने इस याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया।
यानी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ राज्य से जवाब मांगा है। जमानत पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।
आरोपी की दलील- जांच पूरी, फिर हिरासत क्यों?
सुप्रीम कोर्ट में साहदेव उरांव की ओर से दलील दी गई कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। याचिका में कहा गया है कि अभियोजन के पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सबूत पहले से जांच एजेंसी के कब्जे में हैं। ऐसे में आरोपी को आगे भी हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है।
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि उसके पास सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। उसने अपने खिलाफ किसी पुराने आपराधिक मामले का रिकॉर्ड नहीं होने की बात भी कही है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाईकोर्ट ने जमानत खारिज करते समय अपराध की गंभीरता पर ज्यादा जोर दिया, जबकि जमानत पर फैसला करते समय हिरासत की अवधि, जांच की स्थिति और अन्य परिस्थितियों को भी देखा जाना चाहिए था।
आरोपी ने BNSS की धारा 483 के तहत जमानत से जुड़े वैधानिक पहलुओं पर भी हाईकोर्ट द्वारा पर्याप्त विचार नहीं किए जाने का दावा किया है।
इसी घटना से जुड़े दूसरे मामले में मिल चुकी है जमानत
साहदेव उरांव ने सुप्रीम कोर्ट के सामने एक और महत्वपूर्ण तथ्य रखा है। उसका कहना है कि इसी कथित घटना से जुड़े एक दूसरे मामले में उसे 13 फरवरी 2026 को जमानत मिल चुकी है।
यह दूसरा मामला कांके प्रखंड समन्वय समिति के प्रमुख जावेद अंसारी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। याचिका में दावा किया गया है कि दोनों मामले एक ही कथित घटना से जुड़े हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि दोनों मामलों में शिकायत खुद कल्पना सोरेन की ओर से नहीं की गई थी।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी कहा है कि 6 सितंबर 2025 से उसकी हिरासत को हाईकोर्ट ने पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। आरोपी की ओर से अधिवक्ता राहुल श्याम भंडारी पेश हुए। मामले का नाम Sahadev Uraon @ Sahadev Oraon v. State of Jharkhand है और इसकी डायरी संख्या 26999/2026 है।
आगे की सुनवाई में राज्य सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल अदालत के आदेश का मतलब इतना है कि जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई आगे बढ़ाई है; आरोपी को अभी जमानत नहीं मिली है।



