छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने पिछले महीने संसद मार्च के दौरान कथित तौर पर हुए पैलेट गन, लाठीचार्ज, इलेक्ट्रिक बैटन और आंसू गैस के इस्तेमाल की जांच के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित कर दी है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे।
अदालत ने साफ किया है कि समिति केवल बल प्रयोग की परिस्थितियों की जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि क्या भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल हुआ था। साथ ही महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोप भी जांच के दायरे में रहेंगे।
यह आदेश उस याचिका की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
कमेटी में कौन-कौन शामिल हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया है। इससे जांच को स्वतंत्र और व्यापक बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
कमेटी के सदस्य हैं:
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जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी (पूर्व न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट) – अध्यक्ष
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जस्टिस रवि शंकर झा (पूर्व मुख्य न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट)
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जस्टिस शालिंदर कौर (पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली हाई कोर्ट)
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ऋषि कुमार शुक्ला (पूर्व निदेशक, सीबीआई)
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एल. आर. बिश्नोई (पूर्व डीजीपी, मेघालय)
इस तरह समिति में न्यायिक और जांच एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि पूरे घटनाक्रम की बहुस्तरीय जांच हो सके।
किन आरोपों की होगी जांच?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, समिति आंदोलन के दौरान हुई कई तरह की पुलिस कार्रवाई की पड़ताल करेगी।
जांच में शामिल प्रमुख बिंदु होंगे:
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पैलेट गन के इस्तेमाल की परिस्थितियां
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इलेक्ट्रिक बैटन के उपयोग की जांच
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लाठीचार्ज की आवश्यकता और उसकी सीमा
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आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियां
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महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार
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भीड़ नियंत्रण के दौरान अपनाए गए तरीकों की समीक्षा
इन सभी पहलुओं पर समिति उपलब्ध साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर अपनी जांच करेगी।
वीडियो फुटेज भी सौंपने का आदेश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने घटनास्थल से जुड़े वीडियो रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश दिया कि 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ी सभी उपलब्ध वीडियो फुटेज हाई पावर कमेटी को उपलब्ध कराई जाए। अदालत का मानना है कि वीडियो रिकॉर्डिंग घटनाक्रम को समझने और तथ्यों की पुष्टि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा मामला कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले आयोजित संसद मार्च से जुड़ा है। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि उन्हें रोकने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।
इसी दौरान सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए, जिनमें महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार होने के आरोप लगाए गए। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मामले में पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप लगाया था और इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाए थे।
हालांकि इन आरोपों की सत्यता पर फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और अन्य तथ्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। इस जांच की रिपोर्ट आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकती है।

