यूपी के युवाओं के लिए बड़ा प्लान! गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली में जल्द शुरू होंगे CIIIT सेंटर, CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

यूपी के युवाओं के लिए बड़ा प्लान! गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली में जल्द शुरू होंगे CIIIT सेंटर, CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश सरकार ने कौशल विकास और रोजगार को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग की समीक्षा बैठक में साफ निर्देश दिए कि गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली के सेंटर फॉर इनोवेशन, इन्वेंशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग (CIIIT) केंद्रों का संचालन जल्द से जल्द शुरू किया जाए। साथ ही उन्होंने आईटीआई संस्थानों को उद्योगों से सीधे जोड़ने, अप्रेंटिसशिप बढ़ाने और युवाओं को वैश्विक रोजगार के लिए तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

सरकार का फोकस अब केवल प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के वास्तविक अवसर भी मिलें। यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने विभाग को परिणाम आधारित कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।

CIIIT केंद्रों को बनाया जाएगा आधुनिक स्किल हब

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने तीन नए CIIIT केंद्रों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गोरखपुर, मुजफ्फरनगर और बरेली के केंद्रों को आधुनिक तकनीक और उद्योग आधारित प्रशिक्षण के उत्कृष्ट संस्थान के रूप में विकसित किया जाए।

बैठक में बताया गया कि टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से प्रदेश के 150 राजकीय आईटीआई का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा 62 अन्य आईटीआई के उन्नयन की प्रक्रिया भी जारी है। वहीं उद्योगों की भागीदारी से 37 सरकारी आईटीआई में एडवांस स्किल लैब स्थापित की जा चुकी हैं, जहां आधुनिक मशीनों और तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

आईटीआई और उद्योगों के बीच बढ़ेगा सीधा तालमेल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि यदि प्रशिक्षण सीधे उद्योगों की मांग से जुड़ा होगा तो युवाओं को नौकरी मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • प्रत्येक मंडल मुख्यालय पर नियमित रोजगार मेलों का आयोजन किया जाए।

  • आईटीआई और उद्योगों के बीच निरंतर संवाद की व्यवस्था बनाई जाए।

  • अप्रेंटिसशिप और ऑन-जॉब ट्रेनिंग को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जाए।

  • कौशल विकास को घरेलू रोजगार के साथ-साथ वैश्विक अवसरों से भी जोड़ा जाए।

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि जापान और जर्मनी जैसे देशों में कुशल मानव संसाधन की मांग को देखते हुए विदेशी भाषाओं के डिजिटल प्रशिक्षण के लिए कंपनियों के चयन की प्रक्रिया चल रही है।

अनुदेशकों की भर्ती और भाषा प्रशिक्षण पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयनित प्रशिक्षकों को नियमित नियुक्ति में उनके अनुभव और कार्य के आधार पर वेटेज दिया जाना चाहिए।

विभाग के अनुसार:

  • 2,406 अनुदेशक पदों पर चयन किया जा चुका है।

  • इनमें से 2,200 से अधिक प्रशिक्षक कार्यभार संभाल चुके हैं।

साथ ही प्रशिक्षणार्थियों के लिए हिंदी की आधिकारिक शब्दावली का प्रशिक्षण शुरू किया गया है, जबकि अंग्रेजी भाषा का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है ताकि युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसरों के लिए तैयार हो सकें।

गरीब परिवारों के युवाओं पर रहेगा विशेष फोकस

बैठक में मुख्यमंत्री ने जीरो पॉवर्टी अभियान से जुड़े परिवारों के बच्चों और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के निर्देश भी दिए। विभाग ने बताया कि 14 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 9.52 लाख युवाओं का सत्यापन पूरा हो चुका है। इनमें 1.44 लाख युवाओं को पात्र पाया गया है और 8,746 युवाओं का प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण भी हो चुका है।

पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से 21.13 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 12.94 लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अब सफलता का पैमाना केवल प्रशिक्षित युवाओं की संख्या नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि कितने युवाओं को स्थायी रोजगार या स्वरोजगार मिला। उनका लक्ष्य उत्तर प्रदेश को आधुनिक कौशल, उद्योग आधारित प्रशिक्षण और वैश्विक रोजगार के अवसरों के जरिए देश का अग्रणी स्किल हब बनाना है।