तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणापत्र जारी कर सियासी मुकाबले को नई दिशा दे दी है। इस घोषणापत्र में महिलाओं, किसानों और छोटे कारोबारियों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले कई बड़े वादे किए गए हैं। ऐसे समय में जब दक्षिण भारत में राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिशें तेज हैं, यह घोषणापत्र आम मतदाता की जेब और रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया नजर आता है।
महिलाओं पर खास फोकस: हर महीने मदद और मुफ्त सुविधाएं
घोषणापत्र की सबसे बड़ी झलक महिलाओं के लिए किए गए वादों में दिखती है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने साफ कहा कि अगर AIADMK के नेतृत्व में सरकार बनती है, तो हर परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
इसके अलावा, हर परिवार को एकमुश्त 10,000 रुपये देने का भी वादा किया गया है। रसोई खर्च को ध्यान में रखते हुए हर साल तीन मुफ्त एलपीजी सिलेंडर देने की घोषणा की गई है। साथ ही, महिलाओं को ई-स्कूटर खरीदने पर 25,000 रुपये की सहायता देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जो शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में उनकी गतिशीलता बढ़ाने पर केंद्रित है।
MSME और महिला समूहों के लिए 50 लाख तक ब्याज-मुक्त लोन
घोषणापत्र में छोटे कारोबार और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। पार्टी ने वादा किया है कि स्वयं सहायता समूहों, महिला सहकारी समितियों और MSME सेक्टर को 50 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके साथ एक अहम शर्त भी जोड़ी गई है—निर्माण क्षेत्र की इकाइयों को अपनी कुल खरीद का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा इन महिला समूहों से लेना होगा। यह कदम न सिर्फ वित्तीय मदद देगा, बल्कि बाजार तक पहुंच भी सुनिश्चित करेगा।
किसानों के लिए अतिरिक्त सहायता और आय बढ़ाने की कोशिश
किसानों को लेकर भी घोषणापत्र में सीधा आर्थिक लाभ देने की बात कही गई है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाले 6,000 रुपये के अलावा राज्य स्तर पर 3,000 रुपये अतिरिक्त देने का वादा किया गया है। यानी कुल मिलाकर किसानों को सालाना 9,000 रुपये की सहायता मिल सकती है।
यह कदम ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब कृषि आय और लागत के बीच संतुलन एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है।
कानून-व्यवस्था पर जोर: CCTV और फास्ट-ट्रैक अदालतें
घोषणापत्र में कानून-व्यवस्था सुधारने के लिए भी कई प्रावधान शामिल हैं। जीरो FIR व्यवस्था लागू करने, गवाह सुरक्षा सुनिश्चित करने और गंभीर अपराधों के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की बात कही गई है।
बसों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों में व्यापक स्तर पर CCTV कैमरे लगाने का वादा भी किया गया है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा सके। निर्भया फंड के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया गया है।
तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक चरण में मतदान होना है। ऐसे में यह घोषणापत्र सिर्फ वादों की सूची नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा भी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये घोषणाएं मतदाताओं को कितनी प्रभावित करती हैं और क्या ये राज्य की राजनीतिक दिशा बदलने में भूमिका निभा पाती हैं।


