महिला आरक्षण से लेकर सीट बढ़ोतरी तक संग्राम तेज: विपक्ष की कल अहम बैठक, सरकार को घेरने की पूरी तैयारी

महिला आरक्षण से लेकर सीट बढ़ोतरी तक संग्राम तेज: विपक्ष की कल अहम बैठक, सरकार को घेरने की पूरी तैयारी

महिला आरक्षण, परिसीमन और लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। केंद्र सरकार जहां इन मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं विपक्ष इसे बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक सवाल बना रहा है। इसी कड़ी में 15 अप्रैल को विपक्षी दलों की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। इसका सीधा असर आने वाले संसद सत्र और चुनावी माहौल दोनों पर पड़ सकता है।

खरगे के घर रणनीति बैठक: विपक्ष एकजुट होने की कोशिश में

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बुधवार दोपहर 3 बजे इंडिया ब्लॉक के नेताओं की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में महिला आरक्षण, परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी।

साथ ही, 16 से 18 अप्रैल के बीच प्रस्तावित संसद सत्र को लेकर भी विपक्ष अपनी रणनीति तय करेगा। कोशिश यह है कि सरकार के सामने एक संयुक्त रुख पेश किया जाए, ताकि इन संवेदनशील मुद्दों पर दबाव बनाया जा सके।

सरकार की टाइमिंग पर सवाल, ‘जल्दबाजी’ का आरोप

विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप यह है कि सरकार ने बिल का मसौदा काफी देर से साझा किया है। उनका कहना है कि सांसदों को पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा, जिससे गंभीर चर्चा प्रभावित होगी।

विपक्षी दलों का मानना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करता है। साथ ही, यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि महिला आरक्षण जैसे मुद्दे को चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, खासकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को ध्यान में रखते हुए।

सीट बढ़ोतरी के फॉर्मूले पर विवाद गहराया

परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि सरकार का ‘समानुपातिक बढ़ोतरी’ का फॉर्मूला राज्यों के बीच असंतुलन बढ़ा सकता है।

उदाहरण के तौर पर, अभी तेलंगाना और मध्य प्रदेश की सीटों में 12 का अंतर है, जो नए फॉर्मूले के बाद 18 तक पहुंच सकता है। इसी तरह तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के बीच का अंतर भी और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विपक्ष का तर्क है कि इससे क्षेत्रीय असमानता और राजनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है।

OBC महिलाओं और जनगणना पर नया विवाद

विपक्ष ने यह मुद्दा भी उठाया है कि सरकार ओबीसी महिलाओं के प्रतिनिधित्व को नजरअंदाज कर रही है। उनका सवाल है कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन क्यों किया जा रहा है, जबकि नई जातिगत जनगणना कराकर ताजा आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण कानून 2023 में पास हो चुका है और इसे 2024 से लागू किया जा सकता था। लेकिन सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़कर देरी की। अब अचानक तेजी दिखाने के पीछे क्या वजह है, इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

लोकसभा का गणित और राजनीतिक संदेश

संविधान संशोधन के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है, जो मौजूदा स्थिति में आसान नहीं दिखता। ऐसे में सरकार को विपक्ष में संभावित टूट की उम्मीद है।

इसी बीच, राहुल गांधी द्वारा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधने से विपक्षी एकता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि टीएमसी इस बैठक में शामिल होती है या दूरी बनाए रखती है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर देश की राजनीति, क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व पर भी पड़ेगा। फिलहाल, सबकी नजरें विपक्ष की इस बैठक और उसके बाद बनने वाली रणनीति पर टिकी हैं।