तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय का धमाका, लेकिन बहुमत की दहलीज पर क्यों अटकी सांसें? जानें अब कैसे और किसकी मदद से बनेगी सरकार!

तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय का धमाका, लेकिन बहुमत की दहलीज पर क्यों अटकी सांसें? जानें अब कैसे और किसकी मदद से बनेगी सरकार!

भारतीय राजनीति के लिए यह दौर बड़े बदलावों का गवाह बन रहा है। एक तरफ जहां पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत के साथ ऐतिहासिक ‘किला फतह’ कर लिया है, वहीं दक्षिण भारत के राज्य तमिलनाडु में द्रविड़ राजनीति की पुरानी दीवारों को ढहाते हुए अभिनेता से नेता बने विजय ने अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) के जरिए सनसनी फैला दी है। विजय की पार्टी 108 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन राजनीति का ‘नंबर गेम’ कुछ ऐसा फंसा है कि बंपर जीत के बावजूद बहुमत का आंकड़ा अभी भी दूर नजर आ रहा है।

एक आम नागरिक के तौर पर जब हम इसे देखते हैं, तो सवाल उठता है कि क्या राज्य में एक स्थिर सरकार बन पाएगी या फिर जोड़-तोड़ की सियासत विकास के पहिये को रोक देगी? तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में किसी भी दल को जादुई आंकड़ा यानी 118 सीटें चाहिए होती हैं। फिलहाल विजय के पास 108 सीटें हैं, लेकिन असल गणित इससे भी कहीं ज्यादा पेचीदा है।

सीटों का गणित: 108 की जीत, लेकिन हाथ में सिर्फ 107!

विजय की पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि उनके पास फिलहाल प्रभावी रूप से केवल 107 सीटें ही मानी जाएंगी। दरअसल, विजय ने खुद दो अलग-अलग सीटों—पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट—से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत हासिल की। चुनाव आयोग के नियमानुसार, उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। इसके अलावा, संसदीय परंपरा के मुताबिक एक विधायक को विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) का पद संभालना होगा। आम तौर पर स्पीकर वोटिंग की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेता है, जब तक कि मुकाबला टाई न हो जाए।

इस लिहाज से देखा जाए तो सदन में TVK की ताकत घटकर 106 के आसपास रह जाएगी। अब सवाल यह है कि बहुमत के लिए जरूरी 118 के आंकड़े तक पहुंचने के लिए विजय 11 से 12 विधायकों का समर्थन कहां से लाएंगे? क्या वे विपक्षी खेमों में सेंध लगाएंगे या फिर किसी पुराने गठबंधन को तोड़ने की कोशिश होगी?

पिता की कांग्रेस से अपील: क्या ‘हाथ’ थामेंगे विजय?

तमिलनाडु की इस त्रिशंकु विधानसभा के बीच एक नया राजनीतिक मोड़ तब आया, जब विजय के पिता और मशहूर फिल्म निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस पार्टी से गठबंधन की खुली अपील कर दी। चंद्रशेखर का कहना है कि कांग्रेस एक गौरवशाली इतिहास वाली पार्टी है, जो सत्ता से दूर रहने के कारण कमजोर पड़ रही है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर कांग्रेस विजय का साथ देती है, तो उसे नई ताकत मिल सकती है।

वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो डीएमके (DMK) के पास 59 सीटें हैं और उसके गठबंधन में कांग्रेस की 5 सीटें बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा विपक्षी खेमे में एआईएडीएमके (AIADMK) के पास 47 सीटें हैं। विजय के लिए राह आसान नहीं है, क्योंकि उन्हें अन्य छोटे दलों जैसे पीएमके (PMK), मुस्लिम लीग या निर्दलीयों का भरोसा जीतना होगा। यदि वे कांग्रेस को अपने पाले में करने में सफल रहते हैं, तब भी उन्हें कुछ और निर्दलीयों या छोटे दलों की जरूरत पड़ेगी।

राज्यपाल की दहलीज पर दावा और सुरक्षा का घेरा

राजनीतिक अनिश्चितता के बीच विजय ने सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को पत्र लिखकर सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश कर दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विजय ने अपनी पार्टी का बहुमत साबित करने के लिए राजभवन से 15 दिन यानी 2 हफ्तों का समय मांगा है। यह 15 दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरे होने वाले हैं, क्योंकि इसी दौरान पर्दे के पीछे गठबंधन की असली स्क्रिप्ट लिखी जाएगी।

इधर, सत्ता की इस गहमागहमी के बीच सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हैं। चेन्नई के नीलंकरई इलाके में स्थित विजय के आवास पर सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं और हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखी जा रही है। तमिलनाडु के आम लोगों के लिए अगले दो हफ्ते यह तय करेंगे कि राज्य में ‘द्रविड़ियन मॉडल’ का अंत होकर एक नए युग की शुरुआत होगी या फिर गठबंधन की मजबूरियां सरकार को अस्थिर रखेंगी।