भोपाल की पूर्व मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने है। इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी निराशा और दुख व्यक्त किया है। अदालत ने उन सोशल मीडिया और सार्वजनिक अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें यह कहा जा रहा था कि न्यायपालिका आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है। प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि आम जनता को देश की सबसे प्रमुख जांच एजेंसी (सीबीआई) पर भरोसा रखना चाहिए। सही समय आने पर सच सबके सामने जरूर आएगा।
छह महीने के भीतर खत्म हो गई एक हंसती-खेलती जिंदगी
अगर हम समय सीमा और इस पूरे घटनाक्रम के सामाजिक पहलू को देखें, तो यह मामला बेहद संवेदनशील हो जाता है। दर्ज विवरण के अनुसार, त्विषा शर्मा का विवाह 9 दिसंबर, 2025 को समर्थ सिंह के साथ हुआ था। लेकिन शादी के बाद का सफर लंबा नहीं चल सका। मृतका के परिवार का आरोप है कि विवाह के तुरंत बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज की मांग की जाने लगी थी। इस मांग को पूरा न करने पर त्विषा को गंभीर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। महज छह महीने के भीतर, 12 मई, 2026 की रात लगभग 10:20 बजे भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में त्विषा का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस दर्द को बयां करते हुए कहा कि माता-पिता के लिए एक मृत बेटी होने से बेहतर है कि उनकी बेटी तलाकशुदा हो। उनके संदेशों से पता चलता है कि वह नरक में जी रही थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आई गंभीर चोटों की हकीकत
इस कानूनी मामले में मेडिकल और फॉरेंसिक सबूत सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। शुरुआती पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि त्विषा की मौत ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ यानी जीवित रहते हुए फांसी लगाने के कारण हुई थी। हालांकि, शव के अन्य हिस्सों पर मिले चोट के निशान किसी भारी वस्तु के प्रहार या शारीरिक हमले की ओर इशारा करते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने ‘दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम’ की धारा 6 के तहत अपनी सहमति दी। इसके बाद 25 मई, 2026 को केंद्र सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने अधिसूचना जारी कर सीबीआई को पूरे राज्य में जांच का अधिकार सौंप दिया। अब सीबीआई इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 3(5) और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 व 4 के तहत जांच कर रही है।
मीडिया ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की बेहद सख्त टिप्पणी
एक जिम्मेदार संस्थान के रूप में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चल रहे मीडिया ट्रायल और मनगढ़ंत कहानियों पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने मीडिया और आम जनता से अनुरोध किया है कि वे गवाहों या संभावित आरोपियों के बयान खुद रिकॉर्ड करने से बचें, क्योंकि इससे मुख्य जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है। आरोपी पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने भी अखबारों में छप रहे बयानों पर चिंता जताई। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत किसी भी तरह की गढ़ी जा रही मनगढ़ंत कहानियों के खिलाफ है। अदालत ने पीड़ित परिवार से भी कहा है कि वे सार्वजनिक बयानों के बजाय सीधे जांच एजेंसी के सामने अपना पक्ष रखें, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे और दर्द को सिर्फ साउंड बाइट्स तक सीमित न किया जाए।
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई के हाथों में केस की कमान
इस हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपियों के रूप में त्विषा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह (जो पूर्व जिला जज हैं) का नाम शामिल है। जहां पीड़ित पक्ष इसे सीधे तौर पर दहेज उत्पीड़न और खुदकुशी के लिए उकसाने का मामला मान रहा है, वहीं ससुराल पक्ष ने दावा किया है कि मृतका को नशे की लत थी। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर एम्स के डॉक्टरों की टीम ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम भी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि उसने अभी तक इन आरोपों की वैधता पर कोई अंतिम राय नहीं दी है। पूरी निष्पक्षता के साथ हर कानूनी पहलू की जांच करना अब सिर्फ और सिर्फ सीबीआई का काम है।


