महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बार फिर बड़े राजनीतिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट की अटकलों के बीच भाजपा विधायक आशीषराव देशमुख के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। देशमुख ने दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत पर्दे के पीछे उद्धव ठाकरे की पार्टी और शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को कांग्रेस में विलय कराने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसे समय में यह बयान सामने आया है जब उद्धव गुट के कुछ सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चाएं भी जोर पकड़ रही हैं। ऐसे में महाराष्ट्र की राजनीति में अगले कुछ महीनों में बड़े बदलाव की संभावना को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं।
BJP विधायक का दावा, राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
भाजपा विधायक आशीषराव देशमुख ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में दावा किया कि संजय राउत एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, योजना यह है कि शिवसेना (यूबीटी) और शरद पवार की पार्टी का कांग्रेस में विलय कराया जाए।
देशमुख ने आगे दावा किया कि इस कथित राजनीतिक फॉर्मूले के तहत शरद पवार को राज्यसभा में विपक्ष का नेता बनाने और उद्धव ठाकरे को महाराष्ट्र कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने की चर्चा चल रही है।
हालांकि, इन दावों को लेकर न तो शिवसेना (यूबीटी), न कांग्रेस और न ही एनसीपी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए फिलहाल इन्हें राजनीतिक आरोप और दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
सांसदों की नाराजगी और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा
इधर, शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के संभावित विद्रोह की खबरों ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ सांसदों की गैरहाजिरी और दिल्ली में हुई बैठकों को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
स्थिति तब और चर्चा में आ गई जब शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री प्रताप सरनाइक ने संकेत दिया कि यदि कोई सांसद या विधायक एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए पार्टी में शामिल होना चाहता है, तो उसके लिए दरवाजे खुले हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा और तेज हो गई।
संजय राउत का पलटवार, लगाए खरीद-फरोख्त के आरोप
इन अटकलों के बीच संजय राउत ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि सांसदों की खरीद-फरोख्त के लिए कथित तौर पर करोड़ों रुपये की अग्रिम राशि दी जा रही है।
राउत ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए इसे शर्मनाक करार दिया। हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।
इससे पहले भी राउत लगातार दावा करते रहे हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद उद्धव ठाकरे के साथ मजबूती से खड़े हैं और पार्टी में किसी तरह की टूट की संभावना नहीं है।
बैठकों और मुलाकातों ने बढ़ाए सवाल
राजनीतिक चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख ने उद्धव ठाकरे की महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा नहीं लिया। बाद में उनकी केंद्रीय मंत्री और शिवसेना नेता प्रतापराव जाधव से मुलाकात की खबर सामने आई।
इसके अलावा, उद्धव गुट के नौ सांसदों में से केवल चार सांसदों का व्यक्तिगत रूप से बैठक में शामिल होना भी चर्चा का विषय बना। हालांकि पार्टी का कहना है कि बाकी सांसद डिजिटल माध्यम से बैठक में जुड़े थे।
आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र की राजनीति फिलहाल संभावनाओं और अटकलों के दौर से गुजर रही है। एक तरफ उद्धव ठाकरे खेमे में टूट की चर्चाएं हैं, तो दूसरी ओर भाजपा नेताओं के बड़े दावे राजनीतिक तापमान बढ़ा रहे हैं।
हालांकि जब तक संबंधित दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, तब तक कांग्रेस में विलय या बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की चर्चाओं को केवल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाएगा। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।



