यूपी में IAS-IPS अधिकारियों को सांसद-विधायकों को फुल प्रोटोकॉल देने के सख्त निर्देश

यूपी में IAS-IPS अधिकारियों को सांसद-विधायकों को फुल प्रोटोकॉल देने के सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में अब सांसदों और विधायकों के साथ अधिकारियों का व्यवहार बदलने वाला है। मुख्य सचिव की ओर से जारी नए शासनादेश में साफ निर्देश दिए गए हैं कि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी जनप्रतिनिधियों का पूरा सम्मान करें। यह कदम फरवरी के बजट सत्र में विपक्षी दल के नेता माता प्रसाद पांडेय द्वारा अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए गए सवालों के बाद उठाया गया है।

आम नागरिकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनप्रतिनिधि उनके मुद्दों को अधिकारियों तक पहुंचाते हैं। अगर अधिकारी और जनप्रतिनिधि के बीच बेहतर समन्वय बना तो विकास कार्यों और शिकायतों के निस्तारण में तेजी आ सकती है।

क्या हैं नए प्रोटोकॉल के नियम

नए निर्देश के अनुसार, जब कोई सांसद या विधायक जनहित के काम से अधिकारियों से मिलने आए तो अधिकारी और कर्मचारी उन्हें खड़े होकर स्वागत करेंगे। पूरे सम्मान के साथ पानी पीने का आग्रह करेंगे और मुलाकात के बाद सम्मानपूर्वक विदा करेंगे।

सभी अधिकारियों को सांसदों और विधायकों के CUG व अन्य मोबाइल नंबर अपने फोन में सेव करने होंगे। उनकी कॉल हर हाल में उठानी होगी। अगर कॉल न उठे तो तुरंत मैसेज करना या कॉल बैक करना अनिवार्य होगा। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए किसी भी मुद्दे को ध्यान से सुनना और उसका समाधान करना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी।

बार-बार शिकायतों के बाद जारी हुए निर्देश

सरकार का कहना है कि पिछले 15 बार दिए गए निर्देशों के बावजूद अधिकारियों के रवैये में सुधार नहीं आया, इसलिए यह नया शासनादेश जारी किया गया है। इसमें साफ चेतावनी दी गई है कि जनप्रतिनिधियों के प्रति प्रोटोकॉल और शिष्टाचार में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इससे पहले मार्च में मंत्री असीम अरुण ने कन्नौज के डीएम पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि डीएम के कारण उन्हें 45 मिनट इंतजार करना पड़ा, जबकि SDM और ADM भी देर से पहुंचे। नाराज होकर मंत्री कार्यक्रम छोड़कर चले गए थे।

बजट सत्र में माता प्रसाद पांडेय ने भी सदन में कहा था कि एसपी तो फोन उठा लेते हैं, लेकिन थानेदार फोन नहीं उठाते। उन्होंने दलाली और लापरवाही का आरोप लगाया था। उस समय विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी प्रोटोकॉल का ध्यान रखने का निर्देश दिया था।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस निर्देश पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने विधायकों और सांसदों का सम्मान भी आदेश देकर मांग रही है। इज्जत फरमान से नहीं, बल्कि अच्छे काम से मिलती है।

यह पूरा मामला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी को उजागर करता है। नए निर्देश से उम्मीद है कि अधिकारी अधिक जवाबदेह बनेंगे और जनसमस्याओं का तेजी से समाधान होगा।

उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कुशल प्रशासन और राजनीतिक समन्वय दोनों ही विकास के लिए जरूरी हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि ये निर्देश कितनी प्रभावी साबित होते हैं और मैदान पर कितना बदलाव आता है।