वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट पर 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही सुभासपा ने मोर्चा खोल दिया है। सुभासपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रूद्र राजन राजभर और जिलाध्यक्ष उमेश राजभर के नेतृत्व में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे और एक सक्रिय कार्यकर्ता अक्षय राजभर के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने की मांग की।
यह घटनाक्रम स्थानीय राजनीति को गर्माने का संकेत दे रहा है। आम पाठक के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसे राजनीतिक टकराव क्षेत्र के विकास, कानून-व्यवस्था और स्थानीय मुद्दों पर सीधा असर डाल सकते हैं।
घमहापुर हत्याकांड पर विवादित पोस्ट का मामला
मामला घमहापुर में हुए मनीष सिंह हत्याकांड से जुड़ा है। सुभासपा कार्यकर्ता अक्षय राजभर ने इस घटना पर सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट किया था, जिसके चलते फूलपुर थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह मुकदमा बीजेपी के पिंडरा विधायक अवधेश सिंह के दबाव में दर्ज कराया गया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर मुकदमा वापस लेने की मांग की। सुभासपा नेताओं ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर अवधेश सिंह को पिंडरा से चुनाव नहीं जीतने देंगे।
सुभासपा कार्यकर्ताओं के नारे और आरोप
सुभासपा कार्यकर्ताओं ने पिंडरा विधानसभा क्षेत्र में नारा लगाया — “मोदी-योगी से बैर नहीं, अवधेश सिंह तुम्हारी खैर नहीं।”
जिलाध्यक्ष उमेश राजभर ने दावा किया कि पिछले डेढ़ साल से राजभर समुदाय के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है। छितौना से लेकर सिंधोरा तक की घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है।
2027 की तैयारी शुरू
सुभासपा का यह आक्रामक रुख 2027 के चुनाव को लेकर उनकी रणनीति का हिस्सा नजर आता है। पार्टी बीजेपी विधायक अवधेश सिंह को मुख्य लक्ष्य बनाकर मोर्चा खोल चुकी है। कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के दबाव में निर्दोष कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
यह पूरा विवाद वाराणसी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जातीय और राजनीतिक समीकरणों को फिर से उभार रहा है। आम नागरिक देखना चाहते हैं कि स्थानीय प्रशासन इन आरोपों पर कितनी निष्पक्षता से काम करता है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में कितना सक्षम साबित होता है।
अभी से शुरू हुई यह राजनीतिक गतिविधि आने वाले समय में और तेज हो सकती है। पिंडरा सीट पर सुभासपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर की आहट साफ सुनाई दे रही है। स्थानीय लोगों की चिंता यह है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का असर उनके रोजमर्रा के जीवन और क्षेत्र की शांति पर न पड़े।


