यूपी के सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका! बच्चे अब खुद बनाएंगे सोलर कार, टेलीस्कोप और मोबाइल प्रोजेक्टर, 83 स्कूलों से शुरुआत

यूपी के सरकारी स्कूलों में बदलेगा पढ़ाई का तरीका! बच्चे अब खुद बनाएंगे सोलर कार, टेलीस्कोप और मोबाइल प्रोजेक्टर, 83 स्कूलों से शुरुआत

उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब विज्ञान की पढ़ाई सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी। बच्चे कक्षा में विज्ञान के सिद्धांत रटने के बजाय खुद सोलर कार बनाएंगे, टेलीस्कोप तैयार करेंगे और मोबाइल प्रोजेक्टर के जरिए तकनीक को समझेंगे। प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को प्रयोगों और गतिविधियों से जोड़ने के लिए ‘लर्निंग बाय डूइंग’ योजना शुरू की है। इसके तहत विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित की शिक्षा व्यावहारिक तरीके से दी जाएगी। योजना की शुरुआत मुरादाबाद मंडल के 83 उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों से की गई है। खास बात यह है कि प्रत्येक चयनित स्कूल को गतिविधियों और जरूरी सामान की खरीद के लिए 40 हजार रुपये दिए गए हैं।

इस पहल का मकसद बच्चों को सिर्फ परीक्षा पास करने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उनमें चीजों को समझने, खुद प्रयोग करने और नए मॉडल तैयार करने की क्षमता विकसित करना है। इससे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी तकनीकी और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

83 सरकारी स्कूलों से शुरुआत, 33.20 लाख रुपये का बजट जारी

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शुरू की गई इस योजना के पहले चरण में मुरादाबाद मंडल के 83 स्कूलों को शामिल किया गया है। इनमें उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय शामिल हैं।

इन सभी स्कूलों को गतिविधियों के संचालन और जरूरी सामग्री खरीदने के लिए 40-40 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं। इस तरह मुरादाबाद मंडल के चयनित विद्यालयों के लिए कुल 33.20 लाख रुपये का बजट जारी किया गया है।

वहीं, समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के कुल 1,688 विद्यालयों में भी यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। यानी इस पहल का दायरा केवल एक मंडल तक सीमित नहीं है। सरकार का जोर स्कूलों में ऐसी पढ़ाई को बढ़ावा देने पर है, जिसमें बच्चे खुद भाग लेकर सीख सकें।

पांच जिलों के स्कूलों को मिला बजट, जानिए किसे कितनी रकम

मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों में योजना के लिए अलग-अलग बजट निर्धारित किया गया है। इसमें सबसे अधिक विद्यालय बिजनौर जिले के शामिल किए गए हैं।

जिलेवार आवंटन इस प्रकार है:

जिला चयनित स्कूल आवंटित बजट
बिजनौर 21 ₹8.40 लाख
मुरादाबाद 19 ₹7.60 लाख
रामपुर 14 ₹5.60 लाख
अमरोहा 14 ₹5.60 लाख
संभल 15 ₹6 लाख
कुल 83 ₹33.20 लाख

इस बजट से स्कूलों में प्रयोग और मॉडल तैयार करने के लिए जरूरी सामान खरीदा जाएगा। संबंधित विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित राशि का इस्तेमाल योजना के उद्देश्य के अनुसार करें और गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करें।

सोलर कार, टेलीस्कोप और प्रोजेक्टर बनाएंगे बच्चे

योजना के तहत विद्यार्थियों को नौ तरह की प्रमुख गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी है। इसमें विज्ञान और तकनीक से जुड़े कई ऐसे मॉडल शामिल हैं, जिन्हें बच्चे खुद तैयार कर सकेंगे।

विद्यार्थी सोलर कुकर, एलईडी टॉर्च, सोलर कार, टेलीस्कोप और मोबाइल प्रोजेक्टर बनाएंगे। इसके अलावा प्लास्टिक की बोतलों से उपयोगी खिलौने तैयार करने की गतिविधि भी होगी।

पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को समझने के लिए बच्चों को मिट्टी और पानी की गुणवत्ता जांचने का तरीका सिखाया जाएगा। वर्मी कंपोस्ट तैयार करना, प्राकृतिक रंग बनाना और औषधीय पौधों की वाटिका विकसित करना भी कार्यक्रम का हिस्सा है।

इन गतिविधियों से बच्चों को विज्ञान के सिद्धांतों को वास्तविक जीवन से जोड़कर समझने का मौका मिलेगा। मसलन, सोलर कार बनाते समय वे सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को समझ सकेंगे, जबकि मिट्टी और पानी की जांच के जरिए पर्यावरण से जुड़े विषयों को व्यावहारिक रूप से जान पाएंगे।

विज्ञान के साथ सिलाई, पेंटिंग और छोटे कारोबार का हुनर भी सीखेंगे

‘लर्निंग बाय डूइंग’ योजना का उद्देश्य केवल विज्ञान के मॉडल बनवाना नहीं है। इसके तहत बच्चों को रोजमर्रा के काम और हुनर से जुड़ी गतिविधियों में भी शामिल किया जाएगा।

विद्यार्थियों को फल और सब्जियों से अचार बनाने के साथ गुड़-मूंगफली की चिक्की तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा कढ़ाई-सिलाई, पेंटिंग, वाद्ययंत्र निर्माण और डीसी झालर बनाने जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।

इसका मकसद बच्चों में रचनात्मक सोच, तकनीकी समझ और अपने हाथों से काम करने का आत्मविश्वास बढ़ाना है। ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थी पढ़ाई के साथ अलग-अलग कौशल भी सीख सकेंगे, जो आगे चलकर उनके काम आ सकते हैं।

प्रधानाध्यापकों को जिम्मेदारी, पोर्टल पर देनी होगी रिपोर्ट

योजना को जमीन पर उतारने के लिए शिक्षा विभाग ने चयनित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्हें जरूरी सामग्री की खरीद समय से पूरी करनी होगी और स्कूलों में निर्धारित गतिविधियों का नियमित आयोजन कराना होगा।

इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय को कार्यक्रम की प्रगति और कराई गई गतिविधियों की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। इससे विभाग स्तर पर योजना की निगरानी की जा सकेगी और यह पता लगाया जा सकेगा कि स्कूलों में गतिविधियां किस तरह संचालित हो रही हैं।

रामपुर की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कल्पना देवी ने बताया कि योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक शिक्षा उपलब्ध कराना है। जिले के 14 विद्यालयों के लिए कुल 5.60 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। संबंधित प्रधानाध्यापकों को समय से सामग्री खरीदने और सभी गतिविधियां निर्धारित तरीके से कराने के निर्देश दिए गए हैं।

कुल मिलाकर, इस पहल के जरिए सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को अधिक व्यावहारिक और कौशल आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर गतिविधियों का नियमित संचालन और बजट का सही इस्तेमाल होता है, तो इससे बच्चों को विज्ञान समझने के साथ नई चीजें बनाने और सीखने का बेहतर अवसर मिल सकता है।