उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026 की मतगणना में सियासी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। 11 सीटों के लिए हुई वोटों की गिनती में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। बुधवार, 28 अक्टूबर को दोपहर तक आठ सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे। इनमें भाजपा ने पांच और सपा ने तीन सीटें जीती थीं। वहीं, तीन सीटों पर मतगणना जारी थी। सबसे ज्यादा नजरें लखनऊ और वाराणसी की स्नातक सीटों पर टिकी हैं, जहां सपा के उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं। दूसरी ओर, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के कारण मुकाबला अब भी निर्णायक दौर में है। इन नतीजों से प्रदेश की राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति और आगामी सियासी रणनीति को लेकर कई संकेत मिल सकते हैं।
लखनऊ में कांति सिंह की बढ़त 10 हजार के पार, भाजपा की बढ़ी चुनौती
लखनऊ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कांति सिंह ने भाजपा प्रत्याशी इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह के खिलाफ मजबूत बढ़त बना ली है। पांचवें चक्र की मतगणना के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कांति सिंह को 32,228 वोट मिले थे, जबकि अवनीश कुमार सिंह के खाते में 21,843 वोट आए थे। इस तरह सपा प्रत्याशी 10,385 मतों से आगे चल रही थीं।
मतगणना के शुरुआती चरणों से ही कांति सिंह ने बढ़त बनाए रखी। तीसरे चक्र तक उन्हें 19,112 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी को 13,381 मत प्राप्त हुए थे। उस समय दोनों के बीच 5,731 वोटों का अंतर था। चौथे चक्र में यह बढ़त बढ़कर 7,585 मत हो गई और पांचवें चक्र तक अंतर 10 हजार के पार पहुंच गया।
लखनऊ की इस सीट पर मुकाबला इसलिए भी अहम है, क्योंकि यहां स्नातक मतदाताओं के बीच दोनों दलों की स्थिति का आकलन किया जा रहा है। हालांकि, मतगणना के दौरान बढ़त मिलना अंतिम जीत की गारंटी नहीं है। अंतिम परिणाम घोषित होने तक वोटों की गिनती पर नजर बनाए रखना जरूरी है।
वाराणसी में भाजपा को झटका, स्नातक सीट पर भी सपा आगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भाजपा के लिए एमएलसी चुनाव के नतीजे चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं। यहां शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की है। भाजपा के प्रमोद मिश्रा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा।
वहीं, वाराणसी की स्नातक सीट पर भी सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने बढ़त बनाई हुई थी। दूसरे चक्र की मतगणना के बाद आशुतोष सिन्हा को कुल 10,419 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 7,474 मत प्राप्त हुए। दोनों के बीच 2,945 वोटों का अंतर था।
पहले चक्र में आशुतोष सिन्हा को 5,184 और केदारनाथ सिंह को 3,734 वोट मिले थे। दूसरे चक्र में भी सपा प्रत्याशी अपनी बढ़त कायम रखने में सफल रहे।
वाराणसी में शिक्षक सीट पर जीत और स्नातक सीट पर बढ़त सपा के लिए अहम मानी जा रही है। हालांकि, इन नतीजों के आधार पर पूरे प्रदेश में किसी एक दल की राजनीतिक स्थिति का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे वहां के मतदाताओं की पसंद और स्थानीय समीकरणों को भी दर्शाते हैं।
गोरखपुर शिक्षक सीट पर पेच, दूसरी वरीयता के वोट तय करेंगे फैसला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र गोरखपुर में शिक्षक एमएलसी सीट पर मुकाबला मतगणना के अंतिम चरण में पहुंच गया है। यहां भाजपा प्रत्याशी ध्रुव त्रिपाठी और निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के दौरान उपलब्ध आंकड़ों में ध्रुव त्रिपाठी को 13,030 वोट और राजीव यादव को 12,129 वोट मिले थे। इस तरह भाजपा प्रत्याशी 901 मतों से आगे चल रहे थे।
इस सीट पर विवाद भी सामने आया। सपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने मतगणना में गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए प्रक्रिया का बहिष्कार किया। सपा के कार्यकारी जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम ने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान हर राउंड का चार्ट उपलब्ध नहीं कराया गया। उनके मुताबिक, चौथे राउंड में वोटों की गिनती को लेकर भी सवाल उठे।
निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव ने भी आरोप लगाया कि उनके वोटों की गणना में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने दावा किया कि जहां मतपत्र पर एक लिखा था, उसे चार के रूप में दर्ज किया गया। ये आरोप उम्मीदवारों की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आधी रात के घटनाक्रम के बाद सपा और निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से मतगणना के बहिष्कार की खबर आई। बुधवार सुबह गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित मतगणना केंद्र पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती के बीच मतगणना जारी रखी।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में दूसरी वरीयता के मतों की अहमियत इसलिए बढ़ जाती है, क्योंकि अंतिम परिणाम तय करने के लिए मतों के हस्तांतरण और निर्धारित कोटे की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। ऐसे में शुरुआती बढ़त के बावजूद अंतिम फैसला आधिकारिक घोषणा के बाद ही माना जाएगा।
आठ सीटों के नतीजे सामने आए, भाजपा और सपा के बीच मुकाबला जारी
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। 28 अक्टूबर को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आठ सीटों के नतीजे सामने आ चुके थे, जबकि तीन सीटों पर मतगणना जारी थी। चुनाव आयोग ने दोपहर तक छह सीटों के परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए थे।
घोषित परिणामों में मेरठ स्नातक सीट से भाजपा के दिनेश कुमार गोयल, लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी, मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा और बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से हरि सिंह ढिल्लो ने जीत दर्ज की। वहीं, वाराणसी शिक्षक सीट से सपा के लाल बिहारी यादव और आगरा शिक्षक सीट से सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी घोषित किए गए।
अन्य सीटों पर भी दोनों दलों के बीच मुकाबला देखने को मिला। आगरा स्नातक सीट पर भाजपा के मानवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत हासिल की, जबकि इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार राठौर को हराया।
आगरा शिक्षक सीट पर डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत से पहले उनके साथ कथित मारपीट को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना की आलोचना करते हुए अग्रहरि और अग्रवाल समाज के समर्थन को लेकर बयान दिया। हालांकि, इस घटना से जुड़े आरोपों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को चुनावी परिणामों से अलग रखकर देखना जरूरी है।
कुल मिलाकर, यूपी एमएलसी चुनाव के नतीजे भाजपा और सपा के बीच कड़े मुकाबले की तस्वीर पेश कर रहे हैं। भाजपा ने अब तक अधिक सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि लखनऊ और वाराणसी की स्नातक सीटों पर सपा की बढ़त ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया। गोरखपुर में दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती और शेष सीटों के अंतिम नतीजे इस चुनाव की तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।



