उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। वाराणसी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी (SP) ने यहां स्नातक और शिक्षक, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दर्ज कर ली है। स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 18,459 वोटों से हराया, जबकि शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव पहले ही जीत दर्ज कर चुके हैं। इन नतीजों के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए तंज कसा, ‘डबल इंजन, डबल जीरो।’ विधानसभा चुनाव से पहले आए इन परिणामों को उत्तर प्रदेश की राजनीति में अहम घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
वाराणसी स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बड़ी जीत
वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतगणना में समाजवादी पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया। मतगणना के 23वें दौर के बाद उन्हें 53,573 वोट मिले, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 35,114 वोट हासिल हुए। इस तरह आशुतोष सिन्हा ने 18,459 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।
इस जीत के साथ आशुतोष सिन्हा दूसरी बार विधान परिषद सदस्य यानी MLC निर्वाचित हुए हैं। परिणाम सामने आने के बाद उन्होंने कहा, ‘अभी तो यह झांकी है, पूरा उत्तर प्रदेश बाकी है।’ उनके इस बयान को आने वाले विधानसभा चुनावों के संदर्भ में सपा के राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
वाराणसी में स्नातक सीट का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव जीत चुके थे। दोनों सीटों पर सपा की जीत ने इस क्षेत्र में बीजेपी की स्थिति को चुनौती दी है।
दोनों सीटों पर सपा की जीत के बाद अखिलेश यादव का तंज
वाराणसी की दोनों सीटें समाजवादी पार्टी के खाते में जाने के बाद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, ‘डबल इंजन का डबल जीरो!’
बीजेपी अक्सर केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी की सरकार होने को ‘डबल इंजन सरकार’ कहती है। अखिलेश यादव ने इसी राजनीतिक नारे को पलटकर चुनावी नतीजों पर तंज कसा।
हालांकि, वाराणसी की दोनों सीटों पर हार को पूरे प्रदेश में बीजेपी की स्थिति का अंतिम आकलन नहीं माना जा सकता। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह परिणाम पार्टी के लिए झटका जरूर है। खासकर तब, जब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपने संगठन और जनसमर्थन को मजबूत करने में जुटे हैं।
यूपी MLC चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के इन नतीजों में बीजेपी ने अपनी छह सीटें बरकरार रखीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत हासिल की। पिछले चुनाव की तुलना में सपा की सीटों की संख्या में दो का इजाफा हुआ है।
बीजेपी ने मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ, आगरा और गोरखपुर-फैजाबाद की सीटों पर अपना कब्जा बनाए रखा। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर पार्टी को बेहद करीबी मुकाबले में जीत मिली। यहां बीजेपी ने महज 307 वोटों के अंतर से बाजी मारी।
दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी ने वाराणसी की स्नातक और शिक्षक सीटों के अलावा आगरा शिक्षक सीट, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट और लखनऊ स्नातक सीट पर जीत दर्ज की। इन परिणामों से साफ है कि चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला कई सीटों पर कड़ा रहा।
अखिलेश यादव ने इन नतीजों को बीजेपी के लिए बड़ा झटका बताते हुए दावा किया कि MLC चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा है। हालांकि, बीजेपी छह सीटें बचाने में सफल रही, इसलिए पूरे चुनाव को उसके लिए पूरी तरह विफल कहना उपलब्ध आंकड़ों से मेल नहीं खाता।
विधानसभा चुनाव से पहले क्यों अहम हैं ये नतीजे?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में विधान परिषद चुनाव के परिणाम राजनीतिक दलों के लिए अपने संगठन, रणनीति और क्षेत्रीय पकड़ का आकलन करने का मौका देते हैं। वाराणसी में दोनों सीटें जीतकर सपा ने अपने कार्यकर्ताओं को मजबूत राजनीतिक संदेश दिया है।
हालांकि, विधान परिषद चुनाव और विधानसभा चुनाव का मतदाता वर्ग तथा चुनावी समीकरण अलग हो सकते हैं। इसलिए इन नतीजों को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना जल्दबाजी होगी। फिर भी, वाराणसी में बीजेपी की हार और सपा की जीत ने राज्य की सियासत में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है।
अब देखना होगा कि बीजेपी इस नतीजे के बाद अपनी रणनीति में क्या बदलाव करती है और समाजवादी पार्टी इस बढ़त को आने वाले विधानसभा चुनाव में किस तरह भुनाने की कोशिश करती है। फिलहाल, वाराणसी की दोनों सीटों पर जीत सपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है, जबकि बीजेपी के सामने अपने प्रदर्शन की समीक्षा करने की चुनौती है।
