उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने महज दो दिनों के भीतर एसडीएम स्तर के 363 पीसीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। रविवार रात 182 और सोमवार को 181 अधिकारियों की नई तैनाती के आदेश जारी किए गए। इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। माना जा रहा है कि यह बदलाव केवल नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आगामी चुनावी तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है।
दो दिनों में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, क्यों लिए गए तबादले के फैसले?
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जिन पीसीएस अधिकारियों ने एक ही जिले में तीन वर्ष या एक ही मंडल में सात वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी, उन्हें नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण की यह प्रक्रिया समय-समय पर अपनाई जाती है।
इस बार यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे गति पकड़ रही हैं। चुनाव आयोग भी चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों को हटाने के निर्देश देता है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार ने पहले से ही इस प्रक्रिया को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कई जिलों के एसडीएम बदले, बड़े पैमाने पर नई तैनातियां
तबादला सूची में प्रदेश के कई जिलों के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। शैलेंद्र गौतम को महाराजगंज से सीतापुर, अतुल कुमार सिंह को फर्रुखाबाद से बलरामपुर और निशांत उपाध्याय को बलिया से श्रावस्ती भेजा गया है। वहीं मल्लिका नैन को बरेली से स्थानांतरित कर उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड न्यायाधिकरण, लखनऊ में रजिस्ट्रार बनाया गया है।
इसके अलावा यदुवीर सिंह को झांसी से लखीमपुर खीरी और संतदास पवार को मुरादाबाद से लखीमपुर खीरी का एसडीएम बनाया गया है। तृप्ति गुप्ता को बरेली से अंबेडकरनगर, गरिमा सौनकिया को औरैया से सुल्तानपुर तथा अभिषेक प्रियदर्शी को बलिया से सीतापुर भेजा गया है।
रेणू मिश्रा को लखीमपुर खीरी से सिद्धार्थनगर, प्रदीप कुमार विमल को कासगंज से लखनऊ तथा श्रेया को अयोध्या से श्रावस्ती में नई जिम्मेदारी मिली है। इसी तरह लोकेश कुमार, विनीत कुमार, सुधीर कुमार, रिपुदमन सिंह, प्रीती सिंह, संजय यादव और बृजेश कुमार वर्मा द्वितीय समेत कई अधिकारियों के कार्यक्षेत्र भी बदले गए हैं।
सरकार ने सुरभि शर्मा को बागपत, प्रतिभा मिश्रा को कानपुर देहात, शुभम यादव को बुलंदशहर, गोपाल शर्मा को बरेली और लवलीत कौर को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में ओएसडी के रूप में नियुक्त किया है। इसके अलावा मिथलेश कुमार तिवारी, देवेंद्र प्रताप सिंह, अजेंद्र सिंह और प्रज्ञा पाण्डेय सहित कई अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
चुनावी तैयारियों से क्यों जोड़ा जा रहा है यह फैसला?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले प्रशासनिक मशीनरी को व्यवस्थित करना किसी भी सरकार की प्राथमिकता होती है। लंबे समय तक एक ही जिले या मंडल में कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण से प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने में मदद मिलती है। यही कारण है कि चुनाव आयोग भी ऐसी व्यवस्था पर विशेष जोर देता है।
हालांकि सरकार की ओर से इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है, लेकिन विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में इस कदम को विशेष महत्व दिया जा रहा है। आने वाले महीनों में चुनावी गतिविधियां बढ़ने के साथ प्रशासनिक व्यवस्था की भूमिका भी अहम होगी। ऐसे में नई तैनातियों के जरिए सरकार ने चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
यह व्यापक तबादला अभियान बताता है कि प्रदेश में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में किस तरह काम करते हैं और आगामी चुनावी माहौल में प्रशासनिक व्यवस्था को कितना प्रभावी बनाए रखते हैं।


