बिजली फॉल्ट ठीक करने में लापरवाही पड़ेगी भारी, यूपीपीसीएल चेयरमैन की चेतावनी; दोषी अफसरों पर होगी कार्रवाई

बिजली फॉल्ट ठीक करने में लापरवाही पड़ेगी भारी, यूपीपीसीएल चेयरमैन की चेतावनी; दोषी अफसरों पर होगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। आंधी-तूफान और खराब मौसम के बाद बिजली फॉल्ट ठीक करने में देरी पर अब अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने साफ चेतावनी दी है कि जहां भी बिजली आपूर्ति बहाल करने में लापरवाही सामने आएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता जांच को लेकर भी नया विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि एक प्रमुख लैब के पास स्मार्ट मीटर परीक्षण की मान्यता नहीं होने की बात सामने आई है।

आंधी-तूफान के बाद बिजली बहाली में देरी पर सख्ती

बिजली आपूर्ति की समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. आशीष गोयल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि फॉल्ट और तकनीकी खराबियों को कम से कम समय में दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में कई इलाकों में आंधी और तूफान की वजह से बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई थी। ऐसे क्षेत्रों में जहां मरम्मत और अनुरक्षण कार्यों में लापरवाही बरती गई है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

उन्होंने बताया कि सभी विद्युत वितरण क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में जरूरी सामग्री उपलब्ध है। इसके अलावा अधिशासी अभियंताओं को स्थानीय स्तर पर आवश्यक उपकरण और सामग्री खरीदने के लिए वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। ऐसे में किसी भी तरह की देरी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

बढ़ती बिजली मांग के बीच अधिकारियों को विशेष निर्देश

यूपीपीसीएल चेयरमैन ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सभी वितरण इकाइयों को पूरी तैयारी के साथ काम करना होगा ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपकेंद्र डैशबोर्ड का प्रभावी उपयोग किया जाए और अविकसित कॉलोनियों का सर्वे जल्द पूरा कराया जाए। इससे नए बिजली कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया आसान होगी।

साथ ही स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध बिल उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि मीटर रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह त्रुटिरहित और पारदर्शी होनी चाहिए।

कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी दिया विशेष जोर

बैठक में बिजली कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। डॉ. गोयल ने कहा कि अनुरक्षण और मरम्मत कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन होना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी कर्मचारी की दुर्घटना लापरवाही के कारण होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि बेहतर बिजली व्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा भी विभाग की प्राथमिकता है।

स्मार्ट मीटर जांच को लेकर नया विवाद

इधर स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता जांच को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) ने स्पष्ट किया है कि मध्यांचल हाईटेक लैब को स्मार्ट मीटरों के परीक्षण की मान्यता प्राप्त नहीं है।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता जांच के लिए इसी लैब का उपयोग किया जा रहा था। प्रदेश के कई हिस्सों में स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद सरकार ने पुराने मीटर बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगाकर गुणवत्ता जांच के आदेश दिए थे।

एनएबीएल की रिपोर्ट से बढ़े सवाल

एनएबीएल ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि मध्यांचल हाईटेक टेस्ट लैब के मान्यता प्राप्त कार्यक्षेत्र में भारतीय मानक IS-16444 (भाग-1 और भाग-2) के तहत स्मार्ट मीटर परीक्षण शामिल नहीं है। इसका मतलब है कि इस लैब की स्मार्ट मीटर जांच क्षमता को आधिकारिक रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।

उपभोक्ता परिषद की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। वहीं उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने भी इस संबंध में मध्यांचल डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक से जवाब मांगा है। खबर लिखे जाने तक आयोग को जवाब नहीं भेजा गया था।

बिजली आपूर्ति में सुधार और स्मार्ट मीटर परियोजना दोनों राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल हैं। ऐसे में एक तरफ फॉल्ट मरम्मत में जवाबदेही तय करने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर जांच व्यवस्था पर उठे सवाल आने वाले दिनों में नई बहस को जन्म दे सकते हैं।