United States और Iran के बीच इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। हालांकि दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि बातचीत आगे भी जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल गहरे मतभेद किसी ठोस नतीजे तक पहुंचने में बड़ी बाधा बने।
1. परमाणु कार्यक्रम पर सबसे बड़ा टकराव
सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर रहा। अमेरिका चाहता है कि ईरान सख्त प्रतिबंधों को माने और परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई कदम न उठाए। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता का मुद्दा मानते हुए ऐसे नियंत्रणों का विरोध कर रहा है।
2. प्रतिबंध और फंसे हुए पैसों पर मतभेद
ईरान ने बातचीत में अपनी विदेशों में फंसी संपत्तियों को रिलीज करने की मांग रखी, जिसमें कतर जैसे देशों में जमा फंड शामिल हैं। लेकिन अमेरिकी पक्ष ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया, जिससे आर्थिक मुद्दों पर बड़ी दूरी साफ दिखी।
3. होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
Strait of Hormuz को लेकर भी दोनों देशों के बीच टकराव सामने आया। ईरान इस क्षेत्र में ज्यादा नियंत्रण चाहता है, जबकि अमेरिका चाहता है कि यह रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए पूरी तरह खुला रहे। यह मार्ग दुनिया की करीब 20% ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
4. क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग प्राथमिकताएं
ईरान ने वार्ता का दायरा बढ़ाते हुए युद्ध मुआवजा और पूरे क्षेत्र में संघर्ष विराम की मांग रखी, जिसमें Lebanon भी शामिल है। वहीं अमेरिका मुख्य रूप से परमाणु नियंत्रण और समुद्री सुरक्षा पर ही केंद्रित रहा। इस वजह से दोनों पक्षों की प्राथमिकताएं मेल नहीं खा पाईं।
5. भरोसे की कमी और तनावपूर्ण माहौल
पूरी बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच अविश्वास साफ नजर आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में कई बार माहौल तनावपूर्ण हुआ और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कठोर रुख अपनाने के आरोप लगाए।
आगे क्या, उम्मीद अभी बाकी
हालांकि समझौता नहीं हो पाया, लेकिन ईरान ने साफ कहा है कि बातचीत जारी रहेगी। इससे संकेत मिलता है कि कूटनीति के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं होगा।


