Bengal BJP में ‘TMC कल्चर’ की एंट्री से टेंशन! 325 नेताओं-कार्यकर्ताओं पर एक्शन, वसूली के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

Bengal BJP में ‘TMC कल्चर’ की एंट्री से टेंशन! 325 नेताओं-कार्यकर्ताओं पर एक्शन, वसूली के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

पश्चिम बंगाल में सत्ता संभालने के करीब तीन महीने बाद बीजेपी के सामने एक ऐसी चुनौती खड़ी हो गई है, जिसे पार्टी कभी अपनी मुख्य राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी टीएमसी की कार्यशैली से जोड़ती रही थी। पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर वसूली, भ्रष्टाचार और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप सामने आने के बाद प्रदेश बीजेपी ने करीब 25 कार्यकर्ताओं को निलंबित किया है। वहीं, अलग-अलग स्तर पर 300 से ज्यादा लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। पार्टी के भीतर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि सत्ता में आने के बाद संगठन में अनुशासन और अपनी राजनीतिक पहचान को कैसे बरकरार रखा जाए।

बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में 293 में से 207 सीटें जीतकर टीएमसी को करारी शिकस्त दी थी। चुनाव के बाद प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने साफ कहा था कि टीएमसी नेताओं के लिए पार्टी के दरवाजे बंद रहेंगे। लेकिन अब पार्टी के भीतर ही कुछ ऐसे मामलों की शिकायतें पहुंच रही हैं, जिनमें कथित तौर पर टीएमसी से बीजेपी में आए कार्यकर्ताओं की भूमिका भी बताई जा रही है।

वसूली के आरोपों पर बीजेपी का सख्त एक्शन, 325 पर नजर

प्रदेश बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि वसूली की समस्या पार्टी के सामने है। उनका कहना है कि कुछ अपने नेता और कार्यकर्ता भी ऐसी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। दूसरी तरफ आरोप यह भी है कि टीएमसी से बीजेपी में आए कुछ कार्यकर्ता पुराने तरीके से ही काम कर रहे हैं।

इसी के बाद संगठन ने कार्रवाई शुरू की है। करीब 25 कार्यकर्ताओं को निलंबित किया गया है, जबकि 300 से अधिक कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। जिला स्तर के नेताओं को भी साफ निर्देश दिया गया है कि वे भ्रष्टाचार, वसूली और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखें और ऐसी शिकायतों को प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचाएं।

प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने भी कहा है कि पार्टी के नाम पर पैसा वसूलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई सिर्फ छोटे कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगी और भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाने पर विधायक या सांसद भी कार्रवाई से बाहर नहीं होंगे।

शिकायतों का दायरा बढ़ा, कई जिलों से सामने आए मामले

पार्टी को कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों के अलावा दक्षिण 24 परगना, हुगली, पश्चिम बर्दवान और बीरभूम जैसे जिलों से वसूली की शिकायतें मिली हैं। इनमें कुछ शिकायतें मौखिक हैं तो कुछ लिखित रूप में पार्टी नेतृत्व तक पहुंची हैं।

दक्षिण दमदम में पिछले महीने एक प्रमोटर के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया। आरोप है कि निर्माण परियोजना के लिए उससे 5 लाख रुपये की मांग की गई। प्रमोटर ने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग इस घटना में शामिल थे, जिन्होंने पहले टीएमसी का साथ दिया था और अब बीजेपी के साथ हैं। बीजेपी विधायक अरिजीत बक्शी ने प्रमोटर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को कहा और अस्पताल जाकर उससे मुलाकात भी की।

पश्चिम बर्दवान के जमुरिया में बीजेपी नेता राकेश माजी को रेत से लदे ट्रकों से कथित वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में भेजा। स्थानीय बीजेपी विधायक बिजन मुखर्जी ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

कोलकाता के बेहाला में एक बीजेपी नेता पर डेवलपर से पार्टी फंड के नाम पर पैसा मांगने का आरोप लगा। वहीं उत्तर 24 परगना के बदुरिया में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर विवाद हुआ, जिसमें कथित तौर पर दो स्थानीय बीजेपी नेता नकदी के बंडलों के सामने बैठे दिखाई दे रहे हैं। इस मामले में स्थानीय पुलिस की ओर से कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।

कटवा में भूमि एवं भूमि सुधार विभाग के कर्मचारी सुजन घोष ने भी कुछ स्थानीय बीजेपी नेताओं पर 5 लाख रुपये मांगने और मारपीट करने का आरोप लगाया है। उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय बीजेपी नेतृत्व ने आरोपों से इनकार किया है, जबकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।

RSS भी चिंतित, दिल्ली तक पहुंची संगठन की रिपोर्ट

मामला सिर्फ प्रदेश बीजेपी तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी पार्टी नेताओं के खिलाफ सामने आ रहे वसूली, सिंडिकेट और भ्रष्टाचार के आरोपों पर चिंता जताई है।

RSS के पूर्व प्रांत प्रचार प्रमुख जिष्णु बसु साहा ने कहा कि बीजेपी सरकार को अभी करीब तीन महीने ही हुए हैं और लंबे समय से चली आ रही भ्रष्टाचार की व्यवस्था को बदलने में समय लग सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार की कोशिशों से स्थिति जल्द नियंत्रित होगी।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन शिकायतों की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व तक भी पहुंचाई गई है। बंगाल बीजेपी के प्रभारी सुनील बंसल ने इस सप्ताह कोलकाता दौरे के दौरान प्रदेश संगठन के साथ कई बैठकें कीं। इन बैठकों में वसूली के आरोपों के अलावा कानून-व्यवस्था, संगठन, कोलकाता नगर निगम के वार्डों का परिसीमन, आगामी निकाय चुनाव और विधानसभा व लोकसभा उपचुनाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

बीजेपी की अनुशासन समिति भी मामले पर नजर रख रही है। संगठनात्मक जिलों और मंडलों के नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में भ्रष्ट या संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करने और प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

चार हेल्पलाइन नंबरों से सरकार का संदेश, ‘वसूली बर्दाश्त नहीं’

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कट मनी, सिंडिकेट वसूली, अवैध टोल और अवैध शराब से जुड़ी शिकायतों के लिए चार टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर शुरू किए हैं। सरकार की कोशिश है कि लोग सीधे शिकायत दर्ज करा सकें।

बीजेपी के मुताबिक, अगर शिकायत पार्टी के किसी नेता या कार्यकर्ता के खिलाफ आती है तो संगठन स्तर पर भी उसकी निगरानी की जाएगी। शहरी विकास एवं नगर मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने भी कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे पर चेतावनी दी है।

अग्निमित्रा पॉल ने साफ कहा कि पार्टी ने सभी लोगों को किसी प्रक्रिया से अचानक ‘साफ’ नहीं कर दिया है। उनके मुताबिक, जो लोग भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई होगी।

यही संदेश बीजेपी अब जनता के बीच भी पहुंचाना चाहती है कि सत्ता में आने के बाद पार्टी उन गतिविधियों को स्वीकार नहीं करेगी, जिनका आरोप वह पहले टीएमसी सरकार पर लगाती रही है।

टीएमसी से आए नेताओं पर भी सवाल, बीजेपी के सामने असली परीक्षा

बंगाल बीजेपी की एक दूसरी चुनौती टीएमसी से पार्टी में आए नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर है। कई जिलों में टीएमसी के कार्यकर्ता बीजेपी में शामिल हुए हैं। कुछ प्रमुख नेताओं ने भी पार्टी बदली है। इनमें सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक जैसे नाम शामिल हैं, जो बीजेपी में आने के बाद राज्यसभा के लिए भी चुने गए।

पार्टी के एक वर्ग में उन 20 बागी टीएमसी सांसदों को लेकर भी नाराजगी बताई जा रही है, जिनकी नजदीकी बीजेपी से मानी जा रही है और जो अब नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़ चुके हैं।

दिलीप घोष ने इस पर कहा कि पार्टी ने किसी के लिए अपने दरवाजे नहीं खोले हैं और उन टीएमसी नेताओं को स्वीकार करना आसान नहीं होगा, जिनके कारण बीजेपी कार्यकर्ताओं को पहले नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

इस पूरी स्थिति में बीजेपी के लिए चुनौती सिर्फ वसूली के आरोपों पर कार्रवाई करने की नहीं है। असली परीक्षा यह है कि सत्ता में आने के बाद पार्टी अपने संगठन में अनुशासन बनाए रख पाए और उन राजनीतिक तौर-तरीकों से दूरी साबित कर पाए, जिन्हें वह लंबे समय तक टीएमसी के खिलाफ इस्तेमाल करती रही है।

समिक भट्टाचार्य ने अपने कार्यकर्ताओं को चेतावनी देते हुए कहा है कि सत्ता हमेशा एक जैसी नहीं रहती। उनका इशारा साफ था—आज बीजेपी के पास 207 सीटें हैं, लेकिन अगर जनता का भरोसा कमजोर हुआ तो राजनीतिक परिस्थितियां भी बदल सकती हैं।