पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बड़ा दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी पहले चरण की 152 सीटों में से 110 से ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होनी है और राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है।
‘परिवर्तन के लिए वोट’, शाह का दावा
अमित शाह ने कहा कि पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान हुआ है और यह संकेत देता है कि जनता बदलाव चाहती है। उनके मुताबिक, मतदाताओं ने विकास के पक्ष में वोट दिया है और यही रुझान आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय बाद ऐसा हुआ है जब चुनाव के दौरान किसी की मौत की खबर नहीं आई, जिसे उन्होंने शांतिपूर्ण प्रक्रिया का संकेत बताया। इसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग और राज्य पुलिस की सराहना की।
सीटों का आकलन और ‘बहुमत’ का भरोसा
शाह ने दावा किया कि पार्टी के आंतरिक आकलन के अनुसार भाजपा 152 में से 110 से अधिक सीटों पर आगे है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे चरण के बाद पार्टी प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।
हालांकि, ऐसे दावे आम तौर पर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी होते हैं, क्योंकि अंतिम तस्वीर तो मतगणना के बाद ही साफ होती है। फिर भी, यह बयान चुनावी माहौल को और धार देता है।
TMC पर निशाना, ‘भतीजा टैक्स’ का मुद्दा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा की सरकार बनती है तो कथित “भतीजा टैक्स” को खत्म किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों पर श्वेत पत्र लाने और सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच कराने की बात कही। शाह ने कानून-व्यवस्था, घुसपैठ और सिंडिकेट राज जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया।
विकास और सुरक्षा पर फोकस
गृह मंत्री ने कहा कि भाजपा का एजेंडा स्पष्ट है—बंगाल में कानून का राज स्थापित करना, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना। उन्होंने यह भी कहा कि असम की तरह बंगाल में भी अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बंगाल का चुनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। पहले चरण के बाद आए इन दावों और प्रतिक्रियाओं ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। अब सबकी नजर दूसरे चरण की वोटिंग और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।


