उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौरी-चौरा कांड का जिक्र करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि 1922 में अंग्रेजों ने चौरी-चौरा घटना के बाद 172 क्रांतिकारियों को फांसी की सजा सुनाई थी, लेकिन नेहरू उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए। वहीं, पंडित मदन मोहन मालवीय ने अदालत में उनकी पैरवी की और 151 लोगों की जान बचाने में कामयाब रहे। योगी ने यह बात रविवार को गोरखपुर के चौरी-चौरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। इस मौके पर उन्होंने 288 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया।
नेहरू पर योगी का निशाना, मालवीय की पैरवी का किया जिक्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस के नेता अक्सर जवाहरलाल नेहरू की वकालत और कानूनी जानकारी का जिक्र करते हैं, लेकिन चौरी-चौरा कांड के समय उनकी भूमिका अलग थी।
योगी के मुताबिक, 4 फरवरी 1922 को हुई चौरी-चौरा घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत ने किसानों, मजदूरों और व्यापारियों समेत 172 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी। उस समय पंडित मदन मोहन मालवीय ने इन क्रांतिकारियों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ी।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मालवीय की प्रभावी पैरवी के चलते 151 लोगों को फांसी से बचाया जा सका। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिए जाने का भी जिक्र किया और कहा कि यह उनके योगदान के प्रति सम्मान है।
समाज में बंटवारे को बताया गुलामी की बड़ी वजह
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत लंबे समय तक गुलाम इसलिए रहा, क्योंकि समाज में एकता की कमी थी। लोग आपसी विवादों और मतभेदों में उलझे रहे, जिसका फायदा विदेशी ताकतों ने उठाया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर देश पर कब्जा किया और यहां के संसाधनों को लूटा। मुख्यमंत्री ने चौरी-चौरा आंदोलन को स्वतंत्रता संग्राम का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि उस दौर के क्रांतिकारियों का संघर्ष आज भी देश को प्रेरणा देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि चौरी-चौरा की घटना का असर कांग्रेस के नेतृत्व पर पड़ा था और इसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया, लेकिन स्थानीय क्रांतिकारियों का संघर्ष जारी रहा।
21 शहीदों को दी श्रद्धांजलि, ओवरब्रिज का नाम बदलने का सुझाव
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने चौरी-चौरा कांड में फांसी पाने वाले 21 क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी। इनमें नजर अली, कोमल सिंह यादव, लाल मोहम्मद, बेगू तिवारी, अब्दुल्ला और श्याम सुंदर जैसे नाम शामिल हैं।
योगी ने कहा कि इन शहीदों की याद में बना शहीद स्मारक उनके बलिदान की पहचान है। आने वाली पीढ़ियों को भी उनके योगदान के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने भोपा बाजार में रेलवे लाइन के कारण लगने वाले जाम का जिक्र करते हुए बताया कि ओवरब्रिज बनने से स्थानीय लोगों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि इस पुल का नाम ‘शहीद स्मारक ओवरब्रिज’ रखा जाना चाहिए।
288 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात, विकास कार्यों पर जोर
मुख्यमंत्री ने दिवाली और छठ से पहले क्षेत्र के लोगों को करीब 288 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इन परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।
अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले क्रांतिकारियों को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।
योगी ने कहा कि चौरी-चौरा के शहीदों का बलिदान देश के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके सम्मान में स्मारक और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाने का माध्यम है।


