गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार को वैशाली एक्सप्रेस करीब 38 मिनट तक खड़ी रही। वजह थी गार्ड यान में बैठने के लिए कुर्सी का उपलब्ध न होना। नई दिल्ली से ललितग्राम जा रही 15566 वैशाली एक्सप्रेस के गार्ड ने गोरखपुर से ट्रेन का चार्ज लेने के बाद बैठने की व्यवस्था नहीं होने पर ट्रेन आगे ले जाने से इनकार कर दिया।
ट्रेन सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर दो पर पहुंची थी। लखनऊ से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले गार्ड ने अपना टूल बॉक्स उतारा और इसके बाद गोरखपुर से आगे की ड्यूटी संभालने के लिए गार्ड रामाशीष दास पहुंचे।
चार्ज लेने के बाद निरीक्षण के दौरान गार्ड यान में बैठने वाली कुर्सी टूटी हुई मिली। गार्ड ने स्टेशन प्रबंधन से बैठने की उचित व्यवस्था कराने की मांग की। उनका कहना था कि गोरखपुर से बरौनी तक खड़े होकर ड्यूटी करना संभव नहीं है।
टूल बॉक्स पर बैठकर पूरी की थी पिछली ड्यूटी
लखनऊ से गोरखपुर तक ड्यूटी करने वाले गार्ड ने रास्ते में टूल बॉक्स पर बैठकर यात्रा की थी। लेकिन गोरखपुर से चार्ज लेने वाले गार्ड के पास ट्रॉली बैग था, इसलिए उनके पास बैठने का कोई वैकल्पिक साधन नहीं था।
सिग्नल मिलने के बावजूद गार्ड के ट्रेन चलाने से इनकार के कारण वैशाली एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर ही खड़ी रही। अधिकारियों ने समझाया कि आगे के स्टेशन पर बैठने की व्यवस्था कराई जाएगी। इसके बाद गार्ड ने स्टेशन अधीक्षक को मेमो देकर ट्रेन रवाना की।
रेलवे ने क्या कहा?
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार के मुताबिक, ट्रेन करीब 38 मिनट देरी से गोरखपुर से रवाना हुई। उन्होंने बताया कि वैशाली एक्सप्रेस पूर्व मध्य रेलवे की ट्रेन है और गोरखपुर में इसका प्राथमिक रखरखाव नहीं होता।
रेलवे के अनुसार, गार्ड यान में बैठने के लिए इनबिल्ट चेयर की व्यवस्था होती है और अलग से स्टूल या अतिरिक्त कुर्सी उपलब्ध कराने का प्रावधान नहीं है। अधिकारी ने बताया कि ट्रेन दिल्ली से गोरखपुर तक इसी स्थिति में पहुंची थी और रास्ते में किसी अन्य गार्ड ने इस संबंध में आपत्ति नहीं जताई थी।
मामले में लखनऊ मंडल की ओर से सोनपुर मंडल को आधिकारिक कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।


