मुंबई हमलों में जान बचाने वालों में ये बेजुबान भी थे हीरो, अमिताभ बच्चन ने पहनाया था गोल्ड मेडल

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मुंबई: आज 10 साल पहले हुए मुंबई में आतंकी हमले की बरसी है। ये देश का सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था। जिसके बाद पूरी दुनिया में दहशत फैल गई थी। इस हमले में सेना और पुलिस के अलावा सैकड़ों नागरिकों ने जान गंवाई थी.

इस हमले से निपटने के लिए सेना ने जहां एनएसजी कमांडो समेत सेना को लगाया था। वहीं आतंकियों के मनसूबों में पानी फेरने में मुंबई पुलिस के 5 कुत्तों ने सैकड़ों लोगों की जान बचाने का काम किया था। लेकिन आज दसवीं बरसी में इनमें से कोई जीवित नहीं है।

प्रिंस

26/11 को हुए इन हमलों के दौरान प्रिंस ने 17 हैंड ग्रेनड को ढूंढ़ा था। इसके साथ ही चार जिंदा बम ढूंढ़ने में कामयाबी पायी थी। जिनके फटने से बड़ी संख्या में जानमाल का नुकसान हो सकता था। प्रिंस को ताज होटल में लगाया गया था। प्रिंस की मौत चार साल पहले 2014 में बीमारी के बाद हो गई थी।

मैक्स

मैक्स नाम के कुत्ता का जन्म साल 2004 में हुआ था. मुंबई पुलिस के बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीडीएस) में लाया गया। पुणे में प्रशिक्षण के बाद उसे 2005 में विभाग में शामिल किया गया था। मैक्स ने पुलिस का साथ देते हुए 8 किलो आरडीएक्स, 25 ग्रेनेड और 4 डेनोनेटर व बॉल बैयरिंग का पता लगाया था. इस बहादुरी के लिए मैक्स को गोल्ड मेडल से नवाजा गया था. मैक्स के इस काम की चर्चा इतनी थी कि गोल्ड मेडल पहनाने के लिए खुद बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन कार्यक्रम में आए थे। मैक्स इससे पहले साल 2006 के 7/11 हमले और 2011 के जवेरी बाजार धमाके के दौरान भी विस्फोटक ढूंढने में मदद की थी. मुंबई पुलिस को 10 साल तक सेवा करने के बाद 2015 में मैक्स रिटायर हो गया था. 8 अप्रैल 2016 को उसकी मौत हो गई.

टाइगर

मुंबई आतंकी हमले में स्निफर डॉग टाइगर ने कोलाबा इलाके में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का पता लगाने में मदद की थी. हमले के बाद भी वह कई दिनों तक होटल ताज के बाहर ड्यूटी पर तैनात था. मई 2015 में वह सेवानिवृत्त हुआ. 2016 जुलाई में उसकी मौत हुई.

सुल्तान

सुल्तान के बैच मेट और बचपन से दोस्त सुल्तान और टाइगर ने बीडीडीएस के लिए काम किया. हमले की जांच में गुनहगारों तक पहुंचने में सुल्तान ने कई अहम सुराग दिलवाए. जिसकी बाद में किडनी की बीमारी के चलते 18 जून 2016 को मौत हो गई

सीजर

सीजर ने सीएसटी स्टेशन पर दो ग्रेनेड और स्टेशन उड़ाने के लिए लगाए गए आठ किलो आरडीएक्स का पता लगाया. बताया जा रहा है कि सीजर अपने साथियों की मौत से डिप्रेशन में था। उसे ऑर्थराइटिस की शिकायत थी, यह एक बीमारी है जो आमतौर पर लेब्राडोर रिट्रीवर्स में आम है। सीजर के हैंडलर संतोष भोगले ने मीडिया को बताया कि सिर्फ 26/11 ही नहीं, 2006 के मुंबई ट्रेन ब्लास्ट में भी उसने कई बमों को ब्लास्ट से पहले ट्रेस किया था। पुलिस में 2005 से 2013 तक काम कर रिटायरमेंट के बाद सीजर को विरार के एक फार्म में भेजा गया. यहीं उसकी बाद में मौत हुई. उसने कई जिंदा बमों को ढूंढ निकाला था. सीजर ने 14 अक्टूबर, 2016 को अंतिम सांस ली. वह मुंबई हमले में आतंकियों का पता लगाने वाले डॉग स्क्वायड का आखिरी कुत्ता था.

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