झारखंड राज्यसभा चुनाव: JMM-Congress तनातनी खत्म, अब एक-एक सीट पर लड़ाई

झारखंड राज्यसभा चुनाव: JMM-Congress तनातनी खत्म, अब एक-एक सीट पर लड़ाई

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में चल रही खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच समझौता हो गया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के पर्यवेक्षकों भूपेश बघेल और अजय शर्मा की लंबी चर्चा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मान गए। अब दोनों पार्टियां एक-एक सीट पर चुनाव लड़ेंगी।

यह फैसला उन लाखों झारखंडवासियों के लिए राहत भरा है जो गठबंधन की मजबूती और स्थिर सरकार चाहते हैं। राजनीतिक अस्थिरता का असर विकास कार्यों और आम जनजीवन पर पड़ता है। ऐसे में दोनों दलों के बीच सुलह से स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित होने की उम्मीद बढ़ गई है।

कांग्रेस का उम्मीदवार और JMM की नाराजगी

झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 के बीच गठबंधन में तनाव तब शुरू हुआ जब कांग्रेस ने अपनी तरफ से प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। प्रणव झा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मीडिया सलाहकार हैं और झारखंड से जुड़े हैं।

JMM ने इस फैसले पर नाराजगी जताई। पार्टी का आरोप था कि कांग्रेस ने उन्हें विश्वास में लिए बिना यह घोषणा कर दी, जिससे उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। JMM महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि गठबंधन सहयोगी के रूप में यह उचित नहीं था। इसके बाद JMM ने दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया, क्योंकि गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल था।

JMM का उम्मीदवार और आखिरी फैसला

शनिवार को JMM ने पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को एक सीट से अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। बैजनाथ राम ने भी कहा कि कांग्रेस ने उन्हें पहले विश्वास में नहीं लिया। JMM नेतृत्व की बैठक में फैसला हुआ कि दोनों सीटों पर दावेदारी बनती है, इसलिए चुनाव लड़ना चाहिए।

लेकिन रविवार को हुई चर्चा के बाद स्थिति बदल गई। हेमंत सोरेन ने कांग्रेस के पर्यवेक्षकों से बातचीत के बाद समझौते पर हामी भर दी। अब कांग्रेस प्रणव झा के साथ एक सीट लड़ेगी और JMM बैजनाथ राम के साथ दूसरी सीट पर मैदान में उतरेगी।

गठबंधन की मजबूती के संकेत, डिनर पर बुलाए विधायक

समझौते के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार रात गठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर बुलाया है। यह बैठक गठबंधन की एकता को और मजबूत करने का प्रतीक मानी जा रही है।

झारखंड में BJP विपक्ष में है और गठबंधन की किसी भी कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में JMM और कांग्रेस का यह फैसला दोनों दलों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। आम नागरिकों को उम्मीद है कि अब राजनीतिक ऊर्जा विकास, रोजगार और स्थानीय मुद्दों पर लगेगी बजाय आंतरिक कलह पर।

यह घटनाक्रम दिखाता है कि गठबंधन राजनीति में समझौता और संवाद कितना जरूरी है। झारखंड की जनता अब इस सुलह से मिले स्थिरता के फायदे का इंतजार कर रही है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा और चुनावी तैयारियां इस समझौते को और मजबूत बनाएंगी।