छात्रों के विरोध प्रदर्शन और NEET समेत शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर संसद में बुधवार को विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। संसद परिसर में काले कपड़े पहनकर विरोध जताने के बाद विपक्षी नेताओं ने सदन के भीतर भी सरकार को घेरा। इसी दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने छात्रों के मुद्दे पर बोलने का अवसर नहीं मिलने पर नाराजगी जताई और कहा कि यदि छात्रों की आवाज नहीं सुनी गई तो विपक्ष सड़कों पर भी संघर्ष करेगा।
अखिलेश यादव बोले- यह किसी पार्टी का नहीं, छात्रों का मुद्दा है
संसद में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं का है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष का नाम लेते हुए कहा कि अन्य दलों को बोलने का अवसर मिला, लेकिन समाजवादी पार्टी को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्ष छात्रों के हितों के लिए संघर्ष कर रहा है और यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन संसद से बाहर भी जारी रहेगा।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ मारपीट हुई और कुछ छात्राओं के साथ कथित बदसलूकी की घटनाएं सामने आईं। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा कि इन घटनाओं की जिम्मेदारी कौन लेगा।
हालांकि, पुलिस और सरकार की ओर से पहले कहा जा चुका है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई थी।
प्रधानमंत्री से भी पूछा सवाल
अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री आवास पर विपक्ष के धरने का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष वहां “मजबूरी” में गया था। उनके अनुसार, यदि संसद में छात्रों के मुद्दे पर चर्चा हो जाती और सरकार जवाब देती, तो प्रधानमंत्री आवास तक जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री अन्य मंचों से युवाओं के मुद्दों पर बोल सकते हैं, तो संसद में इस विषय पर वक्तव्य क्यों नहीं देते।
संसद से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक जारी रहा विरोध
बुधवार को विपक्षी सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर प्रदर्शन किया और छात्रों के समर्थन में नारे लगाए। इससे पहले मंगलवार शाम राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचे, जहां उन्होंने छात्रों के समर्थन में धरना दिया।
दिल्ली पुलिस ने बाद में प्रदर्शनकारी नेताओं को हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम पहुंचाया, जहां से उन्हें बाद में छोड़ दिया गया। विपक्ष का आरोप है कि छात्रों के साथ अन्याय हुआ है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।



