अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों में से तीन आरोपियों—अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय—को पुलिस कस्टडी रिमांड पर ले लिया गया है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान दानराशि की कथित हेराफेरी और उससे जुड़े कई अहम राज सामने आ सकते हैं।
बुधवार सुबह करीब सात बजे पुलिस तीनों आरोपियों को जेल से अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ के लिए रवाना हुई। इससे पहले पुलिस अदालत की अनुमति से जेल में भी इन आरोपियों से कई घंटे तक पूछताछ कर चुकी थी। अब रिमांड के दौरान आरोपियों से मिली जानकारियों का सत्यापन किया जाएगा और नए साक्ष्य जुटाने की कोशिश होगी।
40 घंटे की मिली कस्टडी रिमांड
विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण) की अदालत ने पुलिस को तीनों आरोपियों की करीब 40 घंटे की कस्टडी रिमांड मंजूर की है। पुलिस ने अदालत में दलील दी थी कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और आरोपियों की निशानदेही पर साक्ष्यों एवं अन्य वस्तुओं की बरामदगी की जानी है।
हालांकि, बचाव पक्ष ने पुलिस की रिमांड अर्जी का विरोध किया, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पुलिस की मांग स्वीकार कर ली।
किन बिंदुओं पर होगी पूछताछ?
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर चोरी की गई दानराशि कहां खर्च की गई, किस माध्यम से उसका इस्तेमाल हुआ और क्या उससे कोई संपत्ति या अन्य सामान खरीदा गया। साथ ही आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, मोबाइल चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी गहन जांच की जाएगी।
पहले भी हो चुकी है पूछताछ
5 जुलाई को अदालत की अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जेल में करीब पांच घंटे तक तीनों आरोपियों से अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की थी। इस दौरान मोबाइल चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से कुछ नई जानकारियां सामने आई थीं, जिनका अब रिमांड के दौरान सत्यापन किया जाएगा।
SIT की जांच जारी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। अब पुलिस रिमांड के दौरान जुटाए गए साक्ष्य जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नोट: मामले की जांच अभी जारी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।






