साइबर अपराधी अब ठगी के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से सामने आया है, जहां एक शिक्षिका को करीब दो घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी स्थिति में रखकर उनसे ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर 40 हजार रुपये मांगने की कोशिश की गई। आरोपी ने खुद को बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय का कर्मचारी बताया और विभाग से जुड़ी कई गोपनीय जानकारियां बताकर भरोसा जीतने की कोशिश की। हालांकि, सही समय पर सतर्कता दिखाने की वजह से शिक्षिका साइबर ठगी का शिकार होने से बच गईं।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर ठग अब केवल आम लोगों ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों को भी विभागीय जानकारी का इस्तेमाल कर निशाना बना रहे हैं।
बीएसए कार्यालय का कर्मचारी बनकर किया फोन, फिर शुरू हुआ दबाव
जानकारी के अनुसार, सैंया विकास खंड के जौनई स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में तैनात शिक्षिका रश्मि शर्मा को शुक्रवार सुबह करीब 11:15 बजे पढ़ाई के दौरान एक कॉल आया।
फोन करने वाले ने खुद को बीएसए कार्यालय का कर्मचारी बताया। उसने स्कूल का नाम, यू-डायस कोड, स्टाफ से जुड़ी जानकारी और अन्य विभागीय विवरण बताकर शिक्षिका का भरोसा जीत लिया। इसके बाद उसने दावा किया कि उनका तबादला जैतपुर कला किया जा रहा है और उनकी जगह दूसरी शिक्षिका की तैनाती होने वाली है।
’40 हजार भेजिए, ट्रांसफर रुक जाएगा’
बातचीत के दौरान आरोपी ने कहा कि यदि वह अपना ट्रांसफर रुकवाना चाहती हैं तो 40 हजार रुपये देने होंगे। इसके लिए उसने व्हाट्सएप पर एक QR कोड भी भेज दिया और 15 मिनट के भीतर भुगतान करने का दबाव बनाया।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 11:15 बजे से दोपहर 1:15 बजे तक लगातार कॉल कर शिक्षिका पर मानसिक दबाव बनाया गया, ताकि वह किसी अन्य व्यक्ति से सलाह न ले सकें। यह तरीका आमतौर पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी साइबर ठगी में अपनाया जाता है, जिसमें पीड़ित को लगातार बातचीत में उलझाकर मानसिक रूप से नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।
एक सवाल से खुली ठग की पोल
शिक्षिका को उस समय शक हुआ, जब कॉल करने वाले ने उनकी ज्वाइनिंग की तारीख पूछी। विभाग का कर्मचारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति के इस सवाल ने उन्हें सतर्क कर दिया।
इसके बाद उन्होंने कॉल रिकॉर्ड करना शुरू किया और दूसरे नंबर से प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री बृजेश दीक्षित से संपर्क किया। उन्होंने इसे साइबर ठगी का प्रयास बताया। इसके बाद शिक्षिका ने तुरंत नंबर ब्लॉक कर दिया और किसी भी तरह की रकम ट्रांसफर नहीं की।
एक और शिक्षिका को बनाया निशाना, सेवानिवृत्त शिक्षक से 20 लाख की ठगी
रिपोर्ट के अनुसार, इसी नंबर से खंदौली ब्लॉक की एक अन्य शिक्षिका को भी कॉल किया गया। वहां भी इसी तरह का प्रयास किया गया, लेकिन स्कूल में मौजूद अन्य शिक्षकों ने समय रहते शक जताया और मामला आगे नहीं बढ़ सका।
वहीं, आगरा के बिराहरू क्षेत्र के रहने वाले एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने साइबर क्राइम थाने में 20 लाख रुपये की डिजिटल ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि ठगों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर आधार से जुड़े बैंक खाते में फर्जी लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। इसके बाद 26 से 30 दिसंबर 2025 के बीच उनके खाते से 20 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।
यह घटनाएं बताती हैं कि साइबर अपराधी अब सरकारी विभागों के नाम, आधिकारिक जानकारी और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल, भुगतान की मांग या QR कोड पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग से आधिकारिक तौर पर जानकारी की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।


