CJP को सरकार का फिर बातचीत का न्योता, जितेंद्र सिंह बोले- 24 घंटे में चार प्रस्ताव भेजे, नड्डा के आवास या कार्यालय में हो सकती है बैठक

CJP को सरकार का फिर बातचीत का न्योता, जितेंद्र सिंह बोले- 24 घंटे में चार प्रस्ताव भेजे, नड्डा के आवास या कार्यालय में हो सकती है बैठक

NEET और छात्रों के आंदोलन को लेकर जारी गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों को बातचीत का निमंत्रण दिया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि सरकार ने पिछले 24 घंटे में चार बार औपचारिक रूप से वार्ता का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार है और बैठक केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा के आवास या कार्यालय में आयोजित की जा सकती है।

‘चार बार भेजा गया बातचीत का प्रस्ताव’

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि बुधवार दोपहर से गुरुवार दोपहर के बीच सरकार की ओर से CJP प्रतिनिधियों को चार औपचारिक प्रस्ताव भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का विषय नहीं मानती और उसका उद्देश्य केवल बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। उनके अनुसार, छात्रों के प्रतिनिधि जिस समय और सुविधा के अनुसार चाहें, सरकार चर्चा के लिए तैयार है।

नड्डा के आवास या कार्यालय में हो सकती है बैठक

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यदि CJP के प्रतिनिधि सहमत होते हैं तो बातचीत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा के आवास या उनके कार्यालय में की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बैठक में जेपी नड्डा और स्वयं डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहेंगे। उनका कहना था कि सरकार चरणबद्ध तरीके से संवाद के माध्यम से समाधान तक पहुंचना चाहती है।

सरकार ने छात्रों से की वार्ता की अपील

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार छात्रों के हित में कदम उठा रही है और बातचीत उसी प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने छात्रों और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि वे बातचीत के लिए आगे आएं, ताकि सभी मुद्दों पर शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से समाधान तलाशा जा सके।

वार्ता को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग शर्तें

गौरतलब है कि इससे पहले CJP ने कहा था कि वह सरकार से बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बैठक जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि वह सरकार के कार्यालय या किसी नेता के आवास पर वार्ता के लिए नहीं जाएगा।

ऐसे में अब दोनों पक्ष बातचीत के पक्ष में तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बैठक के स्थान को लेकर अब भी मतभेद बना हुआ है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि वार्ता किस स्थान पर और किन शर्तों के साथ होती है।