झारखंड छात्र आंदोलन पर कांग्रेस की बड़ी एंट्री, CM सोरेन से होगी अहम बैठक, भर्ती परीक्षाओं पर हो सकते हैं बड़े फैसले

झारखंड छात्र आंदोलन पर कांग्रेस की बड़ी एंट्री, CM सोरेन से होगी अहम बैठक, भर्ती परीक्षाओं पर हो सकते हैं बड़े फैसले

झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे छात्रों की आवाज अब सत्ता तक पहुंच गई है। राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार की अहम सहयोगी कांग्रेस ने आंदोलनरत छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करने का फैसला किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे छात्रों की समस्याओं को सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखेंगे और समाधान निकालने की कोशिश करेंगे। इस घटनाक्रम ने संकेत दिए हैं कि भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार जल्द कुछ महत्वपूर्ण फैसले ले सकती है।

छात्रों और सरकार के बीच बनेगी कांग्रेस की कड़ी

रांची जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व NSUI राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुमार राजा मंगलवार देर रात प्रदर्शन स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों से लंबी बातचीत की और उनकी प्रमुख मांगों को विस्तार से सुना। इसके बाद कांग्रेस ने वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की एक समिति बनाई, जो छात्रों की समस्याओं पर सरकार के साथ चर्चा करेगी।

इस समिति में पार्टी के झारखंड प्रभारी के. राजू, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, राज्य सरकार के चार कांग्रेस मंत्री, कांग्रेस विधायक दल के नेता और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

कुमार राजा ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य सरकार के खिलाफ खड़ा होना नहीं, बल्कि छात्रों और सरकार के बीच संवाद का पुल बनना है। उनके मुताबिक, छात्रों की कई मांगें ऐसी हैं जिन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और इन्हें मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा।

भर्ती परीक्षाओं में बड़े बदलाव की मांग, आउटसोर्सिंग पर उठे सवाल

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बढ़ाने से जुड़ी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी निजी एजेंसियों या आउटसोर्स कंपनियों को देने की बजाय सरकार को खुद मजबूत और स्थायी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।

इसके अलावा आयोगों के अध्यक्ष के तौर पर सेवानिवृत्त अधिकारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि यदि सेवा में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी ऐसी जिम्मेदारी संभालें तो जवाबदेही अधिक प्रभावी हो सकती है।

छात्रों की ओर से मामले की CBI जांच की भी मांग की जा रही है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि पहले से चल रही कुछ CBI जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी हैं। ऐसे में सरकार सभी विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, सरकार ने हाल के दिनों में कई शुरुआती कदम उठाए हैं। कथित अनियमितताओं के मामले में कई कोचिंग संस्थानों पर छापेमारी की गई है। पूर्व मुख्य सचिव और JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते ने पद छोड़ा है। मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।

इसके अलावा 14वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जांच में जरूरत महसूस हुई तो परीक्षा रद्द करने जैसे विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। उनका दावा है कि सरकार पूरे मामले की लगातार समीक्षा कर रही है और पारदर्शी समाधान चाहती है।

भूख हड़ताल से बढ़ा दबाव, छात्रों के साथ खड़े होने का दावा

आंदोलन के दौरान कई छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर भी बैठ गए हैं। कांग्रेस नेता प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टरों की टीम के साथ पहुंचे और छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया। पार्टी का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और उनकी जायज मांगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

कुमार राजा ने कहा कि यह नाराजगी एक दिन में पैदा नहीं हुई है। उनके अनुसार भर्ती परीक्षाओं से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चले आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के समय परीक्षाओं में लगातार देरी हुई, जिसका असर लाखों युवाओं पर पड़ा। अब मौजूदा सरकार उन समस्याओं को सुलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जटिल व्यवस्थाओं को सुधारने में समय लग सकता है।

फिलहाल छात्रों की निगाह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की बैठक पर टिकी है। यदि इस बैठक में कोई ठोस फैसला निकलता है तो झारखंड के हजारों प्रतियोगी छात्रों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।