दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों लोगों के लिए सफर को आसान बनाने वाली एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर योजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक निर्बाध और तेज कनेक्टिविटी देने के लिए करीब 50 किलोमीटर लंबे और 8-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का रूट लगभग तय हो चुका है। लगभग 4,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर सीधे जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा। इसके पूरा होने के बाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों यात्रियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस परियोजना का निर्माण करेगा। इसके साथ ही नोएडा एयरपोर्ट को सड़क ही नहीं बल्कि मेट्रो के जरिए भी मजबूत कनेक्टिविटी देने की तैयारी शुरू हो गई है। यही वजह है कि इस प्रोजेक्ट को एनसीआर के सबसे महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क में शामिल माना जा रहा है।
अक्षरधाम से जेवर एयरपोर्ट तक कैसा होगा पूरा रूट?
प्रस्तावित एलिवेटेड एक्सप्रेसवे की शुरुआत दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से होगी। वहां से यह कालिंदी कुंज के आसपास यमुना पुश्ते के समानांतर आगे बढ़ेगा और हिंडन नदी को पार करते हुए ग्रेटर नोएडा पहुंचेगा।
इसके बाद मार्ग यमुना एक्सप्रेसवे और यमुना नदी के बीच स्थित घरबरा, मुरादपुर, सेक्टर-24, 24A, 26 और 27 जैसे इलाकों से होकर आगे बढ़ेगा। अंतिम चरण में यह मंझावली पुल के जरिए फरीदाबाद-जेवर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा और वहां से सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच जाएगा।
पूरे मार्ग में यमुना नदी पार करने के लिए विशेष एलिवेटेड स्ट्रक्चर और लगभग 120 मीटर लंबा नया पुल भी बनाया जाएगा।
दो हिस्सों में बनेगा प्रोजेक्ट, कई इंटरचेंज भी होंगे तैयार
करीब 50 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे में लगभग 27 किलोमीटर हिस्सा नोएडा प्राधिकरण क्षेत्र में और 23 किलोमीटर हिस्सा यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के क्षेत्र में बनाया जाएगा।
यात्रियों को बिना रुके सफर कराने के लिए पूरे मार्ग पर चार बड़े इंटरचेंज और कई लूप विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा डीएससी रोड से कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए भी अतिरिक्त लूप बनाए जाएंगे, ताकि विभिन्न दिशाओं से आने वाले वाहन आसानी से एक्सप्रेसवे पर चढ़ और उतर सकें।
निर्माण कार्य दो चरणों में होगा। पहले चरण में सेक्टर-94 से यमुना प्राधिकरण क्षेत्र तक सड़क बनेगी, जबकि दूसरे चरण में दिल्ली के अक्षरधाम से नोएडा सेक्टर-94 तक का हिस्सा विकसित किया जाएगा। इस चरण में पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य तकनीकी स्वीकृतियां भी ली जाएंगी।
दिल्ली, हरियाणा और यूपी के लोगों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
यह परियोजना केवल नोएडा एयरपोर्ट तक पहुंचने का नया रास्ता नहीं होगी, बल्कि पूरे एनसीआर की यात्रा व्यवस्था बदलने वाली योजना मानी जा रही है।
दिल्ली के अक्षरधाम, मयूर विहार, पटपड़गंज, कालिंदी कुंज और सरिता विहार जैसे इलाकों से लोग बिना ट्रैफिक सिग्नल के सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे।
हरियाणा के फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल से आने वाले यात्रियों को मंझावली पुल के जरिए सीधा एक्सप्रेसवे मिलेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
वहीं उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, साहिबाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए भी एयरपोर्ट तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
सड़क ही नहीं, मेट्रो से भी जुड़ेगा जेवर एयरपोर्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी देने के लिए नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। एक्वा लाइन के विस्तार के तहत सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन और ग्रेटर नोएडा डिपो से बोड़ाकी तक दो नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे।
करीब 1,200 करोड़ रुपये की इस परियोजना के सिविल निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चयन किया जा चुका है। यह मेट्रो विस्तार सेक्टर-44, सेक्टर-96, सेक्टर-97, सेक्टर-105, सेक्टर-108 और अन्य महत्वपूर्ण इलाकों को भी जोड़ेगा।
अधिकारियों के अनुसार, डीपीआर को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। राज्य और केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलने के पश्चात अगले तीन से चार महीनों में निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि पूरी परियोजना को लगभग तीन वर्षों में पूरा करने की योजना है।
यदि यह परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा। सड़क और मेट्रो दोनों के जरिए मिलने वाली विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी न केवल यात्रियों का समय बचाएगी, बल्कि एनसीआर की आर्थिक गतिविधियों और निवेश को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



