विधानसभा मार्च में AISA अध्यक्ष पर फेंकी स्याही, आरोपी बोला- ‘देशविरोधी’, झारखंड में बढ़ा तनाव

विधानसभा मार्च में AISA अध्यक्ष पर फेंकी स्याही, आरोपी बोला- ‘देशविरोधी’, झारखंड में बढ़ा तनाव

रांची में झारखंड की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शुक्रवार को माहौल अचानक गरमा गया। विधानसभा की ओर मार्च कर रहीं AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक व्यक्ति ने स्याही फेंक दी। आरोपी ने उन्हें ‘देशविरोधी’ बताते हुए नारेबाजी की। पुलिस ने व्यक्ति की पहचान अमरनाथ पांडेय के रूप में की है और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, क्योंकि उसे कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है।

यह घटना रांची के बिरसा चौक के पास हुई। प्रदर्शन में AISA, AISF और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों के समर्थक शामिल थे। ये संगठन JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।

विधानसभा मार्च के दौरान अचानक हुआ स्याही कांड

शुक्रवार को प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा की तरफ मार्च कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में से एक व्यक्ति अचानक आगे आया और नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी।

हटिया के डीएसपी नीरज कुमार ने बताया कि आरोपी की पहचान अमरनाथ पांडेय के तौर पर हुई है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि औपचारिक शिकायत मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर फैसला होगा।

अमरनाथ पांडेय ने मीडिया से बातचीत में नेहा बोरा को उमर खालिद का समर्थक बताया और उन्हें ‘देशविरोधी’ कहा। वहीं, AISA की नेता शिवानी ने आरोप लगाया कि आरोपी बीजेपी समर्थित व्यक्ति है। हालांकि, यह आरोप संगठन की ओर से लगाया गया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।

नेहा बोरा ने घटना के बाद कहा कि स्याही फेंकने से वह डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों और युवाओं की आवाज को इस तरह की कार्रवाई से दबाया नहीं जा सकता।

नेहा बोरा ने बताया ‘बदले की कार्रवाई’

स्याही फेंके जाने के बाद नेहा बोरा ने इसे छात्र आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश बताया। उन्होंने बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि जब छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर मार्च कर रहे थे, तो हिंसा का सहारा लेने की जरूरत क्यों पड़ी।

बोरा ने इस घटना को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए अपने पिछले आंदोलन से भी जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में हुई यह कार्रवाई उसी आंदोलन के बदले की भावना से की गई है।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर उन्होंने छात्रों के मुद्दों को लेकर कथित तौर पर 23 दिनों तक भूख हड़ताल की थी। बोरा का दावा है कि उस आंदोलन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की स्थिति बनी थी।

हालांकि, इन राजनीतिक आरोपों और घटना के पीछे बताए जा रहे कारणों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।

14वें दिन भी जारी है आंदोलन, छह छात्र भूख हड़ताल पर

झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन 7 अगस्त को 14वें दिन में पहुंच गया। आंदोलन के दौरान छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में बड़े स्तर पर अनियमितताएं, कथित घोटाले और पेपर लीक जैसी समस्याएं सामने आई हैं। उनकी मुख्य मांगों में संबंधित परीक्षाओं को रद्द करना और दोबारा परीक्षा की तारीख घोषित करना शामिल है।

मंगलवार रात पांच और प्रदर्शनकारी, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो के साथ भूख हड़ताल में शामिल हुए। महतो खुद कई दिनों से अनशन पर हैं।

इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई। 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने ऐसे ही एक छात्र से मुलाकात की, जिसे स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

सरकार से बातचीत की कोशिश, लेकिन गतिरोध बरकरार

आंदोलन को खत्म करने के लिए छात्रों ने गुरुवार को 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाया था। इसका मकसद राज्य सरकार के साथ बातचीत करके विवाद का रास्ता निकालना था।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले कह चुके हैं कि बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों और नौकरी के अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें अब तक सरकार की ओर से बातचीत के लिए कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है।

आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले हुई थी। इसके बाद यह आंदोलन लगातार आगे बढ़ता गया और राज्य में हाल के वर्षों के बड़े छात्र आंदोलनों में शामिल हो गया।

नेहा बोरा ने कहा है कि AISA 10 अगस्त को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में होने वाले प्रदर्शन में भी शामिल होगा। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर जल्द बातचीत करने और भूख हड़ताल कर रहे प्रदर्शनकारियों के स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।

इस पूरे विवाद का सीधा असर उन हजारों युवाओं पर पड़ता है जो सरकारी भर्ती परीक्षाओं के जरिए नौकरी पाने की तैयारी कर रहे हैं। परीक्षा की विश्वसनीयता, परिणाम और दोबारा परीक्षा जैसे फैसले उनके करियर और महीनों की तैयारी से जुड़े हैं। ऐसे में अब छात्रों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई और आंदोलन को लेकर होने वाली बातचीत पर टिकी है।