ग्रेटर नोएडा वेस्ट यानी नोएडा एक्सटेंशन में रहने वाले करीब 5 लाख लोगों के लिए मेट्रो कनेक्टिविटी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से अटकी नोएडा सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 तक एक्वा लाइन मेट्रो विस्तार परियोजना को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंजूरी मिल गई है। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय भेजा जा रहा है। मंजूरी की अगली प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7.5 किलोमीटर लंबे नए एलिवेटेड कॉरिडोर पर काम शुरू होने का रास्ता साफ हो सकता है।
इस परियोजना में पांच नए मेट्रो स्टेशन बनाए जाने हैं। इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट सीधे नोएडा के मौजूदा मेट्रो नेटवर्क से जुड़ सकेगा। फिलहाल इस इलाके से नोएडा आने-जाने वाले बड़ी संख्या में लोग कैब, ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहनों पर निर्भर हैं। ऐसे में मेट्रो शुरू होने से समय और यात्रा खर्च, दोनों में राहत मिलने की उम्मीद है।
7.5 KM की नई लाइन, पांच जगह बनेगा मेट्रो स्टेशन
नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (NMRC) की 48वीं बोर्ड बैठक में इस परियोजना को मंजूरी दी गई। NMRC के प्रबंध निदेशक कृष्ण करुणेश की ओर से प्रस्ताव बोर्ड के सामने रखा गया था।
प्रस्ताव के मुताबिक, सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 तक करीब 7.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा। इस कॉरिडोर पर कुल पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं।
इनमें सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 शामिल हैं।
इस विस्तार का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें रोजाना ग्रेटर नोएडा वेस्ट से नोएडा के अलग-अलग हिस्सों में काम, पढ़ाई या कारोबार के लिए जाना पड़ता है। सीधे मेट्रो नेटवर्क से जुड़ने के बाद सड़क परिवहन पर निर्भरता कम हो सकती है।
रोज 200-250 रुपये तक बचने की उम्मीद, लेकिन किराया अभी तय नहीं
फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट से नोएडा की यात्रा करने वाले लोगों को कैब, ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन का इस्तेमाल करना पड़ता है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, रोजाना आने-जाने में करीब 300 से 400 रुपये तक खर्च हो सकते हैं।
मेट्रो सेवा शुरू होने के बाद यह खर्च करीब 100 से 150 रुपये तक आने का अनुमान बताया गया है। यानी यात्रियों की रोजाना करीब 200 से 250 रुपये तक की संभावित बचत हो सकती है।
हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। ये अनुमानित यात्रा खर्च हैं। मेट्रो का वास्तविक किराया अभी इस खबर में तय नहीं बताया गया है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित बचत के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
नौकरीपेशा लोगों के लिए रोज का यात्रा खर्च कम होना महीने के बजट पर सीधा असर डाल सकता है। छात्रों और छोटे कारोबारियों के लिए भी कम लागत वाला सार्वजनिक परिवहन राहत दे सकता है।
1500 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट, दो साल में पूरा करने का लक्ष्य
NMRC ने इस परियोजना को करीब 1,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार करने का अनुमान लगाया है। इसे पूरा करने के लिए करीब दो साल की समयसीमा का लक्ष्य रखा गया है।
प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण की ओर से संयुक्त वित्तीय सहयोग प्रस्तावित है।
फिलहाल PIB की मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय भेजा जा रहा है। अंतिम मंजूरी के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इसलिए अभी इसे मेट्रो सेवा शुरू होने की घोषणा मानना सही नहीं होगा। फिलहाल यह परियोजना मंजूरी की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर चुकी है।
ट्रैफिक और प्रदूषण पर भी पड़ सकता है असर
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आबादी बढ़ने के साथ रोजाना नोएडा और आसपास के इलाकों में आने-जाने वालों की संख्या भी महत्वपूर्ण है। वर्तमान में निजी वाहनों और कैब जैसे विकल्पों पर निर्भरता के कारण सड़क यातायात पर दबाव रहता है।
नई मेट्रो लाइन शुरू होने पर यात्रियों के पास सार्वजनिक परिवहन का एक सीधा विकल्प होगा। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। नतीजतन ट्रैफिक और प्रदूषण पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
सबसे बड़ा बदलाव उन परिवारों के लिए हो सकता है जिनका रोज का बजट आने-जाने के खर्च से प्रभावित होता है। अगर प्रस्तावित किराया और यात्रा समय अनुमान के मुताबिक रहता है, तो रोजाना ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों और छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है।
फिलहाल अगली नजर केंद्रीय मंत्रालय की अंतिम मंजूरी पर है। उसके बाद ही निर्माण की दिशा में वास्तविक प्रगति शुरू होगी। अगर परियोजना तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासियों को नोएडा से बेहतर और सीधे मेट्रो कनेक्शन का विकल्प मिल सकता है।




