उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक न्याय और आरक्षण की राजनीति फिर केंद्र में आती दिख रही है। मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने की वर्षगांठ पर लखनऊ में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने ‘मंडल चेतना दिवस’ मनाया। पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने इस मौके पर मंडल आयोग की सभी सिफारिशों को लागू कराने के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि यह अभियान 2027 के विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा।
कार्यक्रम में ‘मंडल आयोग लागू करो, वरना कुर्सी खाली करो’ जैसे नारे लगाए गए। मंच से दलित और ओबीसी प्रतिनिधित्व से जुड़े कई मुद्दे उठे। न्यायपालिका से लेकर निजी क्षेत्र, सरकारी ठेकेदारी, पदोन्नति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग की गई।
मंडल के बहाने 2027 की तैयारी, चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशों ने पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा और सरकारी सेवाओं में नए अवसरों का रास्ता खोला। उनके मुताबिक डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और पीसीएस जैसे क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों की पहुंच बढ़ाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
उन्होंने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह की भूमिका का उल्लेख किया और उन्हें भारत रत्न देने की मांग की।
चंद्रशेखर का कहना है कि मंडल आयोग की लगभग 40 सिफारिशों में से केवल कुछ पर ही अमल हुआ है। उनका दावा है कि सामाजिक न्याय का एजेंडा अभी अधूरा है। इसी मुद्दे को लेकर आजाद समाज पार्टी अब प्रदेशभर में ‘मंडल चेतना जन आंदोलन’ चलाने की तैयारी में है।
यानी पार्टी ने संकेत दे दिया है कि 2027 के चुनाव में आरक्षण और सामाजिक प्रतिनिधित्व उसके प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहेंगे।
न्यायपालिका से निजी सेक्टर तक, आरक्षण का दायरा बढ़ाने की मांग
लखनऊ के कार्यक्रम में चंद्रशेखर आजाद ने आरक्षण को लेकर कई मांगें सामने रखीं। उनकी पार्टी न्यायपालिका में आरक्षण लागू करने, निजी क्षेत्र में आरक्षण देने और सरकारी ठेकेदारी में आरक्षण की व्यवस्था करने की मांग कर रही है।
इसके अलावा पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने की मांग भी उठाई गई। पार्टी चाहती है कि लोकसभा और विधानसभा में ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण का प्रावधान हो।
महिला आरक्षण को लेकर भी पार्टी ने अपनी मांग रखी। चंद्रशेखर ने कहा कि महिलाओं के लिए प्रस्तावित 33 प्रतिशत आरक्षण में ओबीसी और एससी महिलाओं के लिए अलग उप-आरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि सरकारी नौकरियों का दायरा सीमित है और रोजगार का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र में है। ऐसे में अगर सामाजिक प्रतिनिधित्व की बात करनी है तो आरक्षण और सामाजिक न्याय की बहस को निजी क्षेत्र तक भी ले जाना होगा।
‘मंडल के साथ कमंडल की राजनीति’, जातीय जनगणना पर भी सवाल
चंद्रशेखर आजाद ने 1990 के दौर का जिक्र करते हुए कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू होने के साथ ही कमंडल की राजनीति भी तेज हुई। उनका आरोप है कि धार्मिक विमर्श के जरिए सामाजिक न्याय के मुद्दे को पीछे धकेलने की कोशिश हुई।
उन्होंने आरक्षण की समीक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के पुराने बयान का भी जिक्र किया। चंद्रशेखर ने सवाल उठाया कि अगर आरक्षण की समीक्षा की बात होती है तो उससे पहले जातीय जनगणना क्यों नहीं कराई जाती।
उनका कहना है कि अलग-अलग सामाजिक समूहों को कितना प्रतिनिधित्व मिल रहा है, इसका सही आकलन जातीय आंकड़ों के बिना मुश्किल है। इसलिए वह जातीय जनगणना के मुद्दे को भी सामाजिक न्याय की बहस से जोड़ रहे हैं।
सरकार पर खर्च और प्रतिनिधित्व को लेकर भी निशाना
कार्यक्रम में चंद्रशेखर ने राज्य सरकार पर कई आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि सरकार प्रचार-प्रसार पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है और जनता के पैसे का हिसाब दिया जाना चाहिए।
उन्होंने न्यायपालिका, प्रशासन और ऊंचे पदों पर सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन पर भी सवाल उठाया। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में पुलिस की कार्रवाई जाति के आधार पर प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने पर कानून-व्यवस्था में जवाबदेही तय की जाएगी।
हालांकि ये सभी दावे और आरोप चंद्रशेखर आजाद तथा उनकी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं।
2027 में ‘मंडल’ बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा?
आजाद समाज पार्टी के इस कार्यक्रम से उसकी चुनावी दिशा का संकेत साफ दिखाई देता है। पार्टी पिछड़े, दलित और वंचित वर्गों को सामाजिक न्याय के मुद्दे पर लामबंद करने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति के लिहाज से यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरक्षण, जातीय जनगणना और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे सवाल सीधे रोजगार, शिक्षा और सत्ता में हिस्सेदारी से जुड़े हैं। आम मतदाता के लिए भी इन मुद्दों का असर केवल राजनीति तक सीमित नहीं है। सरकारी नौकरी, शिक्षा के अवसर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय रोजमर्रा के भविष्य से जुड़े सवाल हैं।
चंद्रशेखर आजाद ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी मंडल आयोग की सिफारिशों और सामाजिक न्याय को 2027 के चुनाव तक लगातार उठाएगी। अब यह देखना अहम होगा कि यह अभियान प्रदेश की राजनीति में कितना असर पैदा करता है और दूसरे दल इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।




