लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा खेल, कमीशन के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा खेल, कमीशन के लालच में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़

लखनऊ में दवा कारोबार से जुड़ी जांच में नकली और संदिग्ध दवाओं के नेटवर्क को लेकर गंभीर खुलासे हुए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और एसटीएफ की जांच में कमीशन के जरिए मेडिकल स्टोर और सप्लाई नेटवर्क को जोड़ने की बात सामने आई है।

जांच के मुताबिक, नई मेडिकल दुकान पर सप्लाई शुरू कराने वाले कर्मचारियों को 30 से 40 फीसदी तक कमीशन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं गोदाम से मेडिकल स्टोर तक दवा पहुंचाने वालों को वेतन के अलावा करीब 25 फीसदी तक कमीशन दिए जाने का भी आरोप है।

अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मामलों में दुकानदारों को दवाओं की संदिग्धता की जानकारी होने के बावजूद मुनाफे के लालच में उनकी बिक्री किए जाने की आशंका सामने आई है। इससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।

फर्जी बिलिंग से वैध सप्लाई चेन में घुसपैठ

जांच में फर्जी बिलिंग का तरीका भी सामने आया है। कुछ मामलों में बिना वास्तविक दवा की आवाजाही के बिल तैयार किए गए और अलग-अलग फर्मों के बीच क्रॉस-बिलिंग के जरिए कागजों पर लेनदेन दिखाया गया। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसके जरिए संदिग्ध दवाओं को वैध सप्लाई चेन का हिस्सा दिखाने की कोशिश की गई।

हाल की प्रमुख कार्रवाई

  • लखनऊ में करीब 8.87 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग पकड़े जाने का मामला।
  • करीब 39 लाख टैबलेट का हिसाब नहीं मिलने पर चार लोगों के खिलाफ एफआईआर।
  • पारा में नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बनाने वाली फैक्टरी का भंडाफोड़ और करीब 2 करोड़ रुपये के इंजेक्शन बरामद
  • जुलाई 2026 में 25 फर्मों से करीब 26 लाख रुपये की संदिग्ध व नकली दवाएं बरामद।
  • जुलाई में अलग-अलग कार्रवाई में करीब 15.5 लाख रुपये की दवाएं बरामद।
  • 18 जुलाई को बीकेटी में 2,157 संदिग्ध दवा की बोतलें बरामद कर करीब 4.37 लाख रुपये की दवाएं सीज की गईं।

एफएसडीए अधिकारियों का कहना है कि नकली दवा कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और छापेमारी का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।