झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए राहत भरा अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने JPSC और JSSC की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के सरकारी फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस आदेश से उन 2300 से अधिक अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के फैसले के बाद संकट में आ गई थीं।
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर अपना जवाब और काउंटर एफिडेविट दाखिल करे। अब इस मामले की आगे की सुनवाई अदालत में होगी, जहां सरकार को अपने फैसले का आधार स्पष्ट करना होगा।
हाई कोर्ट ने किन याचिकाओं पर दिया राहत का आदेश?
यह मामला उन अभ्यर्थियों की याचिकाओं से जुड़ा है, जिन्होंने सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती दी थी। इन याचिकाओं पर सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा। अदालत ने सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी समेत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फिलहाल सरकार के आदेश पर रोक लगा दी।
इस फैसले के बाद उन उम्मीदवारों को तत्काल राहत मिली है, जो पहले से नौकरी कर रहे थे और जिनकी नियुक्तियों पर अनिश्चितता का माहौल बन गया था।
सरकार ने आखिर परीक्षाएं क्यों रद्द की थीं?
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का लंबा आंदोलन चला था। आंदोलन के दबाव के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए कई भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की घोषणा की थी।
सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द करने और 23 परीक्षाओं की सीआईडी जांच कराने का ऐलान किया था। इसके अलावा JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को भी रद्द करने की घोषणा की गई थी।
सरकार ने यह भी फैसला किया था कि आउटसोर्स एजेंसी TDPL द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं और उनके घोषित परिणामों को निरस्त किया जाएगा। इसी फैसले के चलते बड़ी संख्या में पहले से चयनित उम्मीदवारों की नौकरी पर सवाल खड़े हो गए थे।
26 दिन के आंदोलन के बाद बनी थी सुधार समिति
छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला था। इसके बाद सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार का भरोसा दिया और आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक सुधार समिति गठित की।
इस समिति को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति का काम JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देना और भविष्य में ऐसी शिकायतों को रोकने के उपाय सुझाना है।
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट का यह फैसला अंतिम नहीं है, बल्कि फिलहाल अंतरिम राहत के तौर पर आया है। अब राज्य सरकार को अदालत में यह बताना होगा कि भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का फैसला किन तथ्यों और कानूनी आधार पर लिया गया था।
दूसरी ओर, हजारों उम्मीदवारों की नजर अब अगली सुनवाई पर टिकी है। अदालत के अंतिम फैसले से यह तय होगा कि रद्द की गई भर्ती प्रक्रियाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों का भविष्य क्या होगा।
फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत जरूर मिली है, जो पिछले कुछ दिनों से अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे थे।

