चीनी के दाम पर बड़ी राहत! एक्स-मिल कीमत करीब 20% गिरी, अब खुदरा बाजार में भी नरमी के संकेत

चीनी के दाम पर बड़ी राहत! एक्स-मिल कीमत करीब 20% गिरी, अब खुदरा बाजार में भी नरमी के संकेत

चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार के मुताबिक देश में एक्स-मिल चीनी की कीमत करीब 20 फीसदी तक घट गई है और अब इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। सरकार का कहना है कि सप्लाई चेन में कीमतों का असर पहुंचने में कुछ समय लगता है, इसलिए आने वाले दिनों में खुदरा कीमतों में और नरमी आ सकती है। खास बात यह है कि सरकार की जांच में चीनी की वास्तविक कमी के बजाय जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों को हालिया तेजी की वजहों में पाया गया है।

एक्स-मिल भाव गिरा, अब खुदरा बाजार की बारी

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय लगातार चीनी की कीमत, उपलब्ध स्टॉक और बाजार में आपूर्ति की निगरानी कर रहा है। हाल के दिनों में कीमतों में तेजी आने के बाद सरकार ने कई कदम उठाए। अब एक्स-मिल स्तर पर करीब 20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

इसका सीधा मतलब यह है कि मिल से थोक बाजार तक पहुंचने वाली चीनी पहले की तुलना में सस्ती हुई है। हालांकि, खुदरा दुकानों तक इसका पूरा असर तुरंत नहीं पहुंचता। सप्लाई चेन के अलग-अलग स्तरों से गुजरने के कारण खुदरा कीमतों में बदलाव कुछ समय बाद दिखाई देता है।

सरकार को उम्मीद है कि जैसे-जैसे सस्ती चीनी बाजार में पहुंचेगी, आम उपभोक्ताओं को भी इसका फायदा मिलेगा।

मिलों में जांच हुई तो सामने आई स्टॉक की तस्वीर

कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने देशभर की चीनी मिलों में रखे स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया। इस दौरान कुछ मामलों में मिलों के पास घोषित आंकड़ों से ज्यादा चीनी का स्टॉक मिला।

इससे सरकार के सामने यह तस्वीर साफ हुई कि देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर ऐसी स्थिति नहीं है, जिसमें उपभोक्ताओं को घबराकर ज्यादा खरीदारी करनी पड़े। मंत्रालय ने भी कहा है कि पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अतिरिक्त भंडारण की जरूरत नहीं है।

सरकार ने कुछ मिलों द्वारा की जा रही ‘शॉर्ट सेलिंग’ पर भी ध्यान दिया। इसका मतलब है कि मासिक कोटे के तहत जितनी चीनी बाजार में जारी की जानी थी, उससे कम मात्रा उपलब्ध कराई जा रही थी। इससे मिलों में स्टॉक रहने के बावजूद बाजार में सप्लाई कम दिखाई देती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

एक और समस्या यह सामने आई कि महीने की शुरुआत में बिक्री तय होने के बाद भी कुछ खरीदार चीनी को मिलों से महीने के आखिर तक उठाते थे। इससे बाजार में उपलब्धता को लेकर कृत्रिम कमी जैसा माहौल बन रहा था।

सितंबर से बदलेगा कोटा सिस्टम, चीनी की सप्लाई होगी तेज

सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए सितंबर से मासिक कोटा प्रणाली की जगह पखवाड़ा-आधारित आवंटन व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

नई व्यवस्था में चीनी मिलों को आवंटित मात्रा का कम से कम 40 फीसदी हिस्सा पहले सप्ताह में बाजार में जारी करना होगा। बाकी मात्रा अगले सप्ताह में उपलब्ध करानी होगी।

इसके साथ ही बिक्री के बाद चीनी को मिल परिसर में लंबे समय तक रोककर रखने की गुंजाइश भी कम की जा रही है। सरकार के निर्देश के मुताबिक बिक्री के बाद चीनी को सात दिनों के भीतर मिल से बाहर भेजना अनिवार्य होगा।

इस बदलाव का मकसद साफ है। चीनी मिल से थोक कारोबारी और फिर खुदरा बाजार तक तेजी से पहुंचे। इससे सप्लाई में रुकावट कम होगी और जमाखोरी या सट्टेबाजी की गुंजाइश भी घटेगी। बड़े उपभोक्ताओं को भी उनकी वास्तविक जरूरत से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रखने की सलाह दी गई है।

अक्टूबर-नवंबर में बढ़ेगा उत्पादन, कीमतों पर और दबाव घटने की उम्मीद

आने वाले महीनों में चीनी की उपलब्धता और मजबूत होने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक नई पेराई का सत्र 15 अक्टूबर से शुरू होने वाला है।

अक्टूबर में ही 10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा चीनी उत्पादन का अनुमान है। सरकार ने अक्टूबर में बनने वाली चीनी को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के बेचने की अनुमति भी दी है। इसका उद्देश्य नई पेराई से निकलने वाली चीनी को जल्द से जल्द घरेलू बाजार में पहुंचाना है।

नवंबर में उत्पादन करीब 45 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। अगर यह उत्पादन अनुमान के मुताबिक रहता है, तो बाजार में सप्लाई और बढ़ेगी। इससे कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल सरकार का संदेश यही है कि देश में चीनी की कमी नहीं है। उपभोक्ताओं को घबराकर अतिरिक्त खरीदारी करने की जरूरत नहीं है। सरकार कीमतों और सप्लाई पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर बाजार में आगे भी हस्तक्षेप किया जा सकता है।

आम उपभोक्ता के लिए सबसे अहम बात यह है कि एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट अब खुदरा बाजार तक कितनी तेजी से पहुंचती है। अगर सप्लाई चेन में रुकावट कम होती है और नई व्यवस्था प्रभावी रहती है, तो आने वाले दिनों में चीनी की कीमतों में और राहत देखने को मिल सकती है।