दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए कथित मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को दिल्ली की एक अदालत ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। यह मामला एक नाबालिग CJP कार्यकर्ता के पिता से कथित मारपीट से जुड़ा है। भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब Cockroach Janta Party (CJP) ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर उनकी गिरफ्तारी की मांग की थी। मामले में पुलिस ने FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। आरोपी के खिलाफ POCSO का मामला भी दर्ज है।
बुलंदशहर से हिरासत, फिर दिल्ली में पेशी
स्वतंत्र भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया। इसके कुछ ही घंटे पहले CJP कार्यकर्ताओं ने संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग आरोपी की गिरफ्तारी थी।
शनिवार को भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह ललेर के समक्ष पेश किया गया। खास बात यह रही कि पेशी कोर्ट परिसर में नहीं, बल्कि जज के आवास पर हुई। करीब दोपहर 2 बजे के आसपास आरोपी को वहां पेश किए जाने की बात सामने आई है।
पुलिस ने हाल ही में मामले में SC/ST एक्ट और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं जोड़ी हैं। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं के जुड़ने के बाद केस की कानूनी स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
पीड़ित पक्ष के वकील ने पेशी पर उठाए सवाल
नाबालिग कार्यकर्ता की बेटी निशु आजाद की ओर से पेश वकील ऋषव रंजन ने आरोपी की पेशी के तरीके पर सवाल उठाया। उन्होंने इस घटनाक्रम को ‘अजीब’ बताते हुए कहा कि भारद्वाज को करीब 1:45 बजे पटियाला हाउस कोर्ट के जज के आवास पर पेश किया गया और इसके लिए विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई।
वकील ने सोशल मीडिया पोस्ट में यह भी कहा कि उस समय जज कोर्ट में नहीं बैठे थे। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पुलिस ने किन नई धाराओं के तहत कार्रवाई की है और कितने दिनों की रिमांड मांगी गई थी, इसकी जानकारी उन्हें नहीं थी।
यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि किसी आरोपी की रिमांड पुलिस जांच के अगले चरण को तय करती है। ऐसे में पीड़ित पक्ष के वकील की ओर से पेशी और रिमांड की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना मामले में एक नया पहलू जोड़ता है।
बचाव पक्ष ने बताया, क्यों हुई अलग जज के सामने पेशी
हालांकि, भारद्वाज की ओर से पेश अधिवक्ता उमेश शर्मा ने पूरे घटनाक्रम की अलग वजह बताई। उन्होंने PTI को बताया कि जिस नियमित क्षेत्रीय मजिस्ट्रेट की अदालत में आमतौर पर यह मामला आता है, वह छुट्टी पर थे। इसलिए शुरुआत में आरोपी को लिंक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की जानकारी दी गई थी।
बचाव पक्ष के मुताबिक, बाद में FIR में SC/ST एक्ट और POCSO एक्ट की धाराएं जुड़ने के कारण जांच अधिकारी ने आरोपी को दूसरे न्यायाधीश के सामने पेश किया। यह पेशी वर्चुअल माध्यम से हुई या अन्य तरीके से, इसकी जानकारी उन्हें अदालत की ओर से दी गई। इसके बाद अदालत ने भारद्वाज को एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा था विवाद
स्वतंत्र भारद्वाज उस समय चर्चा में आए, जब एक वीडियो पॉडकास्ट में उनके कथित बयानों का वीडियो वायरल हुआ था। आरोप है कि वीडियो में उन्होंने CJP प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट करने की बात कही थी। इसी दौरान उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्कों का भी दावा किया था।
अब अदालत की ओर से एक दिन की पुलिस हिरासत दिए जाने के बाद जांच एजेंसी को आरोपी से पूछताछ का मौका मिलेगा। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी। फिलहाल यह मामला कथित मारपीट, SC/ST एक्ट, आपराधिक धमकी और POCSO से जुड़ी कार्रवाई के कारण कानूनी तौर पर काफी गंभीर हो चुका है।


