तिलक वर्मा को आउट करना हुआ मुश्किल! दलीप ट्रॉफी में लगातार तीसरी पारी में नाबाद, अब टेस्ट टीम के लिए ठोका मजबूत दावा

तिलक वर्मा को आउट करना हुआ मुश्किल! दलीप ट्रॉफी में लगातार तीसरी पारी में नाबाद, अब टेस्ट टीम के लिए ठोका मजबूत दावा

दलीप ट्रॉफी में तिलक वर्मा का बल्ला लगातार बोल रहा है और खास बात यह है कि उन्हें आउट करना फिलहाल गेंदबाजों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। साउथ जोन के कप्तान तिलक ने ईस्ट जोन के खिलाफ फाइनल में तीसरे दिन नाबाद अर्धशतक जमाकर अपनी टीम की उम्मीदें जिंदा रखी हैं। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उन्होंने शतक और अर्धशतक लगाया था। यानी टूर्नामेंट में लगातार तीन पारियों में तिलक के बल्ले से बड़ी पारी निकली है और तीनों बार वह नाबाद रहे हैं।

ईस्ट जोन ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में साउथ जोन ने तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक 6 विकेट पर 242 रन बना लिए थे। टीम अभी भी काफी पीछे है। अगर साउथ जोन पहली पारी में ईस्ट जोन से पीछे रह जाता है, तो फाइनल में उसकी स्थिति बेहद मुश्किल हो जाएगी। ऐसे वक्त में कप्तान तिलक वर्मा की 56 रन की नाबाद पारी टीम के लिए सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है।

सेमीफाइनल में शतक, फिर अर्धशतक और अब फाइनल में भी नाबाद

तिलक वर्मा ने इस दलीप ट्रॉफी में अपनी बल्लेबाजी का अलग ही स्तर दिखाया है। नॉर्थ जोन के खिलाफ सेमीफाइनल की पहली पारी में उन्होंने 116 रन की नाबाद पारी खेली थी। इसके बाद दूसरी पारी में भी वह क्रीज पर टिके रहे और 51 रन बनाकर नाबाद लौटे।

अब फाइनल में ईस्ट जोन के खिलाफ पहली पारी में तिलक के बल्ले से नाबाद 56 रन निकल चुके हैं। यही उनकी खास ‘हैट्रिक’ है—लगातार तीन पारियां, तीनों में 50 से ज्यादा रन और हर बार नाबाद।

इस प्रदर्शन ने एक बात साफ कर दी है। तिलक सिर्फ सफेद गेंद के खिलाड़ी नहीं हैं। रेड बॉल क्रिकेट में भी वह लंबे समय तक क्रीज पर टिककर रन बनाने की क्षमता दिखा रहे हैं।

708 रन के पहाड़ के सामने साउथ जोन की मुश्किल

फाइनल में साउथ जोन के सामने चुनौती आसान नहीं है। ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 708 रन बना दिए। इसके जवाब में साउथ जोन ने तीसरे दिन तक 242/6 का स्कोर बनाया है।

ऐसे में टीम को बड़ी साझेदारियों की जरूरत है। तिलक वर्मा क्रीज पर टिके हुए हैं और अगर उन्हें दूसरे छोर से मजबूत साथ मिल जाता है, तो साउथ जोन मुकाबले में वापसी की कोशिश कर सकता है।

हालांकि, स्थिति अभी भी मुश्किल है। पहली पारी में ईस्ट जोन के स्कोर से पीछे रहना साउथ जोन के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। ऐसे में टीम की नजरें अपने कप्तान पर टिकी हैं।

अब टेस्ट टीम के दरवाजे पर तिलक की दस्तक?

दलीप ट्रॉफी में लगातार रन बनाने का असर सिर्फ इस फाइनल तक सीमित नहीं है। तिलक वर्मा के प्रदर्शन ने टेस्ट क्रिकेट के लिए उनके दावे को भी मजबूत किया है।

फर्स्ट क्लास क्रिकेट में तिलक ने अब तक 8 शतकों की मदद से 1,729 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 55.77 है। ये आंकड़े बताते हैं कि रेड बॉल क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड मजबूत है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिलक ने अब तक 5 वनडे और 59 टी20 मैच खेले हैं। टी20 क्रिकेट में उनके नाम 2 शतकों के साथ 1,645 रन हैं और औसत 44.45 का है। वहीं वनडे में उन्होंने 4 मैचों में 68 रन बनाए हैं।

अब दलीप ट्रॉफी में जिस तरह वह लगातार बड़ी पारियां खेल रहे हैं, उससे टीम इंडिया के टेस्ट सेटअप में उनके नाम की चर्चा स्वाभाविक है। हालांकि अंतिम फैसला चयनकर्ताओं को ही करना है। फिलहाल तिलक ने अपने बल्ले से इतना जरूर बता दिया है कि रेड बॉल क्रिकेट में उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।