जस्टिस चव्हाण के इस्तीफे के 2 दिन बाद बड़ा फैसला, जिन शत्रुघ्न सिंह पर उठे थे सवाल वही महाराष्ट्र UCC कमेटी में शामिल

जस्टिस चव्हाण के इस्तीफे के 2 दिन बाद बड़ा फैसला, जिन शत्रुघ्न सिंह पर उठे थे सवाल वही महाराष्ट्र UCC कमेटी में शामिल

महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी UCC को लेकर सरकार की तैयारियों के बीच कमेटी में एक नियुक्ति ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र सरकार ने रिटायर्ड IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह को UCC कमेटी में वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 21 सितंबर को हुई। खास बात यह है कि इसके ठीक दो दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने कमेटी से इस्तीफा दे दिया था।

जस्टिस चव्हाण ने 19 सितंबर को हुई कमेटी की बैठक में शत्रुघ्न सिंह की मौजूदगी और उनकी भूमिका पर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उस समय सिंह कमेटी के सात आधिकारिक सदस्यों में शामिल नहीं थे। बैठक के कुछ घंटे बाद ही जस्टिस चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया। अब सरकार की ओर से सिंह को औपचारिक तौर पर कमेटी में वरिष्ठ सलाहकार बनाए जाने के बाद इस घटनाक्रम ने फिर ध्यान खींचा है।

बैठक में गैर-सदस्य की मौजूदगी पर क्यों उठे सवाल?

मामला 19 सितंबर की उस बैठक से शुरू हुआ, जिसमें महाराष्ट्र के प्रस्तावित UCC को लेकर जनता से राय लेने की तैयारी पर चर्चा हुई थी।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शत्रुघ्न सिंह बैठक में सलाहकार के तौर पर मौजूद थे। उस समय वह कमेटी के सात सदस्यों का हिस्सा नहीं थे। जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे वाले ईमेल में इसी बात को प्रमुखता से उठाया।

उनका कहना था कि बैठक के दिन या उससे पहले भेजे गए ईमेल में सिंह को सलाहकार के तौर पर शामिल किए जाने की जानकारी नहीं दी गई थी। इसलिए उनकी मौजूदगी और भूमिका को लेकर सवाल खड़े हुए।

सिंह से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। कमेटी की अध्यक्ष और रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रंजना देसाई से भी प्रतिक्रिया मांगी गई, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

किसने बुलाया था शत्रुघ्न सिंह को?

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि जस्टिस रंजना देसाई ने ही शत्रुघ्न सिंह को 19 सितंबर की बैठक में सलाहकार के तौर पर बुलाया था।

सितंबर में कमेटी की दो बैठकें हुई थीं। सिंह केवल दूसरी बैठक में शामिल हुए। वहां उनका परिचय कमेटी के सदस्यों से कराया गया और बताया गया कि वह UCC से जुड़े मुद्दों पर अपने सुझाव देंगे।

बैठक में जनता से राय लेने के लिए तैयार की जा रही प्रश्नावली पर भी चर्चा हुई। जस्टिस चव्हाण ने सुझाव दिया था कि सवाल इस तरह तैयार किए जाएं, जिससे लोगों को अपने विचार विस्तार से रखने का ज्यादा मौका मिले।

हालांकि, कमेटी ने ऐसा प्रारूप रखने का फैसला किया, जिसमें कुछ सवालों के जवाब तय विकल्पों में होंगे, जबकि कुछ के जवाब विस्तार से दिए जा सकेंगे। प्रस्तावित प्रश्नावली में करीब 30 सवाल होने की बात सामने आई है। इसे आने वाले दिनों में जनता के लिए जारी किया जा सकता है।

UCC वेबसाइट और प्रश्नावली पर सिंह ने भी दिए सुझाव

बैठक में शत्रुघ्न सिंह ने भी अपने सुझाव दिए। उन्होंने UCC पर जनता की राय लेने के लिए तैयार की जा रही वेबसाइट में कुछ बदलावों की जरूरत बताई।

इनमें वेबसाइट पर UCC की बुनियादी जानकारी को किस तरह प्रस्तुत किया जाए और प्रश्नावली को किस तरीके से उपलब्ध कराया जाए, जैसे मुद्दे शामिल थे।

जस्टिस चव्हाण के मुताबिक, बैठक में अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जरूरी बदलाव करने का निर्देश दिया था। बैठक खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही जस्टिस चव्हाण ने कमेटी से इस्तीफा दे दिया।

इसके दो दिन बाद, 21 सितंबर को महाराष्ट्र सरकार ने शत्रुघ्न सिंह को कमेटी में वरिष्ठ सलाहकार नियुक्त कर दिया।

उत्तराखंड UCC से लेकर महाराष्ट्र की नई जिम्मेदारी तक

शत्रुघ्न सिंह के लिए UCC से जुड़ा काम नया नहीं है। वह पहले उत्तराखंड की UCC कमेटी में भी जस्टिस रंजना देसाई के साथ काम कर चुके हैं।

उत्तराखंड की पांच सदस्यीय कमेटी में सिंह सदस्य थे। वह कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली सब-कमेटी और जनता से सुझाव लेने वाले समूह का भी हिस्सा रहे। उत्तराखंड का UCC बिल फरवरी 2024 में विधानसभा से पारित हुआ और मार्च 2024 में राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।

इसके बाद सिंह ने कानून को लागू करने के लिए नियम तैयार करने वाली कमेटी की अध्यक्षता भी की। उत्तराखंड में UCC 27 जनवरी 2025 से लागू है।

अब महाराष्ट्र में उन्हें इसी विषय से जुड़ी कमेटी में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका दी गई है।

महाराष्ट्र में UCC का रोडमैप क्या है?

महाराष्ट्र सरकार ने UCC पर काम करने के लिए कमेटी का गठन जुलाई में किया था। इसे अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर सरकार को सौंपनी है।

कमेटी में जस्टिस एसजी मेहरे, पूर्व मुख्य सचिव डीके जैन, पूर्व एडवोकेट जनरल वीरेंद्र सराफ, पद्मश्री सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता रमेश पतंगे और शिक्षा विशेषज्ञ सुवर्णा रावल समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिसंबर में होने वाले विधानसभा के विंटर सेशन में UCC बिल पेश करने का लक्ष्य बताया है।

फिलहाल सरकार की ओर से शत्रुघ्न सिंह की नियुक्ति हो चुकी है। दूसरी तरफ, जस्टिस आरसी चव्हाण के इस्तीफे और 19 सितंबर की बैठक को लेकर उठे सवाल भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हैं।

आगे कमेटी की रिपोर्ट और जनता से मांगी जाने वाली राय यह तय करने में अहम होगी कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित UCC का स्वरूप क्या होगा। आम लोगों के लिए इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि यूनिफॉर्म सिविल कोड का संबंध विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और परिवार से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों जैसे विषयों से हो सकता है। हालांकि, महाराष्ट्र की प्रस्तावित व्यवस्था का अंतिम स्वरूप कमेटी की रिपोर्ट और सरकार की आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

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