महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर हुए चुनाव के नतीजे मंगलवार, 27 अक्टूबर को घोषित होने हैं। नागपुर, पुणे और छत्रपति संभाजीनगर की स्नातक सीटों के साथ पुणे और अमरावती की शिक्षक सीटों पर भी सबकी नजरें टिकी हैं। मुकाबला सिर्फ महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच नहीं है, बल्कि बागी उम्मीदवारों ने भी कई सीटों पर राजनीतिक समीकरण बिगाड़ने की चुनौती पेश की है। इन चुनावों में कुल 182 उम्मीदवार मैदान में थे और 10.68 लाख से ज्यादा मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। पांचों सीटों पर औसतन 72.96 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। अब नतीजों से पता चलेगा कि गठबंधन के उम्मीदवारों को कितनी मजबूती मिली और बागियों की मौजूदगी ने किसका गणित बिगाड़ा। इसी बीच, उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए भी मंगलवार को मतगणना होनी है।
महाराष्ट्र की 5 सीटों पर किसका पलड़ा भारी? बागियों ने बढ़ाई चुनौती
महाराष्ट्र विधान परिषद की इन पांच सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था। ये द्विवार्षिक चुनाव उन सीटों पर कराए गए, जिनका कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
चुनाव में कुल 10,68,072 मतदाताओं के लिए मतदान की व्यवस्था की गई थी। पांचों सीटों को मिलाकर 182 उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। औसतन 72.96 फीसदी मतदान हुआ, लेकिन अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की भागीदारी में काफी अंतर देखने को मिला।
पांच सीटों पर मतदान का आंकड़ा
अमरावती शिक्षक सीट
92.25%
पुणे शिक्षक सीट
85.86%
नागपुर स्नातक सीट
64.82%
पुणे स्नातक सीट
62.76%
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट
59.12%
आंकड़ों के मुताबिक, अमरावती शिक्षक सीट पर सबसे ज्यादा 92.25 फीसदी मतदान हुआ। वहीं, छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट पर मतदान 59.12 फीसदी रहा, जो पांचों सीटों में सबसे कम है।
इन चुनावों में बागी उम्मीदवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कुछ सीटों पर गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के सामने ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्हें सहयोगी दलों के नेताओं या दूसरे गुटों का समर्थन मिला है। ऐसे में नतीजे केवल उम्मीदवारों की जीत-हार नहीं, बल्कि गठबंधन के भीतर तालमेल की स्थिति भी दिखाएंगे।
नागपुर से पुणे तक मुकाबला दिलचस्प, इन उम्मीदवारों पर निगाहें
पांचों निर्वाचन क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण हैं। प्रमुख मुकाबलों पर नजर डालें तो तस्वीर कुछ इस तरह है।
नागपुर स्नातक सीट: भाजपा के सुधाकर कोहले का मुकाबला कांग्रेस के अभिजीत वंजारी से है। भाजपा के पूर्व विधायक अनिल सोले ने नाम वापस लेकर कोहले को समर्थन दिया था। ऐसे में पार्टी के वोटों का एकजुट रहना अहम होगा।
पुणे स्नातक सीट: भाजपा की डॉ. स्मिता जाधव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की हर्षदा जाधव-देशमुख के बीच प्रमुख मुकाबला है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सुनील मोदी समेत अन्य उम्मीदवार भी मैदान में हैं।
छत्रपति संभाजीनगर स्नातक सीट: यहां अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सतीश चव्हाण और शरद पवार गुट के उम्मीदवार के बीच मुकाबला है। इस सीट का परिणाम दोनों गुटों के राजनीतिक प्रभाव के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।
पुणे शिक्षक सीट: भाजपा के कौस्तुभ गावड़े और कांग्रेस के जयंत आसगांवकर प्रमुख उम्मीदवार हैं। निर्दलीय प्रत्याशी सचिन सानप को एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना का समर्थन मिलने से महायुति के भीतर मतभेदों की चर्चा भी सामने आई।
अमरावती शिक्षक सीट: एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना के किरण सरनाईक और कांग्रेस की अदिति पोहरे के बीच मुकाबला है। भाजपा की बागी उम्मीदवार संगीता शिंदे की मौजूदगी ने भी इस सीट को दिलचस्प बना दिया है।
इन सीटों के नतीजे बताएंगे कि प्रमुख दल अपने समर्थक मतदाताओं को कितना प्रभावी ढंग से मतदान तक ला पाए। साथ ही, बागी उम्मीदवारों को मिलने वाले वोट गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों की जीत-हार में कितनी भूमिका निभाते हैं, यह भी साफ होगा।
नतीजों से खुलेगी गठबंधन की ताकत की तस्वीर
महाराष्ट्र विधान परिषद के इन चुनावों में महायुति और महाविकास अघाड़ी, दोनों के लिए राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर है। चुनाव में बागी उम्मीदवारों की मौजूदगी के कारण केवल पार्टी के पारंपरिक समर्थन के आधार पर नतीजों का अनुमान लगाना आसान नहीं है।
मतगणना में प्राथमिकता वाले मतों की गिनती भी निर्णायक हो सकती है। इसलिए शुरुआती रुझानों और अंतिम परिणामों के बीच अंतर देखने को मिल सकता है।
इन चुनावों का आम जनता पर विधानसभा चुनाव जैसा सीधा असर नहीं होता, लेकिन इनके परिणाम राजनीतिक दलों के संगठनात्मक प्रभाव, गठबंधन के तालमेल और आगामी राजनीतिक रणनीतियों के संकेत दे सकते हैं। खासकर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन से संबंधित मतदाता समूहों के रुझान का भी अंदाजा मिलेगा।
हालांकि, किसी एक सीट के नतीजे से पूरे राज्य में किसी दल की लोकप्रियता का अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। इसके लिए सभी सीटों के परिणाम और उम्मीदवारों को मिले समर्थन को साथ देखकर समझना होगा।
उत्तर प्रदेश में भी 11 MLC सीटों की मतगणना, सुबह 8 बजे से शुरू होगी प्रक्रिया
महाराष्ट्र के साथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनावों की मतगणना भी मंगलवार, 27 अक्टूबर को होनी है। इन चुनावों में पांच स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा के अनुसार, मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी। इसके लिए लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर में केंद्र बनाए गए हैं।
मतगणना के लिए तय प्रमुख स्थान इस प्रकार हैं:
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लखनऊ: रमाबाई रैली ग्राउंड
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वाराणसी: स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन
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आगरा: टूंडला रोड स्थित नवीन कृषि उत्पादन मंडी समिति
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मेरठ: मोदीपुरम स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का गांधी हॉल
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झांसी: बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज का कोठारी हॉल
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बरेली: संजय कम्युनिटी हॉल
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गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कॉमर्स बिल्डिंग
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों में मतगणना के दौरान राजनीतिक दलों की नजर अपने उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर रहेगी। महाराष्ट्र में पांच सीटों पर बागियों की भूमिका चर्चा में है, जबकि उत्तर प्रदेश में 11 सीटों के नतीजे सामने आएंगे।
अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या प्रमुख दल अपने आधिकारिक उम्मीदवारों को जीत दिला पाएंगे या बागी प्रत्याशी चुनावी गणित बदल देंगे। इसका जवाब मतगणना के अंतिम नतीजों से मिलेगा।


