दिल्ली में 1 नवंबर से पुराने वाहनों पर लगने वाली है रोक! हाईकोर्ट के जजों और वकीलों को छूट दिलाने के लिए बार एसोसिएशन ने LG को लिखा पत्र

दिल्ली में 1 नवंबर से पुराने वाहनों पर लगने वाली है रोक! हाईकोर्ट के जजों और वकीलों को छूट दिलाने के लिए बार एसोसिएशन ने LG को लिखा पत्र

दिल्ली में 1 नवंबर से पुराने वाहनों की आवाजाही पर प्रस्तावित रोक को लेकर कानूनी बिरादरी ने सवाल उठाए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने इस प्रतिबंध से जजों, वकीलों और अदालतों में काम करने वाले कर्मचारियों को छूट देने की मांग की है। इस संबंध में एसोसिएशन ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसोसिएशन का कहना है कि बड़ी संख्या में वकील नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसे शहरों से रोजाना दिल्ली आते हैं। ऐसे में BS-VI मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों पर रोक लगने से उनके सामने काम पर पहुंचने का संकट खड़ा हो सकता है।

1 नवंबर से लागू हो सकता है प्रतिबंध, ट्रैफिक पुलिस को मिलेगी कार्रवाई की जिम्मेदारी

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने 30 अक्टूबर को उपराज्यपाल को पत्र भेजा। इसमें उन्होंने प्रस्तावित वाहन प्रतिबंध से न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को राहत देने की मांग की।

पत्र के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने 1 नवंबर से उन वाहनों की राष्ट्रीय राजधानी में आवाजाही रोकने का प्रस्ताव रखा है, जो BS-VI उत्सर्जन मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इस व्यवस्था के तहत दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक विभाग को नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों को जब्त करने का अधिकार भी दिया गया है।

इस प्रस्ताव का सीधा असर उन वाहन मालिकों पर पड़ सकता है, जिनके पास BS-VI से पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहन हैं। खासकर दिल्ली में नौकरी या पेशेवर काम के लिए रोजाना आने-जाने वाले लोगों को अपनी यात्रा के विकल्पों पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है।

वकीलों ने उठाया पुरानी गाड़ियों की वैधता का सवाल

बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी उठाया है। उसका कहना है कि दिल्ली में BS-VI उत्सर्जन मानक वर्ष 2020 में लागू किए गए थे। इससे पहले के मानकों पर बने वाहनों को उनके निर्धारित जीवनकाल तक चलाने की अनुमति दी गई है।

एसोसिएशन ने बताया कि परिवहन विभाग और सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित नियमों के तहत डीजल वाहनों की अधिकतम आयु 10 साल और पेट्रोल वाहनों की 15 साल तय की गई है।

ऐसे में एसोसिएशन का तर्क है कि जिन पुराने वाहनों को उनके निर्धारित जीवनकाल के भीतर चलाने की अनुमति है, उनके इस्तेमाल पर प्रस्तावित प्रतिबंध का असर उन लोगों पर भी पड़ेगा, जो मौजूदा नियमों के तहत अपने वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

यही वजह है कि एसोसिएशन ने इस मामले में अलग से राहत देने की जरूरत बताई है।

नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम से आने वाले वकीलों की बढ़ेगी परेशानी

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में NCR से रोजाना दिल्ली आने वाले वकीलों की समस्या को प्रमुखता से उठाया है। एसोसिएशन के मुताबिक, बड़ी संख्या में वकील नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में रहते हैं और अपने निजी वाहनों से अदालत पहुंचते हैं।

दिल्ली में रहने का खर्च भी काफी अधिक है। ऐसे में कई जजों, वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय राजधानी से बाहर रहना एक व्यावहारिक विकल्प बन गया है।

अगर पुराने वाहनों पर प्रतिबंध लागू होता है, तो इन लोगों को अदालत पहुंचने के लिए दूसरे परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे उनके रोजाना के आवागमन और कामकाज की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

एसोसिएशन का कहना है कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों को रोजाना अदालत पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में उनके सामने परिवहन से जुड़ी बाधाएं पैदा होने से न्याय प्रशासन का काम भी प्रभावित हो सकता है।

न्याय प्रशासन आवश्यक सेवा, LG से मांगी गई विशेष छूट

बार एसोसिएशन ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि जज, वकील और कोर्ट कर्मचारी न्याय प्रशासन जैसी आवश्यक सेवा से जुड़े हैं। अदालतों का कामकाज नियमित रूप से जारी रहना जरूरी है। इसलिए इस पेशे से जुड़े लोगों को प्रस्तावित वाहन प्रतिबंध से छूट दी जानी चाहिए।

एसोसिएशन ने उपराज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप करने और जजों, वकीलों तथा अदालत के कर्मचारियों को राहत देने का आग्रह किया है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह मांग फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से रखी गई है। इसे स्वीकार किए जाने या संबंधित लोगों को औपचारिक छूट दिए जाने का कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

आम वाहन मालिकों के लिए भी यह मामला अहम है, क्योंकि प्रस्तावित प्रतिबंध का दायरा केवल कानूनी पेशे से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं है। यदि व्यवस्था लागू होती है, तो BS-VI से पुराने वाहनों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को दिल्ली में आवाजाही से जुड़ी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।