दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए BS-VI से पुराने वाहनों पर लगाई गई पाबंदी के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने वकीलों और कोर्ट स्टाफ को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के बाहर रजिस्टर्ड ऐसे वाहनों को कोर्ट के कामकाज वाले दिनों में दिल्ली आने की अनुमति दे दी है, जो BS-VI एमिशन स्टैंडर्ड को पूरा नहीं करते। इस फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में रहने वाले उन वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जिन्हें रोजाना या सुनवाई के लिए दिल्ली आना पड़ता है। हालांकि, अदालत ने साफ किया है कि यह छूट केवल कोर्ट के कामकाजी दिनों तक सीमित रहेगी। इसे सभी वाहन मालिकों के लिए सामान्य छूट नहीं माना जाएगा।
सर्दियों में वाहन प्रतिबंध के बीच वकीलों को मिली राहत
दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर वाहनों की आवाजाही को लेकर कई तरह की पाबंदियां लागू की जाती हैं। इसी क्रम में दिल्ली सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग ने 23 जून 2026 को एक अधिसूचना जारी की थी।
इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड और BS-VI मानक से नीचे वाले वाहनों के राष्ट्रीय राजधानी में प्रवेश और संचालन पर रोक लगाई गई है।
इस नियम का असर NCR में रहने वाले उन लोगों पर भी पड़ रहा था, जो अपने निजी वाहनों से दिल्ली आते हैं। खासतौर पर वकीलों और कोर्ट स्टाफ के लिए यह परेशानी का विषय बन गया था, क्योंकि उन्हें अदालतों में पेशी, सुनवाई और दूसरे जरूरी पेशेवर कामों के लिए नियमित रूप से दिल्ली पहुंचना होता है।
इसी समस्या को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के वकीलों की दलील पर सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मांग की थी कि NCR में रहने वाले वकीलों को 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक अपने वाहनों से दिल्ली आने के लिए नियंत्रित छूट दी जाए।
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने एसोसिएशन की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि वकीलों का कोर्ट पहुंचना अक्सर सुनवाई की तारीख, केस की लिस्टिंग और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करता है।
कई बार किसी मामले की सुनवाई अचानक सूचीबद्ध होती है या वकील को किसी जरूरी पेशेवर काम के लिए अदालत पहुंचना पड़ता है। ऐसे में वाहन प्रतिबंध के कारण अगर वकील समय पर कोर्ट नहीं पहुंच पाते हैं, तो इसका सीधा नुकसान उनके मुवक्किलों को हो सकता है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा और गाजियाबाद में रहने वाले वकीलों के लिए निजी वाहन से दिल्ली पहुंचना उनके पेशे का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जस्टिस अमित महाजन ने दी सीमित छूट, सिर्फ कोर्ट के कामकाजी दिनों में मिलेगी अनुमति
जस्टिस अमित महाजन ने शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए NCR के कोर्ट स्टाफ और वकीलों को राहत दी।
अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित लोगों को सर्दियों के दौरान गैर-BS-VI वाहनों पर लागू प्रतिबंध से छूट मिलेगी। हालांकि, यह अनुमति केवल उन दिनों लागू होगी, जब अदालतों में कामकाज होगा।
एसोसिएशन ने अपनी याचिका में यह भी मांग की थी कि दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग को 27 अक्टूबर को दिए गए उसके आवेदन पर विचार करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही विभाग से निर्धारित समय के भीतर एक स्पष्ट और तर्कपूर्ण आदेश जारी करने की मांग की गई थी।
दरअसल, संबंधित अधिसूचना में पर्यावरण विभाग को विशेष श्रेणियों के वाहनों को छूट देने का अधिकार दिया गया है। बार एसोसिएशन का कहना था कि इसी प्रावधान के तहत अदालतों में नियमित रूप से आने वाले वकीलों और कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जा सकती है।
प्रदूषण नियमों से पूरी छूट नहीं मांगी, GRAP की पाबंदियां रहेंगी अलग
इस मामले में बार एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण बात स्पष्ट की थी। उसने पर्यावरण से जुड़े सभी नियमों से छूट देने की मांग नहीं की थी।
एसोसिएशन ने कहा कि उसकी मांग केवल निर्धारित वाहन प्रतिबंध के तहत वकीलों और कोर्ट स्टाफ को सीमित राहत देने की है। वह ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) या अदालतों के अनिवार्य आदेशों के तहत लागू होने वाली सख्त पाबंदियों से किसी विशेष छूट की मांग नहीं कर रही है।
यानी हाईकोर्ट के इस आदेश को दिल्ली में गैर-BS-VI वाहनों के लिए सामान्य राहत नहीं समझना चाहिए। यह छूट विशेष रूप से अदालतों से जुड़े कामकाज के लिए दी गई है।
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा NCR में रहने वाले वकीलों और कोर्ट कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि, आम वाहन चालकों के लिए पहले से लागू प्रदूषण संबंधी प्रतिबंध अपनी जगह बने रहेंगे।



