अमिताभ बच्चन के नाम, आवाज और तस्वीर का बिना इजाजत इस्तेमाल पड़ा भारी! दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, फर्जी लॉटरी और ऐप पर भी सख्ती

अमिताभ बच्चन के नाम, आवाज और तस्वीर का बिना इजाजत इस्तेमाल पड़ा भारी! दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, फर्जी लॉटरी और ऐप पर भी सख्ती

बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर और आवाज का इस्तेमाल करके कमाई करने वालों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी व्यक्ति या कंपनी अमिताभ बच्चन की अनुमति के बिना उनके नाम, फोटो, आवाज, चेहरे या उनकी पहचान से जुड़े दूसरे पहलुओं का व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकता। इसमें फर्जी मोबाइल ऐप, व्हाट्सएप पर चलने वाली लॉटरी, पोस्टर, टी-शर्ट और क्विज बुक जैसे माध्यम भी शामिल हैं। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 5 नवंबर को यह फैसला सुनाया। खास बात यह है कि अदालत का आदेश उन अज्ञात लोगों पर भी लागू होगा, जो इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अभिनेता की पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

अमिताभ बच्चन की पहचान से कमाई करने वालों पर हाईकोर्ट सख्त

अमिताभ बच्चन ने अपने व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों (Personality Rights and Publicity Rights) के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि कई व्यक्ति और संस्थाएं बिना अनुमति उनके नाम, तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल करके व्यावसायिक फायदा उठा रहे हैं।

इस मामले में कई तरह की गतिविधियां सामने आई थीं। इनमें ‘अमिताभ बच्चन वीडियो कॉल’ नाम से चलाया जा रहा मोबाइल एप्लिकेशन भी शामिल था। इसके अलावा व्हाट्सएप संदेशों के जरिए ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) की फर्जी लॉटरी का प्रचार किया जा रहा था।

इतना ही नहीं, अमिताभ बच्चन की तस्वीर वाली सामान्य ज्ञान की किताबें, टी-शर्ट और पोस्टर भी इस्तेमाल किए जा रहे थे। कुछ वेबसाइटों के डोमेन नाम में भी अभिनेता का नाम शामिल किया गया था।

अमिताभ बच्चन ने इन सभी गतिविधियों को अपने व्यक्तित्व और प्रचार अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए अदालत से राहत और हर्जाने की मांग की थी।

बिना अनुमति नाम, आवाज और फोटो का इस्तेमाल गैरकानूनी

जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने अपने आदेश में प्रतिवादियों को अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर, आवाज, हुबहू रूप और व्यक्तित्व से जुड़े दूसरे पहलुओं का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोक दिया।

अदालत ने माना कि किसी मशहूर व्यक्ति की पहचान का बिना अनुमति व्यावसायिक फायदा उठाना गलत तरीके से यह दिखाने जैसा है कि वह व्यक्ति संबंधित उत्पाद, सेवा या गतिविधि का समर्थन कर रहा है।

यानी अगर कोई व्यक्ति अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगाकर कोई उत्पाद बेचता है या उनके नाम से कोई ऐप चलाता है, तो इससे लोगों के बीच यह गलत धारणा बन सकती है कि अभिनेता ने उस उत्पाद या सेवा को अपनी मंजूरी दी है।

कोर्ट ने इस मामले में चार प्रतिवादियों के खिलाफ फैसला दिया, जिन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ समझौता कर लिया था। वहीं चार अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ भी आदेश पारित किया गया, जो अदालत में पेश नहीं हुए थे।

चार प्रतिवादियों ने मानी गलती, कोर्ट ने समझौते को दी कानूनी मंजूरी

अदालत के मुताबिक, प्रतिवादी नंबर 1, 3, 5 और 8 ने अमिताभ बच्चन के साथ विवाद सुलझा लिया था। इन लोगों ने अभिनेता के प्रचार अधिकारों और निजता के अधिकार को स्वीकार किया।

समझौते के तहत उन्होंने भरोसा दिया कि भविष्य में अमिताभ बच्चन की स्पष्ट अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे या व्यक्तित्व के किसी भी दूसरे हिस्से का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने इस समझौते को स्वैच्छिक और कानूनी रूप से वैध माना। अदालत ने कहा कि समझौता किसी दबाव या डर के बिना किया गया है। इसलिए इसे सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 नियम 3 के तहत अदालत की डिक्री का हिस्सा बनाया जा सकता है।

दूसरी तरफ, प्रतिवादी नंबर 2, 4, 6 और 9 को अदालत में पेश होने के लिए समन भेजे गए थे। इसके बावजूद वे न तो सुनवाई में शामिल हुए और न ही उन्होंने अपना लिखित जवाब दाखिल किया।

इस पर अदालत ने CPC के आदेश 8 नियम 10 के तहत उनके खिलाफ फैसला सुनाया। हालांकि, जस्टिस कौरव ने स्पष्ट किया कि इस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल हर मामले में बिना तथ्यों की जांच किए नहीं किया जा सकता। मौजूदा मामले में अदालत को ऐसा कोई विवाद नहीं मिला, जिसके लिए अलग से मुकदमे की पूरी सुनवाई जरूरी होती।

अज्ञात लोगों पर भी लागू होगा आदेश, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ेगी जवाबदेही

इस फैसले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं यानी ‘जॉन डो’ (John Doe) के खिलाफ भी आदेश जारी किया है।

इसका मतलब है कि केवल नामजद प्रतिवादियों तक ही अदालत का आदेश सीमित नहीं रहेगा। ऐसे अज्ञात व्यक्ति भी इसके दायरे में आएंगे, जो वेबसाइट, मोबाइल ऐप, पोस्टर या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए अमिताभ बच्चन की पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

अदालत ने माना कि शिकायत में ऐसे लगातार और अज्ञात तरीकों से हो रहे दुरुपयोग की जानकारी दी गई है, जिनमें अभिनेता के व्यक्तित्व को व्यावसायिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

साथ ही कोर्ट ने अमिताभ बच्चन को यह छूट भी दी है कि भविष्य में अगर उनके व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा कोई नया मामला सामने आता है, तो वह उसके खिलाफ अलग से कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।

इस फैसले का असर सिर्फ फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर किसी सेलिब्रिटी की तस्वीर लगाकर फर्जी विज्ञापन, लॉटरी या उत्पादों का प्रचार करने वाले लोगों और कंपनियों के लिए भी यह एक अहम कानूनी संदेश है। किसी मशहूर चेहरे की लोकप्रियता का इस्तेमाल कमाई के लिए करना अब बिना अनुमति आसान नहीं होगा।

Case Citation: Amitabh Bachchan v. Rajat Negi & Ors.