Bangladesh Election 2026 Voting: बांग्लादेश में संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार चुनाव में हिस्सा नहीं ले पा रही है. बांग्लादेश के इलेक्शन कमीशन ने अवामी लीग पर बैन लगा दिया है. अगर पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है, तो पार्टी के वर्कर और सपोर्टर क्या करेंगे?
पार्टी की नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने वोट का बॉयकॉट करने को कहा है. हालांकि,अवामी लीग के कई वर्कर और सपोर्टर आज बूथ जा रहे हैं, वे किस पार्टी को वोट कर रहे हैं? इसे लेकर लोगों में जिज्ञासा है.
एक समर्थक ने मतदाता सूची की पर्ची सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. उस पोस्ट में पर्ची के साथ लिखा गया है नोट बोट, नो वोट. यानी अवामी लीग के समर्थक मतदान केंद्र में जा रहे हैं, लेकिन वे किसी भी पार्टी के पक्ष में वोट नहीं कर रहे हैं. बल्कि अपने वोट को नष्ट कर रहे हैं.
‘नो बोट, नो वोट’ का आह्वान
बांग्लादेश चुनाव से पहले नारा दिया गया था, ‘नो बोट, नो वोट’. चूंकि अवामी लीग चुनाव में नहीं है, इसलिए वोट देने की कोई जरूरत नहीं है. देश छोड़कर जा चुकीं शेख हसीना ने भी पार्टी वर्करों को एक ऑडियो मैसेज में यही मैसेज दिया.
हालांकि, पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि अगर उन्हें पोलिंग स्टेशन पर न जाने के लिए कहा भी जाए, तो भी वर्करों और सपोर्टरों का एक हिस्सा वोट देने जाएगा. इसके कई कारण हैं. कुछ को केस का डर है, जबकि कुछ लालच में आकर फिर से वोट डाल देंगे.
अवामी लीग ने वोट क्यों नहीं रोका?
वोट के बॉयकॉट की अपील के बावजूद, अवामी लीग चुनाव प्रोसेस को रोकने या रुकावट डालने की कोशिश नहीं कर रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इसके पीछे कई कारण हैं. पहला, आंदोलन करने के लिए सागंठनिक नेतृत्व की कमी है. राजनीतिक सहयोगी या समर्थन करने वाली पार्टियां भी साथ नहीं हैं. पिछले चुनावों में जमात और BNP को हिंसा की वजह से देश और विदेश में आलोचना का सामना करना पड़ा था. दोनों पार्टियों ने वोट का बॉयकॉट किया था. अवामी लीग यह गलती नहीं करना चाहती.
हालांकि, अवामी लीग के वर्कर्स और सपोर्टर्स के एक ग्रुप का कहना है कि मुख्य मकसद अंतरिम सरकार को हटाना था, इस चुनाव में भी यही होगा, उन्हें अब भी लगता है कि अवामी लीग के बिना कोई चुनाव नहीं होगा. अंतरिम सरकार के दौरान अवामी लीग के नेताओं को अरेस्ट किया गया था और कई केस फाइल किए गए थे. अगर यह सरकार चली जाती है, तो वह स्थिति बदल जाएगी.
रेफरेंडम पर क्या करेंगे अवामी लीग के समर्थक?
प्रोथोम एलो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वोटिंग से कुछ दिन पहले, अवामी लीग के पुराने मंत्रियों और सांसदों ने अपने चुनाव क्षेत्रों में लोगों से वीडियो कॉल या ऑडियो मैसेज के ज़रिए पोलिंग स्टेशन पर न जाने की अपील की है, शेख हसीना ने भी उन्हें पोलिंग स्टेशन पर जाने से मना किया है. अनुमान है कि पार्टी के ज्यादातर वर्कर और सपोर्टर वोट देने नहीं जाएंगे.
अवामी लीग के नेताओं का मानना है कि जो सपोर्टर वोट देने जाएंगे, वे रेफरेंडम में ‘नहीं’ के पक्ष में वोट करेंगे. BNP और जमात के बाहर के दूसरे कैंडिडेट या इंडिपेंडेंट और माइनॉरिटी कैंडिडेट अवामी लीग के वोट दिला सकते हैं.



