बंगाल में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम: राज्यपाल सीवी आनंद बोस का इस्तीफा, आरएन रवि बने नए गवर्नर

बंगाल में चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम: राज्यपाल सीवी आनंद बोस का इस्तीफा, आरएन रवि बने नए गवर्नर

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. राज्यपाल सीवी आनंद बोस के कल गुरुवार शाम अचानक इस्तीफे ने राज्य के सियासी गलियारे में हलचल मचा दिया. राज्य में चुनाव से ठीक पहले नए राज्यपाल की नियुक्ति भी हो गई है. हालांकि अचानक इस्तीफे और बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हैरानी जताई और इस घटनाक्रम के पीछे राजनीतिक दबाव का इशारा किया.

राज्यपाल के रूप में बोस के इस्तीफा देने के तुरंत बाद, सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बताया गया कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि अब पश्चिम बंगाल के नए गवर्नर का पद संभालेंगे. गुरुवार देर शाम हुए बड़े घटनाक्रम के तहत केंद्र ने कुछ राज्यपालों को इधर से उधर कर दिया. साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल भी नियुक्त कर दिया. इससे पहले बोस ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया.

बोस ने नहीं बताई इस्तीफे की वजह

दिल्ली से फोन पर समाचार एजेंसी PTI को अपने इस्तीफे की पुष्टि करते हुए, बोस ने कहा, हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है. मैं साढ़े 3 साल से बंगाल का राज्यपाल हूं. यह मेरे लिए काफी है. लेकिन उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे के कारणों के बारे में बताने से मना कर दिया. हालांकि इस फैसले से सियासी गलियारों में अटकलें तेज हो गईं, क्योंकि उनका कार्यकाल खत्म होने में अभी वक्त है, और अगले साल नवंबर 2027 तक कार्यकाल था.

राज्यपाल के अचानक इस्तीफे को लेकर CM ममता ने आरोप लगाया कि बोस पर अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कुछ राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए अमित शाह का दबाव हो सकता है. उन्होंने X पर अपने एक पोस्ट में कहा, मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे किसी तरह की हैरानी नहीं है कि राज्यपाल पर विधानसभा चुनावों से ठीक पहले कुछ राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री का कोई दबाव हो.

चुनाव में TMC-BJP के बीच कड़ी टक्कर

पश्चिम बंगाल में अचानक हुए इस बदलाव ने चुनाव से पहले के माहौल में राजनीतिक साजिश का एक नया एलिमेंट भी डाल दिया है. राज्य में इस बार के चुनाव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच ही कड़े चुनावी मुकाबले के आसार हैं.

सीवी आनंद बोस, ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का जिम्मा संभाला था, लेकिन अपना कार्यकाल पूरा होने से करीब 20 महीने पहले ही इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे के साथ वह लोक भवन के लगातार दूसरे राज्यपाल बन गए, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किए बगैर ही पद से इस्तीफा दे दिया.

केंद्र को ममता बनर्जी की नसीहत

बोस की विदाई ऐसे समय में हुई जब राज्य में कुछ दिनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसमें BJP, ममता बनर्जी की पार्टी को चुनौती दे रही है, और वो लगातार चौथी बार जीत हासिल करना चाहती हैं. TMC प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि राज्यपाल को बदलने का फैसला लेने से पहले उनसे सलाह नहीं ली गई, जो “इस बारे में स्थापित परंपरा” के अनुसार है.

उन्होंने केंद्र को नसीहत देते हुए कहा, “केंद्र को कोऑपरेटिव फेडरलिज्म के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए, इस तरह के एकतरफा फैसले से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को कम करते हैं.”

CM-राज्यपाल के लंबे समय से टकराव

राज्य में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच लंबे समय से टकराव होते रहे हैं. दोनों पक्ष अक्सर प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों पर आमने-सामने होते रहे हैं. हालांकि बोस शुरू में अपने पहले के राज्यपाल जगदीप धनखड़ के मुकाबले कम टकराव वाले रहे, लेकिन धीरे-धीरे गवर्नर ऑफिस और TMC सरकार के बीच रिश्ते बिगड़ते चले गए. प्रशासनिक मसलों, यूनिवर्सिटी में भर्ती और राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे.

बोस से पहले के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने साल 2022 में NDA की ओर से उपराष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब बोस ने भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया.

हालांकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बोस के इस्तीफे के पीछे राजनीतिक के आरोपों को खारिज कर दिया और इसकी बड़ी वजह स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या बताई. समिक भट्टाचार्य ने कहा, “राज्यपाल सीवी आनंद बोस बीमार चल थे और इसका कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए.”