चीन का भारत को संदेश: साथ काम करेंगे तो ‘ग्लोबल साउथ’ को मिलेगी नई ताकत, ताइवान पर भी दो टूक

चीन का भारत को संदेश: साथ काम करेंगे तो ‘ग्लोबल साउथ’ को मिलेगी नई ताकत, ताइवान पर भी दो टूक

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और चीन से आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो ग्लोबल साउथ को नई उम्मीद मिलेगी. उन्होंने BRICS में दोनों देशों के समर्थन पर जोर दिया है. इसके साथ ही पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता जाहिर की है. वांग ने बातचीत से समाधान का अपील की है.वांग यी ने स्पष्ट किया कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है और उसे कभी अलग होने नहीं दिया जाएगा.

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत और चीन से आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की है. बीजिंग में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि अगर भारत और चीन मिलकर काम करें तो ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों को नई उम्मीद मिल सकती है.

वांग यी ने कहा कि आने वाले दो साल में दोनों देशों को ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए. भारत और चीन का सहयोग दुनिया के कई विकासशील देशों के लिए स्थिरता और विकास का रास्ता खोल सकता है.

चीन ने जताई मौजूदा हालात पर चिंता

चीन ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर भी चिंता जताई और कहा कि अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी. वांग यी ने कहा कि इस संघर्ष को तुरंत रोककर बातचीत के जरिए समाधान निकालना जरूरी है. सिर्फ ताकत के इस्तेमाल से किसी संकट का हल नहीं निकलता.

ताइवान कभी अलग देश नहीं बन सकता- वांग यी

चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि ताइवान प्राचीन समय से चीन का हिस्सा रहा है और वह कभी भी अलग देश नहीं बन सकता है. उन्होंने कहा कि चीन किसी भी व्यक्ति या ताकत को ताइवान को चीन से अलग करने की अनुमति नहीं देगा.

वांग यी ने यह बात बीजिंग में नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के सत्र के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही. उनसे ताइवान जलडमरूमध्य में संभावित सैन्य टकराव और चीन के एकीकरण की योजना के बारे में सवाल पूछा गया था.

उन्होंने कहा कि चीन अपनी क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. ताइवान को चीन से अलग करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.