उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 7 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान उनके प्रोटोकॉल का ख्याल न रखने को गलत बताया है. बीएसपी नेता मायावती ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कहा कि भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक सभी को राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना जरूरी. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है. वो मौजूदा देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं. लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिये था.
पूर्व सीएम ने इसे अति-दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी खासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है. सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा. मायावती ने कहा कि इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी मांग भी है.
‘सच में सारी हदें पार कर दी हैं’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन न करने और पश्चिम बंगाल में हुए इंटरनेशनल संथाल कॉन्फ्रेंस की जगह अचानक बदलने के लिए TMC सरकार की आलोचना की है. एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि TMC सरकार ने सच में सारी हदें पार कर दी हैं और राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की पवित्रता का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए.
पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने भी दर्द और पीड़ा जाहिर की है. वो एक आदिवासी समुदाय से हैं. पश्चिम बंगाल के इस रवैये से देश के लोगों के मन में बहुत दुख है. उन्होंने इस घटना को शर्मनाक और पहले कभी नहीं हुआ बताया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास करने वाला हर कोई निराश है. पीएम मोदी ने कहा कि यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय के साथ पश्चिम बंगाल सरकार इतनी लापरवाही से पेश आ रही है.



