असम में कांग्रेस को बड़ा झटका: सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने दिया इस्तीफा, कई नेता पहले ही छोड़ चुके पार्टी

असम में कांग्रेस को बड़ा झटका: सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने दिया इस्तीफा, कई नेता पहले ही छोड़ चुके पार्टी

असम में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटके पर झटका लग रहा है. एक-एक कर कई दिग्गज अब तक पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं. इस लिस्ट में नया नाम लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का जुड़ा है. उन्होंने मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. बोरदोलोई नागांव संसदीय सीट से दो बार के सांसद हैं और असम सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. बोरदोलोई के इस्तीफे से पहले चार अन्य नेता भी कांग्रेस को झटका दे चुके हैं. इन सभी नेताओं ने पिछले 3 महीने में पार्टी का साथ छोड़ा हैं.

कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखे एक पत्र में बोरदोलोई ने कहा कि यह फैसला उन्होंने बेहद दुख के साथ लिया है. उन्होंने लेटर में लिखा कि मैं कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफ़ा देता हूं. उन्होंने कहा कि शुरू से ही, जब मैं MLA, मंत्री या MP बना, तो राज्य का हित हमेशा मेरे मन में सबसे ऊपर रहा है. मैं हमेशा एक गर्वित असमिया रहा हूं और मैंने राज्य की प्रगति में योगदान देने की कोशिश की है।.अगर मुझे घुटन महसूस होती है, तो मैं उस बाधा को हटा दूंगा और ऐसा माहौल तलाशूंगा जहां मैं काम कर सकूं. उन्होंने कहा उनके पास अभी भी असम के लोगों की सेवा करने के लिए कई साल बाकी हैं.

इन नेताओं ने भी छोड़ा पार्टी का साथ

रेजाउल करीम सरकार 11 जनवरी को कांग्रेस में शामिल हुए थे. इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने पार्टी छोड़ दी. करीम सरकार ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन का अध्यक्ष पद छोड़कर कांग्रेस में आए थे. वह दो दशकों से इससे जुड़े हुए थे.

कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका फरवरी में लगा, जब असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह के पार्टी छोड़ने का ऐलान किया. दो बार विधायक रह चुके बोराह ने 2021 से 2025 तक पार्टी की राज्य इकाई का नेतृत्व किया था. उन्होंने आत्म-सम्मान और संगठनात्मक फ़ैसलों से असंतोष का हवाला देते हुए अपने इस्तीफ़े की घोषणा की.

कांग्रेस छोड़ने के बाद बोराह ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप सैकिया की उपस्थिति में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए. बोराह तीन दशकों से भी अधिक समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे. उन्होंने 2006 से 2016 तक असम विधानसभा में तत्कालीन बिहपुरिया निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में उन्हें यह सीट BJP के हाथों गंवानी पड़ी.

अबुल मिया ने भी लिया अलग होने का फैसला

कांग्रेस को एक और झटका अबुल मिया के रूप में लगा. उन्होंने रायजोर दल का दामन थाम लिया. इस कदम को कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा, खासकर धुबरी जिले में, जहां मिया को स्थानीय स्तर पर ज़बरदस्त समर्थन प्राप्त है. अबुल मिया पार्टी का एक अहम चेहरा थे. उन्होंने इससे पहले असम प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव के तौर पर काम किया था और जिला कांग्रेस इकाई के उपाध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं.

7 मार्च को कांग्रेस को एक और झटका लगा. असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC) के वरिष्ठ नेता रतुल कलिता ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने राज्य पार्टी अध्यक्ष गौरव गोगोई और शीर्ष नेतृत्व पर ज़ोरदार हमला करते हुए आरोप लगाया कि वे ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि क्योंकि मैं एक साधारण परिवार से आता हूं, इसलिए पार्टी के वरिष्ठ नेता हमें कोई महत्व नहीं देते. कांग्रेस में केवल मंत्रियों के बेटों या राजनीतिक वारिसों को ही महत्व दिया जाता है.