रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ में दम, लेकिन बड़ी चूक बनी कमजोर कड़ी

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ में दम, लेकिन बड़ी चूक बनी कमजोर कड़ी

Dhurandhar 2: हर फिल्म के कुछ पॉजिटिव साइड होते हैं, तो कुछ नेगेटिव भी. पर ‘धुरंधर’ की कहानी, डायरेक्शन और एक्टर्स के काम से काफी कुछ बदला. लोग खूब एंटरटेन हुए और फिर पार्ट 2 का इंतजार होने लगा.जो फाइनली थिएटर्स में आ चुका है. 18 मार्च को Dhurandhar:The Revenge का पेड प्रीव्यू था, जहां पूरी कहानी को लोग देख पाए. यह एक सुंदर फिल्म है, जो शक्तिशाली शख्स के सामने गरीब और कमजोर लोगों की कहानी बयां करती है. जो धर्म के नाम पर फैलाए गए झूठ और उसके बाद होने वाला नतीजा दिखाती है. जो सत्ता में बैठे बड़े-बड़े लोगों की अपने फायदे के लिए किए गए कामों का पर्दाफाश करती है. जिससे मासूमों की जान जा रही हो, पर सब बस मजे से अपना रास्ता देखते हैं. वो दुख दिखाती है. लेकिन जब आप ‘धुरंधर 2’ देखेंगे, तो यह फिल्म आपको जानदार के साथ ही पॉलिटिकल एजेंडा ड्रिवन भी लगेगी. कुछ सीन्स देखकर लगता है कि एक हिस्से को सही साबित करने की कोशिश हुई है. पर गलती यह नहीं है, बल्कि कुछ और है.

‘धुरंधर 2’ में आदित्य धर ने ठीक उसी कॉन्सेप्ट से काम किया है, जैसे वो ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ में करते दिख चुके हैं. यहां तक कि Dhurandhar भी कुछ ऐसी ही थी. यह फिल्म उन गैंगस्टर की पोल भी खोलती हैं, जो कुछ राजनीतिक पार्टियों की मदद से सालों राज करते रहे. गरीब लोगों को परेशान करते रहे और भारत को बर्बाद करने की प्लानिंग की. पर असल में इन सही गलत के बीच आदित्य धर ने एक तगड़ी मिस्टेक कर दी.

‘धुरंधर 2’ में आदित्य धर से क्या चूक हुई?

हर फिल्म में जितनी इम्पॉर्टेंट कहानी होती है, उतनी ही जरूरी टाइमलाइम होती है. लेकिन ‘धुरंधर 2’ में टाइम फ्रेम बिगड़ा हुआ दिखा. यहां भर-भरकर स्पॉइलर्स हैं, तो आगे अपने रिस्क पर ही पढ़िए. शुरुआत होती है 2002 से, जब रहमान डकैत की मौत के बाद ल्यारी का KING बनने की जंग छिड़ गई. कुछ ही वक्त में हमजा (रणवीर सिंह) के हाथ में काफी ताकत आ गई. 2 साल के टाइम फ्रेम को दिखाया है, जब हमजा अपने दोस्त से फिल्म में कहता है- 2 साल हुए यहां आए. लेकिन उससे पहले ही यालिना (सारा अर्जुन) की प्रेग्नेंसी भी 2 साल में दिखाई गई है. पर हमजा-यालिना का बेटा इतना बड़ा भी हो गया. जो कि 4-5 साल का लगता है. यहां बिगड़ी हुई टाइमलाइन पहली बार दिखी. वैसे आर माधवन और रणवीर सिंह के बीच की यह कहानी 16 साल के टाइम फ्रेम की बताई जाती है. पर बीच में मामला हिला हुआ लगता है.

इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शपथ लेना, नोटबंदी और पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद की हत्या… यह सब भी आपको फिल्म में देखने को मिलता है. लेकिन जब रणवीर सिंह ल्यारी में थे, तो वो वक्त दूसरा था और यह सब काफी बाद के टाइम लाइन में हुआ. एक मिनट के लिए मान भी लेते हैं कि यह सब जोड़ा गया है. जुड़ा तो है ही. 15-16 साल में सबकुछ हो भी सकता है. पर चीजें एकदम फिट नहीं बैठ पाती, जो लगा भी. जैसे यालिना जब हमजा को पकड़ लेती है, तो कहती है तुम्हारे पास ज्यादा वक्त नहीं है. जो है जल्दी करो. पर यह जल्दी और 5-7 साल तो नहीं हो सकते. हमजा एक तरफ सबकुछ जल्दी-जल्दी कर रहा है. TV पर भारत में हमला करने वालों को मौत के घाट उतारते लगातार दिखाया गया है. फिर उसे लंबे टाइमफ्रेम का भी बताया है, गजब ही है. जैसे कहानी भारत पर आई टाइमलाइन को 2016 तक बता दिया गया. तो जब ल्यारी गई, तो काम उसी स्पीड से हो रहा है. सीटियों के बीच थिएटर्स में कुछ लोग लगातार फुस-फुसा रहे थे कि यह कब कहां से जोड़ दिया? हमजा का बेटा एकदम इतना बड़ा हो गया. पर यह तो फिल्मों में अक्सर देखने को मिलता ही रहा है. तो चला लीजिए थोड़ा काम क्योंकि फिल्म बढ़िया है.