NEET पेपर लीक: पुणे की बॉटनी प्रोफेसर मनीषा मंधारे 14 दिन CBI हिरासत में, रिश्वत का बड़ा खुलासा

NEET पेपर लीक: पुणे की बॉटनी प्रोफेसर मनीषा मंधारे 14 दिन CBI हिरासत में, रिश्वत का बड़ा खुलासा

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने पुणे की वरिष्ठ बॉटनी प्रोफेसर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को गिरफ्तार कर लिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की CBI हिरासत में भेज दिया है। NTA द्वारा एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त इस शिक्षिका पर आरोप है कि उन्होंने प्रश्न पत्र लीक करने के बदले छात्रों से भारी रिश्वत ली। यह खुलासा लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है, जिनकी मेहनत और भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा होता है।

CBI की गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी

CBI ने मनीषा मंधारे को उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित एक होटल से गिरफ्तार किया था। दिल्ली में लंबी पूछताछ के बाद उन्हें विशेष CBI जज के सामने पेश किया गया। कोर्ट ने जांच एजेंसी को 14 दिन की हिरासत दी है।

मंधारे महाराष्ट्र के पुणे में बॉटनी की प्रोफेसर हैं। NTA ने उन्हें एक्सपर्ट के तौर पर चुना था, जिससे बॉटनी और जूलॉजी के प्रश्न पत्रों तक उनकी सीधी पहुंच थी। CBI जांचकर्ताओं का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में शामिल अंदरूनी लोगों, बिचौलियों और उम्मीदवारों ने मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया।

रिश्वत का खेल और NTA की भूमिका

CBI ने कोर्ट को बताया कि मंधारे ने प्रश्न पत्र लीक करने के एवज में छात्रों से बहुत बड़ी रकम वसूली। शुरुआती जांच में पता चला है कि कुछ उम्मीदवारों ने आने वाले सवालों के लिए भारी भरकम राशि चुकाई थी।

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत पर CBI ने 12 मई 2026 को इस मामले में आधिकारिक तौर पर केस दर्ज किया था। पूरे NTA तंत्र की प्रक्रिया अब जांच के दायरे में है। इस बीच परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

छात्रों पर पड़ने वाला असर

नीट जैसी परीक्षा देशभर के मेडिकल aspirants के भविष्य का फैसला करती है। पेपर लीक की घटनाएं न सिर्फ मेहनत करने वाले ईमानदार छात्रों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर भरोसा भी कम करती हैं।

CBI की जांच में एक और नाम सामने आया है — पी.वी. कुलकर्णी। वे केमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं और कई सालों तक NEET प्रश्न पत्र तैयार करने वाली समितियों में काम कर चुके हैं। एजेंसी इन सभी पहलुओं की गहन छानबीन कर रही है।

नई परीक्षा 21 जून को कराई जाएगी। ऐसे में छात्रों और अभिभावकों को अब दोबारा तैयारी करनी होगी। इस मामले ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा की मांग को और मजबूत कर दिया है। आम नागरिक देखना चाहते हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

CBI की यह कार्रवाई नीट परीक्षा की पवित्रता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लेकिन जांच पूरी होने तक कई सवाल अनुत्तरित रहेंगे — पूरी साजिश में और कौन-कौन शामिल था, कितने छात्रों ने रिश्वत दी और सिस्टम में कहां-कहां कमजोरियां थीं।

लाखों छात्र अब उम्मीद लगाए बैठे हैं कि 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा निष्पक्ष और leak-proof होगी। नई शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा सुधारों की मांग इस घटना के बाद और तेज हो गई है।